हमारे देश के लोगों की मानसिकता में कई सालों से लड़कियों से उनकी आज़ादी छीन ली गयी थी। वो क्या करेगी- क्या नहीं करेगी, कहाँ जाएगी, कहाँ नहीं जाएगी यह वो डिसाइड नहीं करेगी एक दर्द डिसाइड करेगा। इतिहास में भी अगर हम गोर से झांक कर देखते हैं तो यह प्रथा कब से चालू हुई उसका कोई सबूत नहीं मिलता है।

1. हमारे देश में लड़कियों की कंडीशन क्या है ?

हमारे देश की इतने साल की आज़ादी के बाद भी आज हमारे देश के कई हिस्सों में महिलाओ को पूर्ण रूप से आज़ादी नहीं है। हमारे समाज व परिवार में भी लड़कियों को शुरूवात से ही उन्हें यह बातें समझा दी जाती है कि उन्हें ज़िन्दगी में कई जगह पर कोम्प्रोमाईज़ करना पड़ेगा क्योंकि वो लड़की हैं।

2. क्या डर रहता है माँ बाप को ?

भले ही वो पढ़ने के बारे में हो या नौकरी के बारे में हो या सिर्फ वो उनके जीवन साथी चुनने की बात हो हर जगह हम लड़कों को आगे कर के लड़कियों को यह समझा देते है कि उनके लिए यही ठीक है। आखिर हम होते कौन हैं उन्हें यह बताने वाले या समझाने वाले। पेरेंट्स अपनी बच्चियों को यह इसलिए भी समझाते हैं क्योंकि उन्हें ऐसा लगता है कि यह ज़माना और हालात उनके लिए ख़राब हैं तो उन्हें थोड़ा बचके रहना चाहिए । लेकिन इस बचा के रख लेने के चक्कर में हम लोग बहुत अच्छे टैलेंट को ख़त्म करते जा रहे हैं।

3. क्यों सिखाते हैं लड़कियों को कोम्प्रोमाइस पेरेंट्स ?

दरअसल ऐसा बहुत से माता-पिता सामाजिक बुराइयों व आसामाजिक तत्वों से अपनी बच्ची की सुरक्षा करने के लिए भी करते हैं। कोई भी पेरेंट्स यह नहीं चाहते की उनके बच्चे किसी तरह की कोई परेशानी में पड़े और खासकर बात जब लड़कियों की आती है तो माता-पिता ज्यादा ही सहज हो जाते हैं। तो वो अपनी बच्चियों को यह सीखा देते है कि ज़िन्दगी हर जगह तुम्हे ही हालातो से समझौता (कोम्प्रोमाईज़) करना पड़ेगा।

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