अगर आप एक लड़की हैं और लड़को से दोस्ती रखती हैं तो इसका मतलब आप भारतीय समाज के रूल्स को ब्रेक कर रही है ,आप हमारी भारतीय संस्कृति को भूल रही है । ऐसा मैं इसलिए बोल रही हूँ क्योंकि हमारे समाज के अकॉर्डिंग “लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते “।

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स्कूल – कॉलेज हो या ऑफिस, हम दोस्ती हर जगह करते हैं। कहीं दोस्ती सेम जेंडर में होती है तो कहीं फ्रेंडशिप अपोजिट जेंडर से। सेम जेंडर में दोस्ती पर कोई कुछ नहीं कहता लेकिन वहीं लड़का और लड़की की दोस्ती पर लोग काफी बातें करते हैं। क्योंकि ज़्यादातर लोगों का मानना है कि एक लड़का और लड़की कभी भी सिर्फ दोस्त नहीं हो सकते हैं।

“लड़का और लड़की के बीच कभी mutual understanding, बातचीत और एक हैल्थी फ्रेंडशिप का रिश्ता हो ही नहीं सकता। ज़रूर दोनों एक दूसरे से प्यार करते होंगे।” – ऐसा क्यों सोचता है समाज ?

एक लड़का और लड़की सिर्फ़ दोस्त क्यों नहीं हो सकते ?

इश्क होने में कोई बुराई नहीं है, पर बिना कुछ जाने किसी की दोस्ती को जज करना बुरा हैं। हम में से कितनी लड़कियां होंगी जिनके मेल फ्रैंड्स होंगे। आपका वो मेल फ्रेंड आपका बेस्ट फ्रेंड होगा, आपकी केयर करता होगा। आपके उदास होने पर आपको मोटीवेट करता होगा , पीरियड्स के दौरान चॉकलेट ला के देता होगा। कभी आपसे लंबी फोन कॉल या चैट करता होगा और ये सब करते हुए भी वो सिर्फ़ आपका दोस्त हैं, बॉयफ्रेंड नहीं।

सिर्फ़ प्यार अंधा नहीं होता , दोस्ती भी होती है

जैसे लोग प्यार में अंधे हो जाते हैं ठीक वैसा ही दोस्ती में होता हैं। आजकल लड़का हो या लड़की वो किसी से भी क्लास, जेंडर, कास्ट या रिलिजन देख के दोस्ती नहीं करते। दोस्ती में दिल देखा जाता हैं अगर सामने वाला इंसान दिल का अच्छा हैं तो ज़ाहिर सी बात हैं आप उनसे हमेशा दोस्ती रखना चाहोगे।

लड़का – लड़की की दोस्ती क्यों ज़रूरी हैं ?

लड़का – लड़की के आपस में बात करने से उनकी ऑपोज़िट जेंडर के बारे में नॉलेज और अंडरस्टैंडिंग बढ़ती है। वह एक दूसरे का सम्मान करना सीख जाते हैं। जीवन में कई बार कुछ ऐसी प्रोब्लेम्स आती हैं जिसके लिए हमे ऑपोज़िट जेंडर की हेल्प या एडवाइस की ज़रूरत पड़ती हैं , उस टाइम आपकी ये दोस्ती बहुत काम आती हैं। अगर आपको शुरू से ही ऑपोज़िट जेंडर से इंटरैक्ट करना आता होगा तो आपको किसी से बात करने में आपको संकोच नहीं होगा

हम 21वी सदी में जी रहे हैं लेकिन शायद हमारी सोच आज भी पीछे चल रही है। हमे किसी को अपनी दोस्ती साबित करने की ज़रूरत नहीं है , सोसाइटी तो हमेशा से हमें जज करती है, कभी लड़को से दोस्ती करने पर जज करती है , कभी लेट नाईट तक जॉब करने पर , तो कभी छोटे कपड़े पहनने पर। मोहल्ले में रहने वाली आंटी पड़ोस वाले अंकल से हसीं – मज़ाक कर सकती हैं लेकिन कोई लड़की किसी लड़के से दोस्ती नहीं कर सकती। समाज को समझना होगा एक लड़का और लड़की सिर्फ़ दोस्त हो सकते हैं , ज़रूरत पड़ने पर एक दूसरे का साथ दे सकते हैं।

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