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Photograph: (freepik)
एक टाइम था जब शादी की ऐज तय मानी जाती थी—पढ़ाई खत्म हुई, नौकरी लगी और शादी हो गई। लेकिन आज की युथ इस फॉर्मूले पर चलने को तैयार नहीं है। यंग ऐज में शादी करें या पहले खुद को सेटल करें—यह सवाल आज के युथ के लिए सबसे बड़ी कन्फ्यूज़न बन चुका है। यह कन्फ्यूज़न सिर्फ़ सोच का नहीं, बदलते टाइम, सोच और प्रिऑरिटीज़ का नतीजा है।
क्या कम उम्र में शादी करें या बाद में? आज की युथ कन्फ्यूज़ क्यों है
करियर और सेल्फ-आइडेंटिटी की तलाश
आज की युथ शादी से पहले खुद को पहचानना चाहती है। एजुकेशन, करियर, फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस और अपने ड्रीम्स को पूरा करना अब उनकी पहली प्रिऑरिटीज़ बन गई है। खासकर महिलाएँ अब सिर्फ़ शादी को अपनी डेस्टिनेशन नहीं मानतीं। ऐसे में जल्दी शादी का फैसला कई लोगों को अपने पर्सनल गोल्स के बीच रुकावट जैसा लगता है।
बदलती रिलेशनशिप डायनामिक्स
आज के रेलशनशिप पहले जैसे सिंपल नहीं रहे। डेटिंग, सिचुएशनशिप और लिव-इन जैसे कॉन्सेप्ट्स ने युथ को रिश्तों को समझने का टाइम दिया है। लोग अब शादी से पहले यह जानना चाहते हैं कि वे इमोशनली और मेंटली किसी के साथ लंबे समय तक चल पाएंगे या नहीं। यही सोच शादी के फैसले को और सोच-समझकर लेने की वजह बनती है।
मेंटल और इमोशनल रेडीनेस
शादी सिर्फ़ ऐज का फैसला नहीं है, बल्कि मेंटल और इमोशनल रेडीनेस का भी सवाल है। आज की युथ जानती है कि बिना खुद को समझे शादी करना आगे चलकर रिश्तों में दिक्कतें ला सकता है। इसलिए वे “सही ऐज” से ज़्यादा “सही टाइम” को इम्पोर्टेंस दे रहे हैं।
सोशल प्रेशर बनाम पर्सनल चॉइस
हालाँकि सोच बदली है, लेकिन सोसाइटी और फॅमिली का प्रेशर आज भी मौजूद है। “अब उम्र निकल रही है” या “ज्यादा देर मत करो” जैसे सवाल युवाओं को और कन्फ्यूज़ कर देते हैं। एक तरफ़ अपनी लाइफ को अपने तरीके से जीने की चाह, दूसरी तरफ़ सोसिएटल एक्सपेक्टेशंस—यही टकराव कन्फ्यूज़न को बढ़ाता है।
डर और एक्सपीरियंस की सीख
ब्रोकन रिलेशनशिप, डाइवोर्स और अनहैप्पी मैरिज की कहानियाँ भी युवाओं को सोचने पर मजबूर करती हैं। वो जल्दबाज़ी में ऐसा फैसला नहीं लेना चाहते, जिसका असर पूरी ज़िंदगी पर पड़े। आज की युथ शादी से भाग नहीं रही, बल्कि उसे बेहतर तरीके से समझना चाहती है। कम ऐज या ज़्यादा उम्र से ज़्यादा ज़रूरी है सही टाइम, सही पार्टनर और खुद के लिए सही फैसला लेना। यही सोच इस कन्फ्यूज़न की असली वजह है।
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