Border 2 Review: क्या फिल्म पहले वाले का जादू दोहरा पाई?

27 साल बाद Border 2 रिलीज हो गई है। 1997 की Border ने देशभक्ति फिल्मों में अलग मुकाम बनाया था। क्या Border 2 उस जादू को दोहरा पाई? आइए जानते हैं पांच बड़े पॉइंट्स के साथ।

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Tamanna Soni
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via (imdb)

27 साल का इंतजार खत्म हुआ और Border 2 आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। 1997 की Border ने देशभक्ति फिल्मों में एक अलग मुकाम बनाया था। सनी देओल, सुनील शेट्टी और अक्षय खन्ना की उस फिल्म को आज भी लोग याद करते हैं। अब सवाल यह है कि क्या Border 2 उस पुरानी फिल्म के जादू को दोहरा पाई है या नहीं? आइए जानते हैं पांच बड़े पॉइंट्स के साथ।

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Border 2 रिव्यू: क्या फिल्म पहले वाले का जादू दोहरा पाई?

1. पहली Border और Border 2 में क्या फर्क है?

पहली Border 1971 की लोंगेवाला की लड़ाई पर आधारित थी जहां 120 भारतीय सैनिकों ने 2000 पाकिस्तानी सैनिकों का सामना किया था। वो फिल्म सच्ची घटना पर बनी थी और इसीलिए उसमें भावनाओं की गहराई थी। "संदेसे आते हैं" गाना आज भी लोगों की आंखों में आंसू ला देता है। Border 2 में भी देशभक्ति और युद्ध के दृश्य हैं, लेकिन पहली फिल्म जैसी सच्चाई और जुड़ाव नहीं दिखता। पहली फिल्म में हर किरदार याद रह जाता था, लेकिन इस बार कुछ किरदार कमजोर लगे। एक्शन सीन्स जरूर इस बार ज्यादा बेहतर और आधुनिक तकनीक से बनाए गए हैं। पहली Border की सादगी और भावुकता Border 2 में थोड़ी कम महसूस होती है।

2. कहानी और निर्देशन कैसा रहा?

Border 2 की कहानी फिर से भारत-पाकिस्तान सीमा पर सैनिकों की बहादुरी को दिखाती है। निर्देशन अच्छा है और युद्ध के दृश्यों को बड़े पर्दे के लिए शानदार तरीके से फिल्माया गया है। लेकिन पटकथा में कुछ जगहों पर कमजोरी दिखती है। फिल्म की रफ्तार बीच में थोड़ी धीमी हो जाती है और कुछ सीन्स खिंचे हुए लगते हैं। इमोशनल सीन्स अच्छे हैं, खासकर जब सैनिकों के परिवार की बात आती है। सिनेमेटोग्राफी और VFX काबिले तारीफ हैं। युद्ध के दृश्य यथार्थवादी हैं और दर्शकों को अपनी सीटों से बांधे रखते हैं। संगीत औसत है और पहली Border के मुकाबले काफी कमजोर पड़ता है। कोई ऐसा गाना नहीं है जो दिल में बस जाए।

3. एक्टिंग और कलाकारों का प्रदर्शन

फिल्म में सभी कलाकारों ने मेहनत की है और अपने किरदारों को जिया है। लीड एक्टर्स ने देशभक्ति की भावना को सही तरीके से पेश किया है। सैनिकों के रूप में उनकी फिजिकल ट्रेनिंग स्क्रीन पर साफ दिखती है। इमोशनल सीन्स में सभी ने बेहतरीन काम किया है। सपोर्टिंग कास्ट भी मजबूत है और हर किरदार अपनी जगह फिट बैठता है। हालांकि, पहली Border में सनी देओल का "ये दिल मांगे मोर" वाला पैशन इस बार किसी किरदार में नहीं दिखा। फिल्म में महिला किरदार भी हैं जो सैनिकों की पत्नियों और माताओं का रोल निभाते हैं और उन्होंने भी अच्छा काम किया है। कुल मिलाकर एक्टिंग के मामले में फिल्म पास हो जाती है।

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4. दर्शकों की राय क्या है?

सोशल मीडिया पर दर्शकों की मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है। कुछ लोगों को फिल्म बहुत पसंद आई है तो कुछ को निराशा हुई है। Twitter पर कई यूजर्स ने अपनी राय शेयर की है। एक यूजर ने लिखा कि "Border 2 अच्छी फिल्म है लेकिन पहली वाली बात नहीं है।" दूसरे ने कहा कि "एक्शन सीन्स धांसू हैं, देखने लायक है।" कुछ दर्शकों का कहना है कि फिल्म थोड़ी लंबी है और इंटरवल से पहले बोरिंग लगती है। युवा दर्शकों को एक्शन और VFX पसंद आए हैं जबकि पुरानी Border के फैन्स को लगता है कि वो भावुकता इस बार नहीं मिली। फैमिली ऑडियंस के लिए यह अच्छी फिल्म बताई जा रही है। सिनेमाघरों में रिस्पॉन्स अच्छा है और पहले वीकेंड की कमाई भी ठीक-ठाक रही है।

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5. क्या आपको देखनी चाहिए Border 2

अगर आप देशभक्ति और युद्ध फिल्मों के शौकीन हैं तो Border 2 जरूर देखें। यह एक पैसा वसूल फिल्म है जो आपको सिनेमाघर में देखनी चाहिए। बड़े पर्दे पर युद्ध के दृश्य और साउंड इफेक्ट्स का मजा अलग ही है। परिवार के साथ देखने के लिए यह सही फिल्म है। हालांकि, अगर आप पहली Border जैसी क्लासिक फिल्म की उम्मीद लेकर जा रहे हैं तो थोड़ी निराशा हो सकती है। Border 2 अपनी जगह एक अच्छी फिल्म है लेकिन वो जादू नहीं है जो 1997 में था। फिर भी, देशभक्ति की भावना और सैनिकों के प्रति सम्मान जगाने में यह फिल्म कामयाब रहती है। अगर आप एक्शन और इमोशन का मिक्स चाहते हैं तो यह फिल्म आपके लिए है। रेटिंग की बात करें तो 5 में से 3.5 स्टार दिए जा सकते हैं।

अंतिम फैसला: Border 2 देखने लायक है, खासकर अगर आप देशभक्ति फिल्मों के फैन हैं। पहली Border की तरह क्लासिक तो नहीं, लेकिन एक अच्छा one-time watch जरूर है!

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