Sex Work Is Profession: गंगूबाई फिल्म ने सेक्स वर्कर्स के प्रति बदला नजरिया?

Sex Work Is Profession: गंगूबाई फिल्म ने सेक्स वर्कर्स के प्रति बदला नजरिया? Sex Work Is Profession: गंगूबाई फिल्म ने सेक्स वर्कर्स के प्रति बदला नजरिया?

Swati Bundela

21 Sep 2022

शुरू से ही सेक्स वर्क्स को गंदी नज़र से देखा जाता है। समाज में उनकों इज्जत से नहीं देखा जाता।उनके काम को काम नहीं धंधा माना जाता है। समाज उन मर्दों कुछ नहीं कहता जो औरतों को चीज़ समझते है उन्हें लगता है वह पैसों से उन्हें ख़रीद लेंगे। आज हम ऐसी ही मूवी के बारे में बात करेंगे जो सेक्स वर्करस पर आधारित है।

हाल ही में रिलीज़ हुई बॉलीवुड मूवी गंगुबाई काठियावाड़ी आई जो कि सेक्स वर्क पर और एक सच्ची कहानी पर आधारित थी। नेटफ़्लेक्स  पे रिलीज़ हुई यह मूवी ने वर्ल्ड्वाइड अपनी पहचान बनाई। इसके अलावा बर्लिन फ़िल्म फ़ेस्टिवल में भी इसे प्रीम्यीर्ड किया गया।मूवी में यह दिखाया गया कैसे आज भी बहुत सी जगहों में सेक्स वर्कर को वैसी इज़्ज़त नहीं मिलती जैसी उन्हें मिलनी चाहे।

बॉलीवुड फ़िल्मों में सेक्स वर्क्स को मुख्य समाज से बाहर रखा जाता है लेकिन यह मूवी समाज में उन औरतों को बारे में बात करती है और उनके अधिकारों के बारे में बात करती है।

सप्रीम कोर्ट ने दी थी सेक्स वर्कर के काम को मान्यता

गंगुबाई मूवी में यह दिखाया गया है कि सेक्स वर्क को एक पेशा मानना चाहिए। फ़िल्म में आलिया भट्ट एक डायलॉग में कहती है दिमाग़ वाला दिमाग़ वेचता है, तो अगर हम शरीर बेचते है तो क्या ग़लत क्या है रहे साहेब? हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सेक्स वर्क को पेशे के रूप में मान्यता दी है जो एक अच्छा कदम है।

कैसे लड़कियों को इस काम में धकेला जाता है

फिल्म में कुछ ऐसे भी सीन दिखाए गए हैं जिसमें जिससे हमें पता चलता है कि कैसे लड़कियों को उनकी मर्जी के बिना इस काम में धकेला जाता है खुद गंगू को भी इस काम में उसकी मर्जी के बिना भी धकेला गया था और 1 दिन ऐसा आता है जब एक लडकी जिसको इस काम में डाला जा रहा था और वह यह काम नहीं करना चाहती थी और गंगू खुद उसे उसके घर छोड़ कर आती है।

कैसे समाज लड़कियों से मुंह मोड़ लेता है

फिल्म की लास्ट में ऐसा सीन है जब उनको अपनी माता को अपने घर पर फोन लगाती है तो उसे पता चलता है कि उसके पिताजी की मौत हो चुकी है। उसकी मां कहती है कि हम तेरे से बात नहीं करेंगे क्योंकि तू ऐसे गलत कामों में पढ़ी है और उसका फोन काट देती है।

बदनाम गली

गंगूबाई काठियावाड़ी की कहानी 1950 से 1960 के बीच की है जो के किताब माफिया क्वींस ऑफ़ मुंबई में से ली गई है। जहां पर सेक्स वर्कर्स रहते हैं उस जगह को बदनाम गली बुलाया जाता है यह दिखाता है कि  कैसे लोग सेक्स वर्कर्स के बारे में सोचते हैं।

सोच बदलने की जरुरत

आज भी बहुत सारे लोग ऐसा सोचते हैं कि सच में  ऐसी औरतें ने समाज को खराब कर दिया हमें उनके प्रति अपने नजरिए को बदलने की जरूरत है अगर वो यह काम करती हैं तो इसमें क्या गलत है?अपना मेहनत करके कमा रही हैं फिल्म में भी दिखाया गया सेक्स वर्कर्स का काम भी काम होता है।

अनुशंसित लेख