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अकेले भारत में ही एंडोमेट्रियोसिस से 25 मिलियन महिलाएं प्रभावित होती हैं

Published by
Ayushi Jain

एंडोमेट्रियोसिस एक ऐसी स्थिति है, जहाँ महिलाओं को अपने पीरियड्स के दौरान असहनीय दर्द सहना पड़ता है। इसके लक्षणों में उलटी आने जैसा महसूस होना, ज़्यादा ब्लीडिंग और असहनीय दर्द शामिल हैं। एंडोमेट्रियोसिस सोसाइटी ऑफ इंडिया के अनुसार अकेले भारत में 25 मिलियन महिलाएं इस स्थिति का सामना करती हैं और पूरे विश्व में 176 मिलियन महिलाओं को इससे गुज़ारना पड़ता है।

हाल ही में, इस स्थिति से निपटने के लिए और एंडोमेट्रियोसिस, फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गाइनोकोलॉजिकल सोसाइटीज़ ऑफ इंडिया (फोग्सी) के साथ बायर ज़ाइडस फार्मा ने  इस मैकेनिज़्म से निपटने के लिए महिलाओं के लिए एंडोमेट्रियोसिस के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए है – विज़न (वैल्युएबल इनसाइट्स इन इंडियन एंडोमेट्रियोसिस- रेडेफिनिंग आउटकम्स) हैदराबाद में नेशनल कांफ्रेंस में गयनेकोलोजी और स्त्री रोग में प्रौद्योगिकी पर इन्फेक्शन के बारे में ।

विज़न का मकसद एंडोमेट्रियोसिस में अलग – अलग मेडिकल ऑप्शंस के वर्तमान उपयोग पैटर्न को समझना और विभिन्न रोगी प्रोफाइल के आधार पर एंडोमेट्रियोसिस के प्रबंधन में डॉक्टरों का मार्गदर्शन करने के लिए एक एल्गोरिथ्म बनाना है।

एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारियों के बारे में लोगो को ज़्यादा पता न होने के कारण डॉक्टर्स उन्हें इसके बारे में अधिक जागरूक और इसके सही इलाज के बारे में बताना चाहते है ताकि महिलाओं को इस रोग से निपटने में सहायता मिल सके।एंडोमेट्रियोसिस जैसी बिमारी से निपटने के लिए बहुत सारे मरीज़ और डॉक्टर जो इसका इलाज करते है खुद को मुश्किल में पाते हैं ।विज़न एक ऐसी पहल है जो रोगियों को एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी से राहत दिलाएगी । मैं सभी स्त्रीरोग विशेषज्ञों से आग्रह करती हूं कि इन महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख करें और ध्यान रखें की इस बीमारी के इलाज के लिए वह मरीज़ों को सबसे अच्छा ट्रीटमेंट दे पाएं , ” फोग्स की अध्यक्ष नंदिता पलशेकर ने टीऍनआईई को बताया।

उन्होंने कहा, “एंडोमेट्रियोसिस का पता चलने से पहले लड़कियों और महिलाओं को 5-10 साल तक दर्द हो सकता है क्योंकि  पीरियड्स के दौरान दर्द होना आम बात है, ज्यादातर महिलाएं दर्द के असहनीय होने पर भी डॉक्टरों के पास नहीं जाती हैं। यह बीमारी महिलाओं की फर्टिलिटी को भी प्रभावित कर सकती है। ”

एंडोमेट्रियोसिस के लिए जागरूकता के लिए  इस साल की शुरुआत में अहमदाबाद, दिल्ली, चेन्नई, कोलकाता में रीजनल मीटिंग्स के बाद मुंबई में एक नेशनल मीटिंग के बाद एंडोमेट्रियोसिस पर अभ्यास के प्रोटोकॉल तैयार करने वाले 200 से अधिक थॉट लीडर्स की मदद से शुरू हुआ।

लड़कियों और महिलाओं को एंडोमेट्रियोसिस से पीड़ित होने का पता चलने से पहले वह 5-10 साल तक उसे सेहन करती हैं क्योंकि पीरियड्स के दौरान दर्द होना आम बात है, ज्यादातर महिलाएं दर्द के असहनीय होने पर भी डॉक्टरों के पास नहीं जाती हैं। यह बीमारी महिलाओं की फर्टिलिटी को भी प्रभावित करती है। ”

यह स्थिति सभी तरह की महिलाओं में पायी जाती है चाहे वो महिलाएं हो जो मेंस्ट्रुएशन के शुरूआती दौर से गुज़र रही हो या वो महिलाएं जो मीनोपॉज तक पहुँच चुकी हो । इस रोग में उम्र का इसके इलाज से कोई लेना देना नहीं होता है । एक्सपर्ट्स कहते है की, टीओआई की एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने किशोर लड़कियों को बहुत दर्द सेहन करते हुए देखा है और कई स्थितियों में वृद्ध महिलाओं को भी इस बीमारी के कारण होने वाले गंभीर दर्द से गुज़रते हुए देखा है ।

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