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इन पेशों के जरिये महिलाएं स्वयं को व्यक्त कर सकतीं हैं

Published by
Udisha Shrivastav

ज़्यदातर यह देखा जाता है कि चाहे महिलाएं हों या पुरुष, दोनों को ही अपनी पेशेवर ज़िंदगी में स्वयं को पूर्ण तरह से अभिव्यक्त करने के मौके कम मिलते हैं। हर दिन ऐसा लगता है मानो उसमे कोई नयी ऊर्जा है ही नहीं। वही एक जैसा काम ज्यादातर लोग रोज-रोज करके घर वापस चले जाते हैं। लेकिन अगर महिलाएं इस समान स्तिथि में खुद को नहीं रखना चाहतीं, तो ऐसे कुछ पेशे और व्यवसाय हैं जिनमे में स्वयं की रूचि और प्रतिभा को माप सकतीं हैं।

चित्रकारी और स्केचिंग

चित्रकारी को लोग एक पेशे की तरह नहीं बल्कि एक शौक की तरह देखते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है कि इस पेशे में लोग धन नहीं कमा पाते या उन्हें इस पेशे में शौहरत हासिल नहीं होती। चित्रकारी करना स्वयं को स्वतंत्रता से व्यक्त करने जैसा है। आपके द्वारा की गयी चित्रकारी आपके अनुभवों और आपके व्यक्तिगत दृष्टिकोण की एक छवि होती है। चित्रकारी के साथ-साथ स्केचिंग भी आपको यह स्वाधीनता प्रदान करती है।

वेडिंग प्लैनर

अगर आपकी रूचि सजावट, आदि में है और साथ-साथ आप एक अच्छी प्रबंधक भी हैं, तो आप एक वेडिंग प्लानर बनने के बारे में सोच सकतीं हैं। अगर आपको याद हो तो फिल्म “बैंड बाजा बारात” में भी अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने एक वेडिंग प्लैनर का किरदार निभाया था। इस पेशे में सिर्फ सजावट नहीं आती, वह तो सिर्फ एक हिस्सा है। आपको भीषण दबाब के अंदर काम करने का अनुभव अवश्य होना चाहिए।

कुकिंग

जो लोग खाना बनाना हर महिला का काम समझते हैं, अगर उन्हें हटा दिया जाये और गंभीरता से देखें तो कुकिंग भी एक कला है। कुछ महिलाओं को नयी-नयी चीज़ें बनाने का बेहद शौक होता है। फर्क इतना है कि वे अपने इन शौकों को घर में ही पूरा करने का प्रयास करतीं हैं। लेकिन महिलाएं अगर बाहर होने वाली प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू कर दें, तो वे अपनी प्रतिभा के आधार पर जानी-मानी शेफ बन सकतीं हैं। खाना बनाना, दूसरे के सामने उसे अपने अंदाज़ में पेश करना, आदि आपको एक स्वतंत्र एहसास देता है।

फैशन डिजाइनिंग

आज-कल के फैशन ट्रेंड्स के बारे में तो हम सभी जानते हैं। नयी-नयी चीज़ों को लोग प्रयास और प्रयत्न कर रहें हैं। तो अगर इस क्षेत्र में आपकी रूचि है तो आपको आपकी स्वतंत्रता से कोई अलग नहीं कर सकता। फैशन डिजाइनिंग में आपको कई मौके मिल सकतें हैं जहां आप अपने कौशल का स्वयं प्रतिनितिध्व कर सकतीं हैं।

कला और शिल्प

यहां कला और शिल्प का मतलब चित्रकारी से थोड़ा अलग है। इसके अंतर्गत मिटटी के बर्तन, खिलौने, आदि बनाने से लेकर सब कुछ आता है। आप लघुचित्र को भी इसमें डाल सकतें हैं। कला और शिल्प का क्षेत्र बहुत बड़ा है और इसकी कोई सीमा नहीं है। आप अपनी दृष्टि जितनी दूर ले जा सकतें हैं उतना ही आपका काम अन्य लोगों से विभाजित और अलग होगा।

लेखन

महिलाओं को सशक्त करने में लेखन का भी काफी बड़ा हाथ है। आज भी महिलाएं लेखन की ताकत को समझतीं हैं। वे किताबें लिखकर, कविताओं, आदि के जरिये खुद को आसानी से व्यक्त कर सकतीं हैं। भारत में अनगिनत महिलाएं हैं जिन्होंने लेखन के क्षेत्र में अपना करियर बनाया है। इतना ही नहीं, वे अपने लेखन द्वारा लोगों का मार्गदर्शन करने में भी सफल रहीं हैं।

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