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यह पांच बातें हर माँ को अपनी बेटी को जरूर सिखानी चाहिए

Published by
Udisha Shrivastav

याद कीजिये वो आपके बचपन के दिन जब आपको यह बताया जाता था कि जिस चीज़ के लिए आपके माता-पिता ने आपको मना किया है उस चीज़ को आपको दोबारा नहीं करना चाहिए। कुछ ऐसी ही ढेर सारी बातें आपको आज भी याद होंगी जिनके चलते आपके माता-पिता को क्रोध आ जाता था। हो सकता है कि आप बचपने में अपने माता-पिता की आज्ञा का पालन न करें, लेकिन सच यह कि कोई भी यह नहीं चाहेगा कि उसके माता-पिता उससे नाराज हों।

आज-कल का समय पिछली दशक के समय से बिलकुल विपरीत है। जिन चीज़ों को तब एक अलग दृष्टि से देखा जाता था वे आज फैशन और स्टाइल के रूप सबसे आगे हैं। इन सभी के बीच कुछ बातें ऐसी हैं जो हमारी माताओं ने हमे सिखाई हैं और हम आज भी उनका पालन करते हैं। लेकिन कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हे हर माँ को अपनी बेटी को अवश्य सिखाना चाहिए। आईये उनपर चर्चा करते हैं।

“न” कहना सिखाईये

माताओं को अपनी बेटियों को यह अहसास दिलाना जरुरी है कि उनका स्थान वास्तव में महत्वपूर्ण है। अगर उन्हें अपने निजी स्थान को घेरते हुए कुछ एहसान या कार्य मिलते हैं, तो कृपया ‘न’ कहने में वे संकोच न करें। स्वार्थी होना गलत नहीं है अगर यह आपको स्वयं के मन से संचालित करने में मदद करता है। किसी भी कार्य को करने से पहले ज़रूरी है कि आप एक कदम पीछे लें और चीज़ों का मूल्यांकन करने का बाद कोई फैसला लें। दूसरों की भावनाओं की चिंता करना अच्छी बात है लेकिन आपको अपने बारे में भी सोचना चाहिए। अगर आप कोई अच्छा काम करना चाहते हैं, तो इसकी शुरुआत आपसे ही होनी चाहिए। इसलिए हर बेटी अपने-आप से प्यार करें और कभी भी “न” कहने से ना डरे।

आत्मरक्षा का सन्देश दें

आज-कल लड़कियां हर क्षेत्र में अव्वल दर्जा हासिल कर रहीं है। वे सारी रूढ़िवादियों को तोड़ कर अपने रास्ते खुद बना रही हैं। इसलिए ज़रूरी है कि माताएं इस दौड़ में उनका समर्थन करें और बढ़-चढ़कर उनकी राह में उनका साथ दें। इसके साथ वे अपनी बेटी को खुद की रक्षा करना ज़रूर सिखाएं। अगर संभव हो तो अपनी बेटी को आत्मरक्षा की कक्षाओं में भी ज़रूर भेजें। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे कभी भी नयी चीज़ों को करने से नहीं घबराएंगी।

अपने हक़ के लिए खड़ी हों

अपने हक़ के लिए खड़े होना और अपने अधिकार माँगना जायज़ सी बात है। यह अधिकार भले ही हमे विरासत में नहीं मिले हैं लेकिन हमे संविधान ने यह हक़ दिया है।

लड़कियों के सन्दर्भ में यह बात थोड़ी अटपटी सी लगती है क्यूंकि समाज में हमेशा से लड़कियों को कुछ न कुछ देने की ही उम्मीद की जाती हैं। आखिर त्याग की मूरत तो लड़कियां ही हैं। ज़रूरी है कि हर माँ अपनी बेटी को इस बदलते समय की ज़रूरत को समझते हुए अपने लिए खड़े होना सिखाये। क्यूंकि जो व्यक्ति अपने स्वयं के हक़ के लिए नहीं खड़ा हो सकता, वह पूर्ण रूप से कभी किसी दूसरे व्यक्ति का समर्थन नहीं कर सकता।

अनुशासन का महत्व समझाएं

चाहे आप अपने जीवन में कुछ भी करना चाहती हों या कुछ भी बनना चाहती हों, अनुशासन काफी महत्वपूर्ण है। हर व्यक्ति के लिए संतुष्ट और खुश रहना बेहद आवश्यक है। लेकिन इस लक्ष्य को आप तब ही पा सकती हैं, जब आप अनुशासित तरीके से रहेंगी। हर माँ अपने स्वयं के अनुभवों के आधार पर अपनी बेटी को इस बात का महत्व अवश्य बता सकती हैं।

अपने शौक और जुनून को कभी न भूलें

लोग आज-कल अपने जीवन और रोज की दिनचर्या में इतना व्यस्त हैं कि स्वयं के लिए बिलकुल समय नहीं निकाल पाते। इसलिए हर माता को अपनी बेटी को समय-समय पर यह एहसास दिलाना बेहद ज़रूरी है कि उन्हें कभी भी अपनी निजी ज़िंदगी को आकस्मिक तरह से नहीं लेना चाहिए। उन्हें अपने शौक और जुनून को पहचानने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्हें इस तरह से स्वयं का विकास करने का अवसर मिलता है।

 

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