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Raising Sons: इन 5 तरीकों से सिखाएं अपने बेटों को कंसेंट

Published by
Ritika Aastha

कंसेंट का मतलब है किसी बात के लिए एग्री करना या फिर किसी चीज़ के लिए अपनी सहमति देना। किसी भी काम में सबसे ज़रूरी होता है कंसेंट। कंसेंट के बारे में आप अपनी लाइफ में जितना जल्दी सीखें आपके लिए उतना अच्छा है। इसलिए अपने बच्चों को भी कंसेंट के बारे में उनके अर्ली इयर्स में ही समझाना शुरू कर दें। विशेष कर अपनी बॉडी से जुड़े कंसेंट के बारे में उन्हें नौलेज होना बहुत ज़रूरी है ताकि वो अपने साथ किसी तरह का अन्याय न होने दें। अपने बेटों को कंसेंट सीखाना हर पैरेंट की ज़िम्मेदारी है ताकि आगे जा कर वो “रेस्पोंसिबल मेन” बनें। जानिए बेटों को कंसेंट सीखाने के ये 5 तरीकें:

1. रोज़मर्रा के कंसेंट को इंट्रोड्यूस करें

कंसेंट सिर्फ सेक्सुअल सीटुएशन्स के लिए ज़रूरी नहीं है बल्कि हर सिचुएशन के लिए इम्पोर्टेन्ट है। अपने बेटों को समझाएं की हर काम से पहले परमिशन लेना ज़रूरी है विशेष कर उस काम के लिए जो किसी और से जुड़ा हो। सबसे पहले अपने बेटों को लौ रिस चीज़ों में कंसेंट के बारे में समझाना शुरू करें।

2. खुद कंसेंट प्रैक्टिस करें

बच्चें वही करते हैं जो वो बड़ों से सीखते हैं। इसलिए आप खुद कंसेंट प्रैक्टिस करिये ताकि आपके बच्चे आपको देखकर इसका अनुसरण करें। जब आप अपने बच्चों के रूम में जाएं तो दरवाज़ा नॉक करना न भूलें, इससे आपके बच्चों की प्राइवेसी भी इनवेद नहीं होगी और वो समझेंगे की कंसेंट क्या है। सिर्फ यही नहीं आप अपने पार्टनर के साथ भी हर काम से पहले कंसेंट को यूज़ ज़रूर करें ताकि आपके बच्चे भी इससे सीखें।

3. पॉवर डायनामिक्स समझाएं

अगर पॉवर इम्बैलेंस हो तो कंसेंट काफी ट्रिकी भी हो सकता है। अपने बेटों को सिखाएं की पॉवर डायनामिक्स कंसेंट के लिए क्यों ज़रूरी है। कई बार ऐसा देखा गया है की 2 व्यक्तियों के बीच अगर कोई एक ज़्यादा पॉवर होल्ड करता है तो वो अगर किसी काम में सामने वाे की मजूरी नहीं है तो भी उस काम को करता है। ये गलत है। अपने बेटों को समझाएं की पॉवर डायनामिक्स से ज़्यादा ज़रूरी है कंसेंट।

4. “ना” का मतलब समझाएं

अपने बेटों को “ना” का मतलब सबसे पहले समझाएं। उन्हें ये ज़रूर बताये की किसी सिचुएशन में ना कहना उन्हीं कमज़ोर नहीं बनता है और इसलिए इससे घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। अपने बेटों को समझाएं की असली स्ट्रेंथ इस बात में है की जो आप फील करते हैं वही बोलते भी हैं। जब आपका बेटा खुद ना बोलना सीखेगा तो वो दूसरों के ना का भी रेस्पेक्ट करना सीख जाएगा।

5. “गट फीलिंग” के बारे में बात करें

अपने बच्चों को ज़रूर समझाएं की गट फीलिंग की लाइफ में कितनी अहमियत है। उनको समझाएं की अगर किसी सिचुएशन में उन्हें कुछ वीयर्ड या अजीब लगे तो इसे नज़रअंदाज़ ना करें उन्हें समझाएं की हमेशा अपनी इनर वॉइस को सुनें और उसी हिसाब से काम करें। उनको समझाएं की आपका ब्रेन आपको गलत लोगों से बचाने के लिए हमेशा तैयार रहता है। इस बात पर एम्फसाइज़ करें की अपनी “इंस्टिंक्ट” पर भरोसा करना ज़रूरी है।

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