कुछ इस तरह पापा का भरोसा हम बेटियों को डबल स्ट्रॉग बनाता है

Published by
Shilpa Kunwar

बाप-बेटी के रिश्ते की ये खासियत है कि हर घर में बेटियां अपने पापा की लाडली होती है। वैसे भी अक्सर देखा गया है कि बेटे मां के करीब होते हैं और बेटियां अपने पापा के। आज़ मैं आपसे बाप-बेटी के रिश्तों को मज़बूत बनाने वाली बातें ही बताने वाली हूं।

मैनें ये महसूस किया है कि पापा की परी और घर में सबसे प्यारी, बड़ा गहरा चाव और लगाव होता है बाप-बेटी का. तभी तो उम्र केहर पड़ाव पर पापा हमारे लिए खास रोल निभा रहे होते हैं। कभी बचपन में हर खेल में जीत दिलाने वाले सुपरमैन के रोल में होते हैं तो कभी बिटिया की विदाई के समय बच्चों की तरह फूट-फूटकर रोते हैं। पढ़ाई या नौकरी के लिए घर से दूर जा रही बेटी अपने लिए सबसे ज्यादा भरोसा और उम्मीद पिता की आंखों में ही देखती है। ऐसा ही होता है पापा का मन जो प्यार शो तो नही करता पर निभाता जरूर है। इसी निभाव के लिए पिता बेटियों की उम्र के मुताबिक ढलते और साथ चलते रहते हैं ताकि लाइफ के हर प्वाइंट पर वो अपनी बेटी का एक स्ट्रॉग सपोर्ट सिस्टम बने रहें। यही सब तो है बाप-बेटी के रिश्तों को मज़बूत बनाने वाली बातें।

बड़ा प्यारा है यह लगाव (baap-beti ke rishte ko majboot banane wali batein )

बेटियां आज आगे बढ़ रही हैं। सफलता भी पा रही हैं साथ ही कॉफिडेंट भी हो रही है। इन सब का एक बड़ा कारण उनके पिता का उन पर भरोसा करना और उनका साथ देना है। आज भी कितने ही घरों में पिता हाथ थाम कर कहते हैं कि मैं हूं ना मेरी बिटिया, तुम डरो नहीं। इसी से तो हम बेटियों को हौसला मिलता है। पापा और बेटियों के मन तो एक-दूजे की अनकही बात भी सुन लेते हैं। यही समझ भरोसे को बल देती है। इसी भरोसे की पोटली उठाए बेटियां आज हर जगह अपनी मौजूदगी टॉप पर दर्ज करा रही हैं। अब पापा अपने बेटियों का हाथ थाम कर चलने में विश्वास रखते हैं, उन्हें पीछे रखने में नहीं । पापा ही तो वह हिम्मत है जो जिंदगी के हर मोड़ पर उनका साख देगी और दुनिया से लड़ने की ताकत देगी।

सब समझते हैं पापा

कभी मां को कहकर मन की बात पापा तक पहुंचाई जाती थी। अब पापा सब समझते हैं। एक ऐसा भी समय था जब परिवार में बेटियों की मौजूदगी कोई मायने नही रखती थी लेकिन आज उनका होना ही नहीं, मन का करने और आगे बढ़ने के फैसलों का भी काफी सम्मान किया जाता है। अब हर पिता को अपनी लाडली की सफलता गर्व महसूस करवाती है.

स्नेहभरी सख्ती

पापा कभी मन का करने की छूट देते हैं तो कभी बंदिशों से भरी हिदायतें भी लेकिन रूखी सी हंसी और सख्ती ओढ़े व्यवहार के पीछे पिता के मन का गहरा प्यार और चिंता ही छिपी होती है। वो दुनिया भर की बातों और हालातों से अच्छे से जानते और समझते हैं। इसलिए संभलकर जीने और आगे बढ़ने की सीख उनकी हर बात में शामिल होती है।

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