छोटे बच्चों का हकलाना और तुतलाना घर में सभी को अच्छा लगता हैं। हालांकि, बच्चों के बोलना शुरू करने के बाद हकलाना आम है, लेकिन कुछ सालों बाद भी इसका जारी रहना चिंता का कारण हैं। अगर समय रहते इसे दूर न किया जाए, तो इससे बच्चों के मन में Inferiority complex घर कर सकती हैं। इसके कारण वो किसी के भी सामने बात करने और अपने मन की बात रखने से कतराने लगते हैं।हम इसके कारण जानने के साथ-साथ इसे दूर करने के कुछ उपाय और एक्सरसाइज भी बताएंगे।

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बच्चों में हकलाना क्या है?

यह एक प्रकार का स्पीच डिसऑर्डर है, जो बोलने के समय पैटर्न की गड़बड़ी के कारण होता हैं। बच्चों में ऐसा होना आम हैं। इस कारण बच्चे किसी शब्द को बोलने में अटकते हैं। वो उस शब्द को अच्छी तरह बोल नहीं पाते हैं। एक अन्य शोध के अनुसार, बच्चों में हकलाना एक न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है। इसके कारण स्पीच मोटर डेवलपमेंट और एक्सीक्यूशन नेटवर्क प्रभावित होता हैं।

बच्चों में हकलाने की समस्या कब शुरू होती है?

हकलाने की समस्या बचपन से ही शुरू हो सकती हैं। एक शोध के अनुसार, हकलाने की समस्या की शुरुआत आमतौर पर 2 साल से 4 साल की उम्र के बीच होती हैं। इसके अलावा, शोध से यह भी पता चला है कि प्री-स्कूल की उम्र के करीब 11 प्रतिशत बच्चों में हकलाने की समस्या हो सकती हैं।

हकलाने का प्रभाव

  • हकलाने के कारण बच्चे स्पष्ट रूप से बोलने में अटकते हैं।
  • हकलाने से उन्हें अपनी बात को लोगों के सामने पेश करने में परेशानी हो सकती हैं।
  • इसके अलावा, यह डिसऑर्डर उन्हें मेंटली एफेक्ट कर सकता हैं। हकलाने के कारण बच्चे किसी भी प्रकार की एक्टिविटीज में हिस्सा लेने से डरने लगते हैं।
  • किसी भी काम को करने में सेल्फ-कॉन्फिडेंस की कमी होने लगती हैं।
  • स्कूल में होने वाले किसी भी प्रकार के कार्यक्रम में उनका प्रेजेंटेशन खराब हो सकता हैं।

बच्चों में हकलाने के लक्षण

हकलाने के लक्षण हर बच्चे के अलग-अलग हो सकते हैं, जैसे

  • के, जी, टी से शुरू होने वाले किसी शब्द को बार-बार दोहराना।
  • स, श, ष से शुरू होने वाले शब्दों को लंबा बोलना।
  • शब्दों को बोलने के दौरान अक्सर झिझकना या फिर खुद को बात करने से रोकना।
  • धीरे-धीरे बोलना या फिर बहुत अधिक रुकावट के साथ बात करना।
  • बोलते समय तनाव और निराशा महसूस करना।
  • बात करते समय अटक-अटक के सांस लेना और होंठों का कांपना ।
  • बात करने में डर लगना।

बच्चों में हकलाने के कारण

बच्चों में हकलाना की समस्या 2 से 5 साल में नजर आने लगती है। इसके कई कारण हो सकते हैं,

  • डेवलपमेंटल: यह हकलाने का सबसे आम है, जाे छोटे बच्चों में पाया जाता है। यह समस्या समय के साथ-साथ बढ़ती जाती है। कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार यह तब होता है, जब बच्चे सही तरह से बाेलने में असमर्थ होते हैं।
  • आनुवंशिक: कुछ वैज्ञानिकों के अनुसार बच्चों में हकलाना परिवार के जीन के कारण भी हो सकता हैं।
  • चोट या स्ट्रोक के कारण: कभी-कभी हकलाने की समस्या दिमाग पर लगी चोट या फिर स्ट्रोक के कारण भी हो सकती हैं।
  • साइकोजेनिक: हकलाने का एक कारण साइकोजेनिक यानी भावनात्मक स्ट्रोक भी हो सकता है। ऐसा कुछ विशेष मामलों में ही होती हैं।

हकलाने का इलाज | बच्चों का हकलाना कैसे ठीक करें?

वैसे तो हकलाने का कोई इलाज नहीं है। फिर भी कुछ डॉक्टर का मानना है कि कुछ थैरेपी और व्ययायाम के द्वारा इसको दूर किया जा सकता है। यहां हम आपको बता रहे हैं बच्चों में हकलाने के इलाज के बारे में 

  • स्पीच थैरेपी: इसमें मरीज को धीरे-धीरे बोलने के अलावा यह नोटिस करने के लिए कहा जाता है कि वह किस शब्द पर अटकता है। इससे बच्चे को आराम-आराम से और क्लियर वाक्यों का उच्चारण करने में मदद मिल सकती है।
  • इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट के द्वारा: बाजार में कई प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट उपलब्ध हैं, जो हकलाने की समस्या को कम करने में मददगार हो सकते हैं। ये उपकरण बच्चों की आवाज की नकल करते हैं और ऐसा लगता है जैसे वो बच्चों से बात कर रहे हैं। बच्चे के लिए कौन-सा इक्विपमेंट सही है, इस बारे में स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट ठीक तरह से बता सकते हैं।
  • साइकेट्रिस्ट के द्वारा: कई प्रकार के साइकेट्रिस्ट बच्चों के बात करने के तरीके को पहचान कर उसे बदलने में मदद करते हैं। इसके जरिए बच्चों में हकलाने से होने वाले तनाव को दूर करके उनमें कॉन्फिडेंस पैदा किया जा सकता है।
  • घर में अभ्यास: स्पीच लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट जो भी टिप्स या तकनीक बताए, माता-पिता घर में बच्चे से उसकी प्रैक्टिस जरूर करवाएं। इससे बच्चे को फायदा हो सकता है और उसकी समस्या धीरे-धीरे कम हो सकती है।
  • मेडिसिन: कुछ दवाइयों से हकलाने की समस्या का उपचार करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी भी दवा का प्रभावी असर नहीं नजर आया। इस आधार पर कहा जा सकता है कि इस समस्या को ठीक करने के लिए अभी कोई दवा मौजूद नहीं है।

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