बच्चों में हकलाने की समस्या को व्यायाम के जरिए भी कम किया जा सकता है। व्यायाम बोलने में सहायता करने वाल फेफड़ों, जीभ, श्वासनली, होंठ और जबड़े को शक्ति प्रदान करने का काम करते हैं। ये व्यायाम या तो हकलाने की समस्या को कम कर सकते हैं या फिर उसकी तीव्रता को कम कर सकते हैं। यहां हम कुछ ऐसे ही व्यायाम बता रहे हैं, जो बच्चे में हकलाने को कम करने में मदद कर सकते हैं।

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  • जोर से किसी स्वर का उच्चारण : बच्चे को ए, ई, आई, ओ और यू से शुरू होने वाले शब्द का उच्चारण साफ-साफ करने के लिए (Inspire ) करना चाहिए।
  • रुकने की तकनीक सिखाना : जो बच्चे हकलाते हैं, उन्हें यह भी सिखाया जाना चाहिए कि बोलते समय कब और कैसे रुकना है।
  • जॉ टेक्नीक : जितना संभव हो सके बच्चे को जॉ यानी जबड़ा खोलने के लिए कहें। बेहतर तरीके से करने के लिए बच्चे से कहें कि वह जीभ को तालु की ओर ले जाकर उसे छूने की कोशिश करे। बिना किसी दर्द के जीभ को जितना हो सके तालू की ओर खींचे और कुछ सेकंड तक उस स्थिति में रहने के लिए कहें। इसके बाद जीभ को मुंह से बाहर निकाल कर नीचे ठोड़ी (chin ) तक ले जाने की कोशिश करनी चाहिए। यह व्यायाम हर रात करने से अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।
  • स्ट्रॉ टेक्नीक : स्ट्रॉ के माध्यम से पानी पीना ओरल एक्सरसाइजेज में से एक है। यह हकलाने से निपटने में मदद कर सकता है। ऐसा इसलिए है, क्योंकि स्ट्रॉ के जरिए पानी पीने से जीभ का अभ्यास होता रहता है और धीरे-धीरे हकलाना कम हो सकता है।
  • सांस लेने और रोकने की क्रिया : बच्चे के द्वारा सांस लेने और कुछ सेकंड तक रोकने पर भी हकलाने को दूर कर सकते हैं। इस प्रकार की क्रिया से जीभ की मांसपेशियों के तनाव को दूर किया जा सकता है, जो हकलाने की समस्या में आराम दे सकता है।

माता-पिता हकलाने वाले बच्चों की मदद कैसे कर सकते हैं?

हकालाना रोकने के उपचार में अक्सर माता-पिता द्वारा बच्चों को प्रोत्साहित (Encouraged ) किया जा सकता  हैं।

  • बच्चों को स्ट्रेस फ्री एनवायरनमेंटमै रखे ।
  • बच्चे के साथ बात करने के लिए अलग से समय रखे ।
  • बच्चों के साथ मजेदार और इंटरेस्टिंग विषयों पर बात करने की कोशिश करें।
  • गलती होने पर बच्चे के प्रति नेगेटिव फीडबैक देने की जगह उसके सही उच्चारण करने पर बच्चे की तारीफ करें।
  • बच्चे को बोलते समय टोके नहीं।
  • बच्चे से आराम से बात करने पर उसे धीरे-धीरे और स्पष्ट बोलने में मदद मिल सकती हैं।
  • जब बच्चा बात करता है, तो उसकी बातचीत पर ध्यान देना चाहिए।
  • बच्चे के इंट्रेस्ट लेने पर उसके साथ हकलाने के बारे में खुलकर बात करें।
  • बच्चे के टीचर से उसकी प्रॉब्लम के बारे में बात करें | और उन्हें एक अच्छा वातावरण देने के लिए कहें।

डॉक्टर के पास कब जाएं

अगर बच्चा 5 साल का होने के बाद भी हकलाता हैं। तो डॉक्टर या स्पीच लेंग्वेज पेथॉलॉजिस्ट से बात करना चाहिए। इसके इलावा यदि बच्चों में हलके लक्षण दिखाई देते हैं तो उन्हें डॉक्टर के पास ले जाएं 

  • यदि बच्चा बोलते समय हकलाने के डर से किसी भी शब्द को बोलने से डरता हो।
  • हकलाने के साथ साथ चेहरे या शरीर की अजीब सी हरकतें दिखाइ दें।
  • किसी भी शब्द और वाक्य को लगातार दोहराता हो।
  • बात करने पर उसके चेहरे पर टेंशन की सिचुएशन दिखाई देती हो।
  • अगर आपको बच्चे के बोलचाल का तरीका असामान्य (abnormal ) लगे, तो उसे डॉक्टर के पास ले जा सकते हैं।
  • अगर बच्चे को वोकल टेंशन यानी बोलते समय होने वाले स्ट्रेस की समस्या है, जिस कारण उसकी आवाज तेज हो जाती है, तो आप उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले सकते हैं।

हकलाना गंभीर समस्या नहीं है और इसे समय रहते दूर किया जा सकता हैं। बस जरूरत है तो सिर्फ सही गाइडेंस की।

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