ईको फ्रेंडली होने के लिए बायोडिग्रेडेबल प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना बहुत ज़रूरी है। लेकिन सब ऐसी पॉज़िटिव सोच नहीं रखते। समाज में आज भी “ईको-रिया” जैसी महिलाएं हैं जो इको-फ्रेंडली क्लॉथ पैड्स बनाती है। हमारी आउटरीच एडिटर डॉ कावेरी पुरन्धर ने रिया से बातचीत की और जाना की इनको “ईको रिया” नाम कैसे दिया गया।

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प्र१: रिया, आपको इस कॉन्सेप्ट का विचार कैसे आया और इसको आपने आगे कैसे बढ़ाया?

ईको रीयूजीबल क्लॉथ पैड कांसेप्ट का आईडिया मुझे तब आया जब हम नॉर्मअल पीरियड्स में दिन में ३-४ बार सेनेटरी पैड्स बदलते है जो की वन-टाइम यूज़ के बाद डस्टबिन में चला जाता है। यह देख कर बड़ा दुःख होता था और गिलटी भी , जगह-जगह यूज़्ड सेनेटरी पैड्स बिखरे होते हैं। लेकिन उसका कोई अल्टरनेटिव नहीं था । फिर मेने सोचा क्यों ना ऐसा कोई पैड्स बनाया जो की डिस्पोजेबल की तरह हो इजी तो उसे, लेकिन उस को हम रियोज़ कर सके। पहले खुद यूज़ किये और बाकी सहेलियों को भी दिए। डिज़ाइन में चेंज लाये, ज़्यादा अब्सॉर्बेंट बनाया, इसे तरह यह रीयूजीबल क्लॉथ पैड्स बनाने का विचार मेरे मन में आया। जब मैंने यूज़ किया तो सोचा क्यों ना मैं सभी के लिए भी बनाऊँ? रीयूजीबल क्लॉथ पैडस और आज इसकी काफी डिमांड है और अवेयरनेस बढ़ी है, महिलाओं ने इसको पसंद किया है।

प्र २ आपको इन सबके दौरान किन मुश्किलों का सामना करना पड़ा ?

सबसे बड़ा चैलेंज आया इसके अलग-अलग साइज़, शैपस और मार्केटिंग में आया, जो की रेडीमेड सेनेटरी नैपकिन्स में यह पहले से ही सब उपलब्ध हैं। दूसरी तरफ एक कपडे से बना हुआ पैड यूज़ के बाद धोना पड़ता है, यह बात बहुत लोगों को पसंद नहीं आता। लेकिन डिस्पोजेबल पैड्स को यूज़ करना से कितनी बीमारियां होती हैं , इनफर्टिलिटी तक होती है, उनमे जो केमिकल्स यूज़ होते हैं वो बहुत टॉक्सिक होते हैं। फिर रीयूज़ेबल क्लॉथ पैड्स को एक्सेप्टेन्स मिला।

आज भी यह क्लॉथ पैड्स किसी दूकान या मॉल में अवेलेबल नहीं हैं, सरकार की तरफ से कोई सपोर्ट नहीं मिला है। कोई एडवरटाइजिंग या मार्केटिंग नहीं हुआ है। जबकि यह “स्वच्छ भारत अभियान ” में बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

प्र ३ पीरियड्स डेटा एनालिसिस के दौरान सबसे ज़्यादा चौंका देने वाली बात कौन सी थी?

एनालिसिस में जो मैंने देखा की ९९% मेंस्ट्रुटिंग महिलाओं को डिस्पोजेबल पैड्स से हेल्थ को हानि पंहुच सकती है। यह जानकारी डिटेल में कोई नहीं देता और महिलाएं इस बात से अनजान है। और बहुत महिलाएं को अभी रीयूजीबल क्लॉथ पैड्स की भी जानकारी नहीं है जो की एक हेअल्थी और एनवायरनमेंट फ्रेंडली अल्टरनेटिव है। १ रीयूजीबल क्लॉथ पैड कम से कम १ साल तक चल जाता है और १ महिला को ७-८ क्लॉथ पैड्स १ मासिक चक्र के लिए रखना काफी होंगे और यह क्लॉथ पैड्स भी अलग- अलग शेप्स सीएइज़ेस में उपलब्ध हैं, जैसे कि डे-पैड्स और नाईट-पैड्स।

प्र ४: ईको रीयूजीबल क्लॉथ पैड्स को गांव की महिलाओं तक पंहुचाने के लिए क्या कदम उठा रहीं हैं ? क्योंकि ग्रामीण महिलाएं अभी भी उतनी डिजिटल नहीं हुई हैं।

इसको ग्रामीण महिलाओं तक पंहुचाने के लिए एन जी ओ’ स को आगे आना पड़ेगा जो महिलाओं के स्वास्थय और सैनिटेशन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। यह महिलाएं अपने आप घर में ही यह पैड्स बना कर यूज़ कर सकती हैं, बस कुछ कॉटन की इस्तेमाल किये हुए कपड़े की सहायता से यह पैड्स आसानी से बनाये जा सकते हैं। एन जी ओ’ स को “डू इट योरसेल्फ” क्लाससेस आयोजित कर सकतें हैं। इससे ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन सकते हैं।

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