कोरोना में बच्चों की एंग्जायटी  – कोरोना को लेकर बच्चों के मन में काफी डर बैठ गया है। छोटे बच्चों को सबसे पहले तो ये समझ में नहीं आता है कि हो क्या रहा है और चल क्या रहा है। छोटे-छोटे बच्चे घरों में बंद हो गए हैं। बच्चे जयादा लोगों से मिल नहीं रहें है उनकी सोशल लाइफ और ग्रोथ पर नेगेटिव प्रभाव पड़ने लगा है। छोटे बच्चों की उम्र जिज्ञासा से भरी होती है और इस जिज्ञासा के कारण वो नईं चीज़ें सीखतें हैं। बच्चे इस उम्र में चीज़ों को बहुत स्पीड से सीखते है इसलिए उन्हें नर्सरी क्लास मे डाला जाता है जिससे उनकी सोशल ग्रोथ होती है।

1. बच्चे क्या सोचते हैं पान्डेमिक को लेकर ?

छोटे बच्चों के लिये ज़ूम मीटिंग्स एंड वीडियो कॉल काफी अलग और नया अनुभव रहता है। बच्चे मिस करतें हैं स्कूल मे अपनी उम्र के बच्चों में रहना, दादा दादी और टीचर्स से मिलना क्योंकि उनको नहीं समझ की अचानक से सब कहा चले गए हैं ।

2. पेरेंट्स बच्चों पर ध्यान कैसे दें ?

इस समय मे पेरेंट्स ध्यान रखें की कोरोना वायरस खतम होते ही आपके बच्चों को वो सारी चीज़ें मिलें जो वो घर रह कर नहीं करपाए हैं। सरकार को भी ऐसी कुछ स्पेशल प्रोग्राम्स लाने चाहिए जिनसे बच्चों की फिजिकल एंड मेन्टल ग्रोथ में हेल्प हो।

3. बच्चों से बात करना क्यों है जरुरी ?

इस समय सबसे जरुरी है कि आपको पता हो कि बच्चे के मन में चल क्या रहा है ताकि आप उसके हिसाब से रियेक्ट कर सको। इसलिए बात करे और बच्चे को अकेला न छोड़ें। इस से उनको पॉजिटिव महसूस होगा।

4. कोरोना के समय में बच्चे की क्रिएटिविटी पर ध्यान देना क्यों है जरुरी ?

कोरोना के समय में न बच्चे बाहर जा पा रहे हैं न पढ़ रहे हैं और न ही ट्यूशन वगेरा जा रहे हैं। बच्चे बस घर पे बोर हो रहे हैं इसलिए कुछ क्रिएटिव चीज़ों पर ध्यान दें और उन्हें इन्वॉल्व करें जैसे कि खेलना, आर्ट, डांस , म्यूजिक एंड शायरी।

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