छयारानी साहू अपनी सात एकड़ ज़मीन में उगने वाली सब्जियों को उन लोगों में डिस्ट्रीब्यूट कर दिया जो इस लॉकडाउन की वजह से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं। अब तक, उन्हने कम से कम 15 गांवों में 50 क्विंटल सब्जियां डिस्ट्रीब्यूट कर दी हैं। छयारानी बचे हुए लॉकडाउन पीरियड में भी इसी तरह डिस्ट्रीब्यूशन में लगी रहेंगी।

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भद्रक, ओडिशा की 57 वर्षीय महिला किसान ने ओटीवी से कहा ” मैं एक किसान हूं, मेरे पास इतना पैसा नहीं है और इसलिए ही मैं जो कुछ भी कर सकता हूं, मैं लोगों की मदद करने के लिए करुँगी।”

छयारानी साहू सब्जी दान करती हैं

छयारानी साहू ने लोगों को प्रधान मंत्री और मुख्यमंत्री रिलीफ फण्ड में डोनेट करते देखा। वह ऐसे टाइम पे लोगों के लिए कुछ करना चाहती थी। इसलिए, उन्होंने अपने खेत उगने वाली सब्जियों को डोनेट करने का फैसला किया।

“ऐसा करना मुझे बहुत खुशी देता है क्योंकि लोग मेरे इस काम की तारीफ करते हैं करते हैं और मेरे बच्चों को दुआएं देते हैं, ” उन्होंने न्यूइंडियन एक्सप्रेस को बताया।

दूध डोनेट करना

छयारानी सब्जियों का दान करने के अलावा, छयारानी ने लोकल डेरी सोसाइटी बंद होने की वजह से गांव के लोगों और लॉकडाउन के टाइम ड्यूटी देती पुलिस को दूध देना भी शुरु करदिया ।

वह कैसे काम करती हैं?

छयारानी वॉलन्टियर्स के एक ग्रुप के साथ काम करती हैं। वह एक वैन में सब्जियों के पैकेट के साथ घूमती है, जिसे गांव वालों के दरवाजे पर दिया जाता है। पैकेट में बैगन, भिंडी, टमाटर, हरी मिर्च, प्याज, ककड़ी और कद्दू का एक टुकड़ा होता है।

छयारानी साहू के बारे में

चार बच्चों की मां छयारानी पिछले 20 सालों से अपने सात एकड़ के खेत में सब्जियां उगा रही हैं। वह डेयरी फार्मिंग भी करती हैं और 20 गायों का संभालती हैं। उनके पति सरबेश्वर साहू खेती में उनकी मदद करते हैं और एक मिल्क सोसाइटी चलाते हैं।

हर साल, उनका परिवार सब्जी की खेती से 3 लाख रुपये से ज़्यादा कमाता है। इस बार, वो सिर्फ 50 ,000 तक का सामान बेच पायी क्यूंकि लॉकडाउन के बाद लोकल मार्किट में सब्ज़ियों की मांग कम हो गयी थी.  “ट्रेडर्स हमसे ये सब बहुत कम रेट पे खरीदना चाहते थे इसलिए हमने सब्जियों को मुफ्त में गरीबों में बांटने का फैसला किया,” उन्होंने कहा।

लोग उनके इस काम की बहुत तारीफ कर रहे हैं

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