जब से कोविड की वैक्सीन विश्व भर में मिलने शुरू हुई है सबसे बड़ा सवाल लोगों के मैं में यहीं रहा है की क्या ये ट्रांसमिशन का खतरा घटाती है की नहीं। शुरुवाती दिनों में वैज्ञानिकों ने इस विषय पर कुछ ज़्यादा टिपण्णी नहीं की। पर अब धीरे धीरे इसके फायदें और नुकसान सामने आ रहे हैं।

कोविड की वैक्सीन पहला मकसद है इन्फेक्शन रोकना

वैक्सीन का पहला मकसद है लोगों को कोविड के इन्फेक्शन से बचाना और बीमारी से दूर करना है। जिसमें ये काफी हद तक सफल भी हुआ है। कोविड के लक्षणों पर वैक्सीन की प्रभावकारिता क्लीनिकल ट्रायल्स के हिसाब से 50 प्रतिशत (Sinovac) से लेकर 95 प्रतिशत (Pfizer/BioNTech) तक रेंज कर रही है। ऐसी ही अच्छी प्रतिक्रिया विश्व भर के वैक्सीन निर्माण कंपनियों से मिली है।

कोविड की वैक्सीन घटाती है ट्रांसमिशन

ये पाया गया है की पीफिज़ेर और एस्ट्रोजेनेका वैक्सीन से ट्रांसमिशन का खतरा कम से कम 60 प्रतिशत तक घटता है। इजराइल में भी एक स्टडी में पाया गया की जिन लोगों ने वैक्सीन लगवाई है उनसे कोविड का ट्रांसमिशन उन लोगों के मुकाबले कम है जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली थी।

कोविड से ट्रांसमिशन की ये बात ज़रूरी क्यों

अगर हर इंसान अपने आप को वैक्सीन लगवा लेता है तो इससे न सिर्फ वो अपने आप को बचा रहा है बल्कि महामारी की इस चेन को भी रोक रहे है। अगर हम कम्युनिटीज में ट्रांसमिशन के खतरे को कम कर ले तो इससे हम अपने आस पास के वृद्ध और बच्चों का और बेहतर ख्याल रख पाएंगे।

कोविड की वैक्सीन की लिमिटेशन

भारत की तरह आज दुनिया में बहुत जगह कोविड के नए स्ट्रेन देखने को मिल रहे हैं। इससे वैक्सीन हमें तभी ही बचा सकता है जब हम अपनी इम्युनिटी को भी साथ ही साथ स्ट्रांग रखें। अपने आपको स्वस्थ रखने के लिए जितनी ज़रूरी वैक्सीन है उतनी ही ज़रूरी है हमारी इम्युनिटी।

कोविड प्रोटोकॉल्स का पालन करें

जिस तरह कोविड के नए स्त्रैंस सामने आ रहे हैं ये बहुत ज़रूरी है की हम अपने आपको वैक्सीन लगवायें और साथ ही साथ सरकार द्वारा जारी कोविड प्रोटोकॉल्स का सही से पालन करें। वैक्सीन लगवाने के बाद भी भले ही हमें कोविद प्रोटोकॉल्स का सही से पालन करना होगा तभी हम जल्द से जल्द इस महामारी को ख़त्म कर पाएंगे।

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