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अक्सर लोग अपने समुदाय और आस पास के इलाकों में ही रिश्ता जोड़ना पसन्द करते हैं जबकि किसी भी मज़बूत समाज के लिए जरूरी है कि उसके बीच सांस्कृतिक (cultural) मेलजोल हो; क्योंकि इससे इंसानों के बीच का गैप खत्म होता है और संबंध मजबूत होते हैं। सांस्कृतिक विविधता(diversity) वाले भारत देश में मल्टीकल्चरल शादियाँ कल्चरल एक्सचेंज का ब्रिज बनती हैं। इससे ‘अनेकता में एकता’ का मूल्य ग्राउंड लेवल पर सफल हो पाता है। इस लेख में हम आपको बताएँगे कि क्रॉस कल्चरल शादियों के क्या फ़ायदे होते हैं। Cross cultural marriage ke fayde। 

जानिए क्रॉस कल्चरल मैरिज के फ़ायदे –

1. नई परंपराओं से सामना होगा

भारत एक ऐसा देश है जहाँ विभिन्न संस्कृतियों के लोग मौजूद हैं। भारत दुर्गा पूजा भी करता है और लोहरी भी मनाता है। ऐसे में क्रॉस कल्चरल शादियाँ इन अलग-अलग परंपराओं को अपनाने में लोगों की मदद करती हैं। इससे अपने कल्चर का किसी भी प्रकार से नुकसान नहीं होता बल्कि दो अलग कल्चर्स की रीच ही बढ़ती है। हमें दूसरे ट्रैडिशन्स के बार में जानने का अवसर मिलता है।

2. नई भाषाएँ सीखने का मौका मिलता है

एक क्रॉस-कल्चरल मैरिज लोगों में नई भाषाओं को सीखने-सिखाने की क्षमता पैदा करता है। कपल्स का नई भाषाओं को सीखना और सिखाना, उन दोनों के बीच निकटता की भावना पैदा करता है और इससे भाषाई ज्ञान तो बढ़ता ही है। भाषाओं के माध्यम से मल्टीकल्चर शादियाँ संस्कृति के आदान-प्रदान को आसान बनाती हैं।

3. अलग जगहों पर घूमने का अवसर

जब आप मध्य प्रदेश से हों और आपका जीवनसाथी केरल से, तो आप दोनों के लिए अलग-अलग राज्यों में एक-दूसरे के घर-गाँव की यात्रा करना संभव हो सकेगा। इस प्रकार दूसरे राज्य में घूमने और उसके रहन-सहन को देखने और एक्सप्लोर करने का अवसर मिलेगा। ये आप आस-पास के इलाकों में शादी होने पर नहीं कर सकते क्योंकि कहीं दूर ट्रिप पर आप कभी-कभार ही जा सकते हैं, लेकिन पार्टनर के घर अक्सर आना जाना लगा रहेगा।

4. अलग-अलग त्योहार मना सकेंगे

जब शादी विभिन्न कल्चरल बैकग्राउंड के बीच होती है तो ना केवल उनका और उनके परिवारों का, बल्कि उनके त्योहारों का भी मेल होता है। हम नये-नये त्योहारों और उनसे जुड़े रीत-रिवाज़ों को सीख पाते हैं। त्योहार तो हमेशा ही खुशी का और गिले शिकवे मिटाने का कारण होते हैं इसलिए जितने ज़्यादा त्योहार उतना ज़्यादा सेलीब्रेशन।

5. समाज की बंदिशें टूटेंगी

लिबरल सोसाइटीस से आने वालों के लिए क्रॉस-कल्चरल विवाह बहुत बड़ी बात नहीं है लेकिन जब एक रूढ़िवादी परिवार या समाज में कोई व्यक्ति अपनी जाति या समुदाय से बाहर किसी व्यक्ति से शादी करने का फैसला करता है, तो वह पूरे समाज के सामने उदाहरण सेट करता है। इससे लोगों को ये मैसेज जाता है कि सीमाएं केवल हमारे दिमाग में ही मौजूद हैं, दिलों में नहीं और इन सीमाओं में बंध कर रहने का कोई तर्क नहीं बनता। इससे दूसरों को भी समाज की बंदिशें तोड़ने का हौसला मिलता है।

6. बच्चों के लिए बेहतर कल्चरल एक्सपीरिएंस

सामान्य तौर पर बच्चों की परवरिश एक संस्कृति के तले होती है, और परिणाम ये होता है कि दूसरे कल्चर के प्रति उतना लिबरल नजरिया नहीं बन पाता, जितनी मल्टीकल्चरल देश की जरूरत है। क्रॉस कल्चरल विवाह वाले बच्चे निश्चित ही दूसरों की तुलना में ज़्यादा कल्चरल हेरिटेज रखते हैं। ऐसे बच्चे बचपन से ही अलग-अलग संस्कृतियों को सीखते हैं। वे किसी पूर्वाग्रह(prejudice) और कल्चरल स्टीरियोटाइप के शिकार होने का खतरा कम रखते हैं।

7. Tolerance बढ़ती है

जिस तरह से हमारी परवरिश की जाती है, उससे हमारे मन में एथनो सेंट्रिस्म(ethno centrism) यानी कि अपने कल्चर को दूसरों के कल्चर से ज़्यादा महत्व देने की भावना जाग उठती है। ऐसे में क्रॉस कल्चरल शादियाँ दूसरे कल्चर्स की इज़्ज़त करना सिखाती हैं। इससे हम टॉलरेंस और एक्सेपटेंस के गुणों को सीख पाते हैं।

ये थे Cross cultural marriage ke fayde। 

 

 

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