दीया मिर्ज़ा प्रेगनेंसी : फरवरी में शादी के कुछ हफ्तों बाद ही प्रेग्नेंट होने के कारण सोशल मीडिया पे दिया मिर्ज़ा को ट्रोल किया जा रहा है। महिलाओं को प्रेग्नेंट होने के समय ,तारीख, वर्ष और ज़िन्दगी में कोई भी फैसले के लिए ट्रोलिंग की जाती है। ये ट्रोलिंग हमारे समाज में और सोशल मीडिया पे आज कल इतनी ज़्यादा बढ़ गयी है कि अब लगता है की लोग हर चीज़ में ओवर ही कर देते हैं।

दीया मिर्ज़ा से पहले भी कई बॉलीवुड अभिनेत्रियों को किया गया है ट्रोल :

दीया मिर्ज़ा प्रेगनेंसी को लेकर सोशल मीडिया को ट्रिगर करने वाली पहली महिला नहीं है ।, 1990 के दशक में श्रीदेवी के साथ भी ऐसा ही हुआ था, जब उन्होंने शादी के कुछ हफ्तों बाद अपनी पहली बच्ची जान्हवी कपूर को जन्म दिया। अभी हाल ही में, हमने 2018 में नेहा धूपिया के साथ भी ऐसा होता देखा।

दीया मिर्जा प्रेग्नेंसी ट्रोल: हम प्राइवेसी पर आसानी से invasion क्यों करते हैं?

क्या लोग महिला के शरीर को लेकर ज़्यादा ही अपने व्यूज नहीं देते ? मतलब जब कोई महिला माँ बनने वाली हो उसी को घृणा कि नज़र से देखना और उसकी प्रेगनेंसी पे सवाल करना या उसके करैक्टर पे ऊँगली उठाना ? किसी का भी क्या हक़ बनता है कि वो एक कपल के प्रेगनेंसी और शादी के बीच के डिफरेंस को नाप के उनकी प्रेगनेंसी पे सवाल उठाये ? फैन होने का मतलब ये नहीं कि आप उनकी प्राइवेसी या प्राइवेट ज़िन्दगी में दखलअंदाज़ी करने का हक़ रखेंगे।

होने वाले माता पिता के लिए सोशल मीडिया पे बधाइयों कि बौछार के अलावा, सबसे जनरल रिएक्शन सोशल मीडिया प्लेटफार्म पे नेगेटिविटी का ही होता है। जब भी कोई महिला सोसाइटी के बनाये गए रूल्स/ पितृसत्ता के बनाये गए रूल्स को तोड़ती है तभी सोशल मीडिया पे नेगेटिविटी एक प्लेग कि तरह फ़ैल जाती है।

लोग तो शायद ये चाहते हैं कि अगर किसी को प्रेग्नेंट होना है तो वो सोशल मीडिया पे सबकी राय ले – क्या मै अब प्रेग्नेंट हो सकती हूँ ? अगर आपकी परमिशन हो तो क्या हम बच्चे कर सकते हैं ? घूम फिरके बात वहीँ , महिलाओं कि बॉडी पे कंट्रोल करने पे आजाती है । आखिर हमे खुद कि बॉडी और खुद कि ज़िन्दगी के निर्णय लेने का हक़ क्यों नहीं दे सकते लोग ? उनको हर समय दुसरो को बुरा – भला कहने में क्या मज़ा आता है ?

दिया मिर्ज़ा कि प्रेगनेंसी पे सोशल मीडिया का ऐसा रहा रिएक्शन :

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