क्या आप भी अपनी उसी बोरिंग जॉब से परेशान हो जातीं है? क्या आप भी अपनी ज़िन्दगी में एक चेंज चाहतीं हैं? क्या आपको भी बच्चों के साथ वक़्त बिताना, उन्हें पढ़ाना, उनके भविष्य के लिए कंट्रीब्यूट करने में ख़ुशी मिलती है? अगर इन सभी प्रश्नों के उतर हाँ में हैं, तो आपके लिए हमारे पास है एक खुशखबरी! जी हाँ, एक नया करियर है जिसमे आपको वह फ्लेक्सिबिलिटी व वह क्रिएटिविटी मिलेगी जो आप हमेशा से चाहतीं थीं, और वह है – टूटरप्रेन्योर?

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कौन होता है टयूटरप्रेन्योर?

टयूटरप्रेन्योर? शब्द उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो टयूटर बन कर अपना एंटरप्रेन्योर बनने का सपना पूरा करते हैं। आप घर पर भी टयूशन पढ़ा सकते हैं, नहीं तो ऐसी कई वेबसाइट भी हैं जो ऐसे ढेरों मौके देती हैं।

क्या हैं टयूटरप्रेन्योर बनने के लाभ?

शीद्पीपल.टीवी ने कुछ टयूटरप्रेन्योर से बात की ताकि हमे इस करियर के बारे में और जान सके:
1. दो बच्चों की माँ, 50 वर्षीय अनुपमा कथूरिया कहती हैं कि टयूटरप्रेन्योर बनने से उन्हें पूरी तरह से फ्लेक्सीबिलटी मिली है। मैं क्लास के टाइमिंग्स व फीस अपने हिसाब से रखती हूँ, और इसी के चलते मैं बच्चों के करिकुलम से भी परिचित रहती हूँ। इसमें रिटायर होने जैसा भी कुछ नहीं है।

2. दिल्ली की टीना मखीजा,जो तीसरी से पांचवीं कक्षा को अंग्रेजी पढ़ाती हैं, कहतीं हैं की एक ट्यूटरप्रेन्योर होने की ख़ुशी काफी बढ़ जाती है जब आपको वह विषय मिल जाए जो आपका पसंदीदा था लेकिन आप और कमिटमेंट्स के चलते उसमे करियर नहीं बना सके। और बच्चे के विकास में माँ-बाप की मदद करना भला किसे नहीं पसंद होगा? वह अपने विद्यार्थियों को ग्रामर पढ़ाने के लिए प्ले कार्ड्स का इस्तेमाल करती हैं। जहाँ काफी स्कूल टीचरों को उनके तरीके से नहीं पढ़ाने देते, टयूटरप्रेन्योर के चलते आप अपने तरीके से पढ़ा सकते हैं।

3. भारत में विदेशियों के लिए हिंदिलेसन्स की फाउंडर, पल्लवी सिंह, अपनी टीचिंग के लिए टेक्नोलॉजी को एक वैल्यू एडिशन के रूप में इस्तेमाल करतीं हैं। “मैंने ऑनलाइन फ्लैशकार्ड डेटाबेस, मैच-दी-फॉलोइंग, गेस्स-दी-वर्ड जैसे गेम्स व कई पॉप-क्विज़ेज बनाई हैं, जिससे की मेरे विद्यार्थी चाहे जब वह ट्रैफिक में फसें हों या उनके पास खाली समय हो, तो वह हिंदी प्रैक्टिस कर सकते हैं।

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