विशेषज्ञों की मानें तो किशोर लड़कियां उनकी उम्र के लड़कों के मुकाबले जल्द ही मैच्योर हो जाती हैं। उनमें आत्म नियंत्रण, संयम, निर्णय लेने की क्षमता आदि लड़कों से अधिक होती है। क्या इसका मतलब यह है कि हम लड़कियों से ज्यादा काम करवाएं और हमारे लड़कों को कुछ भी ना सिखाएं?अंदर छिपी लड़की को एंब्रेस करें

क्या वाकई लड़कियां जल्दी मैच्योर हो जाती है या मैच्योर होने के लिए उन पर दबाव डाला जाता है? पीरियड्स आ गए हैं, ब्रेस्ट्स डिवेलप हो रहे हैं, अब तो बड़ी हो गई हो। इसके बाद एक लड़की कैसे बैठती है? क्या खाती है? क्या कपड़े पहनती है? इन सभी चीजों पर नियंत्रण रखा जाता है और प्रतिबंध भी लगाया जाता है।

आइए जानें कि अपने अंदर छिपी लड़की को कैसे एंब्रेस करें

खुलकर हँसना सीखो

अपने अंदर छिपी छोटी लड़की को पहचानिए। बचपन में हँसते वक्त हम यह कभी नहीं सोचते थे कि हम कितना जोर से हँस रहे हैं या हमारे दांत दिख रहे हैं या नहीं। तो अब क्यों इस बारे में सोचना? आप जैसे हँसना चाहते है, जितना जोर से हँसना चाहती है, वैसे हँसे, खुलकर हँसे।

नई चीज़ें सीखिए

कोई भी नई स्किल सीखने से, कोई नया काम सीखने से डरिए नहीं। किसी को यह नहीं कहने देना कि तुम तो इसके लिए काफी मैच्योर हो। क्या आपने कभी किसी बच्चे को किसी नई चीज़ सीखने से डरते देखा है? अपनी लाइफ में थोड़ा-सा एक्साइटमेंट लाइए और किसी भी चीज को सीखने के लिए हमेशा उत्सुक और तत्पर बने रहिए।

खुद को प्रायोरिटी दें अंदर छिपी लड़की को स्वीकार करें

खुद के बारे में पहले सोचना या अपने ड्रीम्स को, अपने करियर को फॉलो करना आदि सेल्फिश नहीं है। कभी-कभार खुद को प्रायोरिटी देना गलत नहीं है। जब आप सबके बारे में सोचती हैं तो स्वयं के लिए भी थोड़ा समय निकालें।

अपने एंबिशंस की सीमा न तय करें

सपने देखने से डरिए मत। आप जो कुछ बनना चाहती हैं, जो कुछ पाना चाहती हैं, उसके बारे में सोचिए। उसे पूरा करने के लिए, उस दिशा में काम करिए। किसी भी चीज से डरना हल नहीं है। आप जितना कुछ सीखना चाहती है सीखिए। अपने एंबीशंस पर या अपने ड्रीम्स पर कोई सीमा न तय कीजिए।

गलतियां करिए अंदर छिपी लड़की को स्वीकार करें

जब भी आप कोई नई चीज सीखते हैं, तो गलती होना स्वाभाविक है। इसमें कोई बुराई नहीं है। आप जितनी गलती करना चाहते हैं उतनी करिए क्योंकि जब तक आप गलती नहीं करेंगे तब तक आपको पता नहीं चलेगा कि आपको क्या नहीं करना है। गलती से ही व्यक्ति सीखता है। हर ठोकर व्यक्ति को और मजबूत बनाती है।

 

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