बच्चे की परवरिश कोई आसान काम नहीं है| जब इमोशनल बच्चे की देखभाल करने की बात हो तो यह जिम्मेदारी और कठिन हो जाती है| मानो एक इमोशनल या भावुक बच्चा है |जो की एक पल तो शांत और पेशेंस से रहता है | पर दूसरे ही पल और वायलेंट और झगड़ालू हो जाता है | तो आप इस प्रकार के इमोशनल बच्चे की देखभाल डे – केयर में या स्कूल में कैसे करेंगें| ऐसे में आपके द्वारा हर काम सोच समझकर और हर हर शब्द नाप तोलकर बोला जाना चाहिए|

भगवान ने हर बच्चे को अलग – अलग मानसिकता का बनाया है | इसलिए एक ही प्रकार का कठोर कदम सब बच्चों के लिए काम नहीं करता| आपको बच्चे को समझना होगा और इसके अनुसार कदम उठाना होगा|

इमोशनल बच्चे की देखभाल के लिए अपनाये यह कुछ आसान टिप्स

1.पेशेंस – आपके लिए पहली और सबसे जरुरी जरुरत है पेशेंस| बच्चों के साथ पेशेंस से पेश आना बहुत जरूरी है| खास तौर पर इमोशनल बच्चे के साथ यह जरुरत और बढ़ जाती है| हो सकता है कभी – कभी आपको लगेगा कि आपके पेशेंस की सीमा टूट रही है लेकिन संयम रखें धीरे – धीरे चीजें स्मूथ हो जाएंगी|

2.बच्चे को ठीक से सुनें– इमोशनल बच्चे की देखभाल के दौरान बच्चे का एक- एक शब्द सही तरह सुनना बहुत जरुरी है| ऐसा जरूरी नहीं है कि आप हर शब्द पर ही कदम उठायें लेकिन देखते रहें और सुनते रहें| यह भी जरूर ध्यान रहे कि बच्चे को लगना चाहिए कि आप उसे सुन रहे हैं| कई बच्चे ध्यान खेंचने के लिए नखरे भी दिखाते हैं| अपने बच्चे के साथ ऐसा नहीं होने दें|

3.दया भावना रखें – जब बच्चा जानता है की आप उसकी भावनाएं समझते हैं |तो वह इजी महसूस करता है| इससे बच्चा आपसे कनेक्शन महसूस करता है| इससे बच्चे के लिए आपसे खुलकर बात करना आसान हो जाता है|

4.उन्हें अपनी बात रखने का मौका दें -हर बच्चा चाहता है कि उसे ठीक प्रकार सुना जाए इससे उसका आत्मविश्वास बढ़ता है| इमोशनल बच्चे भी यह आत्मविश्वास चाहते हैं और इससे उन्हें अपनी भावनाएं और सोच रखने में मदद मिलती है|

5.उसकी भावनाओं का सही इवैल्यूएशन करें – यह जरूरी है इमोशनल बच्चे की हर सोच और भावना को सही से समझ जाए| लेकिन आपको उसकी मदद के लिए तैयार रहना चाहिए| चाहे कोई भी स्थिति हो, बच्चे की भावनाओँ और सोच का सही इवैल्यूएशन करें| यदि ऐसा नहीं हो पा रहा है बच्चे को पेशेंस से समझाएं और दूसरा पक्ष रखें|

6.खुश रहें -बच्चा आपके इमोशंस के अनुसार काम करता है| यदि आप खुश रहेंगे तो वह भी खुश रहेगा| यदि आप नाराज या ग़ुस्से मै रहेंगे तो बच्चा भी ऐसा ही रहेगा| इसलिए अपने बच्चे को खुश रखने के लिए आपको अपने अंदर झांकना होगा और ऐसा करके आप यह ख़ुशी बच्चे के अंदर देखेंगी|

7.सेट लिमिट – हो सकता है कि आप दुसरे किसी बच्चे के साथ खुश,पेशेंस, शांति और समझ रखें किन्तु इमोशनल बच्चे के साथ इसकी सीमायें होनी चाहिए| ध्यान रखें कि जब बच्चा अपनी लिमिट लाँघेगा तो उस पर गलत सन्देश जायेगा और ऐसा करने पर बच्चा आपके प्यार का गलत फायदा उठाना शुरू कर देगा|

8.बच्चे को निर्णय लेने के अनुमति दें -बच्चे को इमोशनली हेल्थी रखने के लिए उसे अपने निर्णय लेने दें परिणाम भले ही अच्छा या बुरा हो| इसके साथ ही उसके कठिन समय में बच्चे के साथ जरूर रहें| उसका जबरन हाथ पड़ने और उसके साथ चलने की आवश्यकता नहीं है जब केवल साथ रहना ही पर्याप्त है|

बच्चे मुलायम मिटटी की भांति होते हैं जैसी शेप आप उन्हें देंगे वे वैसा ही आकार ले लेंगे| कुछ को शेप देते समय कुछ ज्यादा ध्यान देने की जरुरत होती है | इमोशनल बच्चे की देखभाल करते समय थोड़ा ज्यादा मेहनत करने की जरुरत होती है ताकि वह दुनिया का सामना आत्म- विश्वास और सकारात्मक नजरिये से कर सके|

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