नारीवाद से जुड़ी 5 गलतफ़हमियाँ

Published by
Sakshi

नारीवाद की पहुँच जितनी बढ़ी है, उतनी ही बढ़ा है इस विचारधारा का विरोध और इसका मुख्य कारण है नारीवाद से जुड़ी गलतफ़हमियाँ। सोशल मीडिया के दौर में कम्यूनिकेशन के साथ मिसकम्यूनिकेशन भी होता है। आज सोशल मीडिया पर कई ऐसे साइट्स मिल जाएँगे जो नारीवाद के विषय में झूठीं बातें फ़ैला रहे हैं और लोगों में इसके प्रति विरोध का भाव पैदा कर रहे हैं। लोग फ़ेसबुक पर जो पढ़ लेते हैं उसी को सच मान कर बैठ जाते हैं। ऐसे में ज़रूरी हो जाता है इन गलत धारणाओं का विरोध किया जाए और नारीवाद का असली मतलब समझाया जाए।

पढ़िये नारीवाद से जुड़ी गलत फ़हमियाँ क्या हैं –

1. “नारीवाद पुरुष विरोधी विचारधारा है “

कई लोग नारीवाद पर ये आरोप लगाते हैं कि ये एक पुरुष विरोधी विचारधारा है जबकि यह तो पुरुषों पर हो रहे पितृसत्ता के अत्याचारों की भी बात करता है। यह मानना गलत है कि नारीवादी महिलाएँ पुरुषों से नफ़रत करती हैं और उनसे बदला लेना चाहती हैं। नारीवाद तो केवल लैंगिक समानता की माँग करता है। ये सच है कि हमारे समाज में पुरुषों को कुछ विशेषाधिकार मिले हैं, जिसका नारीवाद विरोध करता है, लेकिन इन प्रिविलेजेस का ताल्लुक प्रितृसत्ता से है, पुरुषों से नहीं। नारीवाद इस बात को समझता है कि पुरुष भी पितृसत्ता का शिकार हैं और उन्हें भी अपनी लड़ाई में शामिल करने की बात करता है।

2. “नारीवाद केवल स्त्रियों के लिए है”

नारीवाद की शुरुआत भले ही महिलाओं के उत्थान के लिए हुई हो लेकिन समय के साथ ये विचारधारा समावेशी (intersectional) बन चुकी है। आज नारीवाद समाज के हर उस व्यक्ति की आवाज़ उठाता है जो लिंग, धर्म, जाति, रंग या क्लास की वजह से भेद-भाव का शिकार हुआ है। नारीवाद हर जेंडर की बात करता है क्योंकि पितृसत्ता ने केवल स्त्रियों को ही नहीं बल्कि पुरुष, ट्रांसजेंडर्स इत्यादि को भी अपना शिकार बनाया है।

3. “नारीवाद मातृसत्ता लाने की बात करता है”

नारीवाद पितृसत्ता को ख़त्म करके समानता लाने की बात करता है। महिलाओं की सत्ता स्थापित करना नारीवाद का गोल नहीं है। इस विचारधारा की माँग केवल इतनी है कि हमारे सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक और राजनैतिक संस्थाओं में महिलाओं की भी बराबर की भागीदारी हो। नारीवाद सभी जेंडर्स को उनके बराबरी के हक दिलाने की ओर बढ़ाया गया एक कदम है। यह एक आंदोलन है जो लिंग के आधार पर हो रहे भेद-भाव को समाप्त करके लैंगिक समानता लाने की वकालत करता है इसलिए इसे मातृसत्ता से जोड़ना गलत है।

4. “नारीवादी बनने के लिए ऐसा दिखना पड़ता है”

कई लोगों के मन में नारीवादी स्त्री की एक तस्वीर बनी हुई है। यदि किसी से सवाल किया जाए कि एक नारीवादी कैसी दिखती है तो जवाब आता है कि ख़ुद को नारीवादी कहने वाली स्त्रियाँ अक्सर छोटे बाल रखती हैं, मॉडर्न कपड़े पहनती हैं, लिपस्टिक लगाती हैं इत्यादि। ये सोच बिल्कुल गलत है। दुनिया की कोई भी स्त्री नारीवादी हो सकती है चाहे वो बिंदी लगाती हो या सलवार सूट पहनती हो क्योंकि नारीवाद विचारों के माध्यम से इंसान के जीवन जीने का तरीका बनता है, वेशभूषा के माध्यम से नहीं।

5. “नारीवाद परिवार के संस्था पर खतरा है”

ज़्यादातर लोग इस बात पर विश्वास करते है नारीवादी महिलाएँ हमेशा परिवार की संस्था का विरोध करती हैं। इस गलतफहमी के चलते लोगों ने नारीवादियों का विरोध करना भी शुरू कर दिया है। आपको इंटरनेट पर कई ऐसी फोटोज़ मिल जाएँगी जिसमें पुरुष बैनर लिए खड़े हैं और बैनर में लिखा हुआ है “वी वॉन्ट फैमिली, नॉट फेमिनिस्ट्स”। ये धारणा गलत है। नारीवाद सिर्फ़ परिवार के पितृसत्तात्मक ढाँचे के खिलाफ़ है जो पुरुष को घर का मालिक बनाता है और स्त्री को ग़ुलाम। इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि एक नारीवादी परिवार की संस्था का विरोध करती है, बल्कि नारीवाद तो परिवार के स्कोप को वाइड बनाता है।

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