पीरियड्स में पैड्स का इस्तेमाल तो आम है, मगर आज भी कई महिलायें पैड्स से होने वाले नुकसान से अनजान हैं। पीरियड्स के दिनों, लगातार पैड्स के इस्तेमाल से हमारे शरीर को काफी परेशानी होती है। जिसके बारें में आप सभी को जरूर जानना और समझना चाहिए। साथ-ही, इस परेशानी से कैसे बचा जा सकता है यह भी आगे बताया गया है।

पैड्स के लगातार इस्तेमाल से होने वाले नुकसान :

  • इंफेक्शन और जलन की शिकायत

पैड्स का ज्यादा इस्तेमाल करने से, उन जगहों पर इंफेक्शन और जलन की शिकायत होती है। आमतौर पर, ऐसी परेशानियां महिलाओ को पीरियड्स खत्म होने के बाद होती है। साथ-ही, सिन्थेटिक (Synthetic) पैड्स में रसायनों (chemicals) की मात्रा, आपके शरीर पर बेहद बुरा असर डालती है। और कई तरह के स्किन इन्फेक्शन (skin infection) को भी जन्म देती है।

  • बैक्टिरिया पनपने का खतरा harmful effects of pads in hindi

पैड्स लगे होने के कारण, एयर सर्कुलेशन बहुत कम हो जाता है। जिसके कारण उन जगहों पर बैक्टिरिया पनपने लगते हैं, जो हमारी सेहत के लिए बहुत खतरनाक साबित होते है।

  • तेज बदबू की शिकायत harmful effects of pads in hindi

पैड्स में जमा खून, कुछ समय बाद सड़ने लगता है। जिसके कारण तेज बदबू आती है और यह बिल्कुल भी hygienic नहीं होता।

  • स्किन छिल जाने का डर

आमतौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले, सिन्थेटिक (Synthetic) पैड्स के कारण उन जगहों की स्किन छिल जाती है। जिसके कारण महिलाओ को काफी परेशानी होती है। साथ-ही, पैड्स लगे होने के कारण, उन जगहों पर लगातार नमी रहती है। जिस वजह से वहाँ की स्किन डैमिज (skin damage) होने का खतरा रहता है।

कैसे बचें पैड्स के इन साइड-इफेक्टस् से :

  • हर 4 घंटे में पैड्स को बदलना, बिल्कुल ना भूलें।
  • ध्यान रहें, पीरियड्स के दौरान प्राइवेट पार्ट को सूखा रखें।
  • साफ हाथों से ही पैड्स को लगाए।
  • सिन्थेटिक पैड्स की जगह कॉटन पैड्स का इस्तेमाल करें। यह ज्यादा सुरक्षित होते हैं।
  • पीरियड्स के दिनों मे, ढीले पैन्ट या लोवर पहने। इस वजह से एयर सर्कुलेशन (air circulation) बना रहेगा।
  • किसी भी प्रकार का इंटिमेट वॉश (intimate wash) का इस्तेमाल करने से पहले, अपनी डॉक्टर की राय जरूर लें।
  • संभव हो तो, पैड्स की जगह मेंस्ट्रुअल कप (menstrual cup) का इस्तेमाल शुरू करें। यह पैड्स से होने वाले खतरों से बचाता है। पैड्स में लगा ब्लड लंबे समय तक वजाइना के आप-पास लगा रहता है, लेकिन मेंस्ट्रुअल कप्स में ऐसा नहीं होता। इसमें ब्लड कप में इकठ्ठा होता रहता है, जिस वजह से कभी भी TSS (टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम) नहीं होता। TSS एक रेयर बैक्टिरियल बीमारी है, जो लंबे समय तक गीले नैपकीन को इस्तेमाल करने से होती है।
  • पीरियड्स के दौरान अपने प्राइवेट पार्ट्स की अच्छे से सफाई करें और उसे हमेशा साफ व सूखा रखें।

 

 

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