आज इकीसवीं सदी में होने के बावजूद भी हमारे समाज में मर्द औरत के हाइमेन पे ही अटके हुए हैं। उनके लिए ये एक तरह की सील है जिसको तोड़ कर उन्हें किसी भी लड़की का पहला सेक्सुअल पार्टनर होने का गौरव प्राप्त होता है। कितनी घिनौनी बात है ये। पर यहीं है सोसाइटी की सोच- एक लड़की के संस्कार, उसका यौवन, और उसकी इनोसेंस को घोल कर ये सोसाइटी उसे एक सील बना देती है और उसका नाम रख देती है हाइमेन। लड़की को भी ये सिखाया जाता है की अगर एक बार ये हाइमेन चला गया तो उसकी सारी इज़्ज़त मिट्टी में मिल जाएगी। इन सब बकवास से पहले क्या कभी किसी ने इसकी बायोलॉजी जानने की कोशिश की है, क्या कभी ये समझने की कोशिश की है की ये सिर्फ पैट्रिआर्की के द्वारा बनाया गया एक मायाजाल है।

हाइमेन नहीं है कोई सील

सोसाइटी की सोच इतनी घटिया है की वो आज भी लड़की की हर अचीवमेंट से पहले उसकी विर्जिनिटी पे उसे जज करती है। ये सोच ही गलत है। साइनटिफिकली अगर देखा जाए तो हाइमेन पहली बार सेक्स करने के बाद रप्चर कर जाता है। पर ये किसी तरह की पतली फिल्म नहीं होती है जिसे पेनिट्रेट करके उसे तोड़ा जा सके।

हाइमेन कोई ब्लॉकेज नहीं होता है

हाइमेन कोई ब्लॉकेज नहीं है बल्कि इसमें पहले से ही छेद रहते हैं। डॉक्टर रिद्धिमा शेट्टी बताती है की हाइमेन एक कम्पलीट शील्ड नहीं होता है बल्कि इसमें जो होल्स होते हैं वो हमारे पीरियड्स के दौरान पीरियड ब्लड को निकलने का रास्ता देते हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो हमारा पीरियड ब्लड बॉडी में ही ट्रैप हो जायेगा जो की वास्तविकता में नहीं होता है। पहली बार सेक्स के बाद जब हाइमेन रप्चर करता है तो आम तौर पर इससे ब्लीडिंग होती है। हाइमेन कई फिजिकल एक्टिविटीज के कारण भी रप्चर कर सकता है। इसको इस सोसाइटी ने एक लड़की की प्योरनेस के साथ जोड़ कर सदियों से उसको परेशान किया है।

इसलिए हमें एक लड़की की विर्जिनिटी पे ऑब्सेस्स करना बंद कर देना चाहिए

पैट्रिआर्की की बातों के विरुद्ध हाइमेन किसी भी औरत की प्योरनेस का कोई मापदंड नहीं होता है। इसके रप्चर के बाद भी एक लड़की वैसे ही रहती है जैसे वो उसके पहले थी इसलिए इस पर ऑब्सेस्स करते रहने का कोई मतलब नहीं है। मर्दों को ये समझना चाहिए की ये कोई सीलब्रेकर नहीं है जिसको पा लेना उनकी मर्दानगी के लिए एक बहुत बड़ा अचीवमेंट है। ऐसी बातें सिर्फ सोसाइटी की डबल स्टैण्डर्ड को दिखाती हैं। समय आ गया है की हम इन सब बातों से आगे बढ़ें।

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