खुद की काबिलियत को नकारना, खुद को बेकार समझना और दूसरों की अपेक्षा खुद को कमतर आंकना, यह होता है इम्पोस्टर सिंड्रोम। यह सिंड्रोम मन में उठने वाला एक तरीके का भ्रम है, जिसके कारण व्यक्ति खुद को बिल्कुल नकारा समझने लगता है। और उसे दूसरा व्यक्ति हर मामले में खुद से बेहतर और मजबूत लगता है। यह इम्पोस्टर सिंड्रोम किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। Imposter Syndrome in hindi

इम्पोस्टर सिंड्रोम के लक्षण : Imposter Syndrome in hindi

इम्पोस्टर सिंड्रोम (Imposter Syndrome) के कई लक्षण होते हैं, जिनमें से कुछ हैं – आत्मविश्वास में कमी होना, किसी भी काम को करने से पहले मन में डर आना, हमेशा खुद पर संदेह करना, ज्यादातर किसी सोच में ही डूबे रहना, हमेशा नकारात्मक बातें करना, मन में हारने की उम्मीद रहना, सफल होने पर भी खुश नहीं होना, आदि। Imposter Syndrome in hindi

इम्पोस्टर सिंड्रोम से बचने के उपाय : Imposter Syndrome in hindi

इम्पोस्टर सिंड्रोम से बचने के लिए खुद में बदलाव लाने की जरूरत है। कोशिश करें हमेशा सकारात्मक रहने की, और अगर कभी मन में कोई नकारात्मक विचार आए तो अपना ध्यान अपनी किसी पसंदीदा चीज़ की तरफ़ ले जाएँ। किसी भी चीज़ को लेकर खुलकर बात करें, अपने मन के विचार अपने किसी करीबी को बताएँ। और अपने जीवन में योग अपनाएँ, ताकि आपका मन शांत और एकाग्र रह सके।

कभी भी अपने बीते समय या आने वाले समय को लेकर चिंता से ग्रस्त न रहें, अपने आज पर ध्यान दे और निरंतर आगे बढ़ने की कोशिश करते रहें। अगर इन सब बातों पर अमल करके भी आपको अपने में कोई सुधार महसूस नहीं होता और यदि आप इम्पोस्टर सिंड्रोम से घिरते ही चले जा रहे हैं तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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