टी20 वर्ल्ड कप में भारत दूसरे स्थान पर आया है। लेकिन क्या यह एक हार है? बिलकुल नहीं, क्योंकि हरमनप्रीत कौर की महिला क्रिकेट टीम ने हमारे देश में क्रिकेट को देखने का नज़रिया बदला है। उन्होंने इसे काफ़ी ज़्या पॉपुलर कर दिया है। भले ही हमने कप ना जीता हो, लेकिन इससे भारतीय समाज के स्टेरोटाइप्स ज़रूर टूटे। महिला की जीत है जो कुछ अलग करना चाहती है, जो किसी नई स्ट्रीम में जाना चाहती है। यह हर उस लड़की की जीत है, जो कायदों के खिलाफ जाने की कोशिश करती है।

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भारतीय टीम की महिलाएं छोटी-छोटी जगहों से आतीं हैं, और यह बात कि वह भारत को इंटरनेशनल स्टेज पर रिप्रेजेंट कर रही हैं, दिखाती है कि इनके लिए कुछ भी नामुमकिन नहीं है। जहाँ कप्तान हरमनप्रीत कौर पंजाब के मोगा से आतीं हैं, वाईस कप्तान स्मृति मधाना सांगली से आती हैं और शैफाली वर्मा रोहतक से हैं।

चाहे वह टी20 ना जीतें हों, उन्होंने देश को एक चीज़ ज़रूर दी – वह पॉपुलैरिटी और फैन फोल्लोइंग, जो महिला क्रिकेट को हमेशा से मिलनी चाहिए थी, लेकिन कभी मिलती नहीं थी।

पहले लड़कियां कोई अलग सा करियर नहीं चुनती थीं। कोई ऐसी चीज़ करना, जो कन्वेंशनल न हो, ऐसे में काफी प्रेज़रवेन्स, खुद पर विश्वास और कभी पीछे न हटने वाला जज़्बा चाहिए होता हैं। भारतीय टीम में कुछ ऐसे प्लेयर्स हैं, जो दुनिया के सबसे अच्छे प्लेयर्स में से एक हैं।

यह पहली बार था कि महिला क्रिकेट टीम टी20 के फिनाले तक पहुँच चुकी थी। यही नहीं, यर्ह भी पहली बार था कि ग्रुप स्टेज में उनका अंबीटन रन था। खैर, इंग्लैंड के साथ सेमि फिनाले में वह आउट हो गए।

मैच में आखिर क्या हुआ?
संडे को, भारत को 185 रन्स बनाने थे, और मैच की शुरुआत में ही 4 विकेट्स गिर गए। फिर 19.1 ओवर्स में 99 रन बनाते हुए टीम आउट हो गई। बैट्सवुमेन शैफाली वर्मा, स्मृति मधाना, जेमिमाः रोड्रिगुएस, व स्किपर हरमनप्रीत कौर को पिच पहले छ ओवर्स में छोड़नी पड़ी।

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