दुनिया में सिर्फ सेक्स, ओरल सेक्स को लेकर ही लोगों की अलग-अलग बातें नहीं है बल्कि सेक्स एजुकेशन को लेकर भी लोगों के बहुत से मिथ्स हैं । आइए जानते हैं सेक्स एजुकेशन मिथ्स कितने सच्चे और कितने झूठे हैं:

सेक्स एजुकेशन मिथ्स

1. सेक्स एजुकेशन सेक्स को बढ़ावा देता है।

अक्सर लोगों को लगता है कि सेक्स एजुकेशन सेक्स को बढ़ावा देता है । लोगों का मानना है की सेक्स एजुकेशन बच्चों को सेक्स के बारे में जानकारी कम बल्कि उन्हें सेक्स करने के लिए उकसाता है।

2. ये छोटी उम्र में सेक्स को मंजूरी देता है

अक्सर हमने देखा है कि हमारे पास 15 से 16 उम्र के बच्चे सेक्स करते हैं। साथ ही उन्हें सेक्स से जुड़ी परेशानियों का सामना भी करना पड़ता है। पर लोगों का मानना है कि इसका कारण सेक्स एजुकेशन है।

3. ये माता पिता के रोल को कम करता है।

छोटे बच्चों के माता-पिता मानते हैं कि सेक्स एजुकेशन देकर सरकार बच्चों को उनसे दूर कर रही है। उन्हें ऐसा लगता है कि बच्चों को सेक्स से जुड़ी जानकारी सिर्फ मां बाप को ही देनी चाहिए ना कि सरकार को।

4. सामाजिक और धार्मिक रूप से गलत है

सेक्स एजुकेशन को अक्सर धर्म और समाज के खिलाफ माना जाता है। लोगों का मानना होता है कि सेक्स के बारे में बात करने से और खुलकर अपने विचार रखने से समाज और धर्म की वैल्यू की अवहेलना होती है, इसलिए सेक्स एजुकेशन धर्म और समाज के खिलाफ है।

5. ये बच्चों से उनकी मासूमियत दूर कर देता है

मां-बाप को लगता है सेक्स एजुकेशन छोटे बच्चों के अच्छे अपन और मासूमियत को खत्म कर देता है। उन्हें लगता है कि सेक्स के बारे में बचपन से सुनने से बच्चे अच्छा नहीं सोचते और उनके दिमाग में सिर्फ टैक्स के ख्याल आते रहते हैं।

ये सभी सेक्स एजुकेशन मिथ्स लोगों के मन में हैं।

लोगों को सेक्स  एजुकेशन की प्रक्रिया को अपनाना होगा जिससे कि समाज में बच्चों को छोटी उम्र पर प्रेगनेंसी या फिर सेक्शुअली ट्रांसमिटेड बीमारियों से बचाया जा सके।

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