‘अरे!! ये राजनीति की बातें है, तुझे समझ नहीं आएंगी।’ ‘जितना तू समझती है, उतनी आसान राजनीति नहीं होती।’ अक्सर  महिलाओं को यह कहकर, राजनीति से दूर रहने की सलाह दे दी जाती है। महिलाओं के राजनीतिक विचार 

देश के स्वतंत्रता संघर्ष से लेकर आज की राजनीति में महिलाओं के बढचढ़ के हिस्सा लेने के बाद भी, महिलाओं के विचारों को राजनीति से दूर क्यों रखा जाता है ?

किन कारणों से, लोगों को महिलाओं के राजनीतिक विचारों से परहेज़ होता है ?

हमारे समाज ने हर काम को लड़का और लड़की के हिसाब से परिभाषित कर, बाँट रखा है। इसमें, जहां एक ओर रसोई (kitchen) का सारा काम लड़की के हिस्से डाल दिया जाता है तो वही दूसरी ओर घर को चलाने की जिम्मेदारियाँ और घर के बाहर के काम (जो भी काम समाज के हिसाब से कठिन है), लड़के को दे दिए जाते हैं।

इन तथ्यों से, सीधा मतलब यह निकलता है कि – समाज की नजरों में जो काम आसान है, वो लड़कियों के लिए रखे गए और जो काम थोड़े-से पेचीदा या मुश्किल है, वो लड़कों के लिए।

अब यह जो लड़का-लड़की में ‘आसान और मुश्किल’ का भेद है, केवल काम तक ही सीमित नहीं रहता। लड़कियों के विचारों को भी कई तरह से प्रतिबंधित किया जाता है। ठोस और दमदार विषयों पर विचार (power opinion) केवल पुरुषों के व्यक्तित्व से ही जोड़कर देखे जाते है। अगर लड़की राजनीतिक विचार रखती है, तो उन विचारों से लोगों को परहेज़ होने लगता है। क्योंकि समाज के हिसाब से यह विषय मुश्किल है और लड़कियों के लिए नहीं बना है। ठीक उसी तरह जैसे मैथ्स का विषय और गाड़ी चलाना, लड़कियों के लिए नहीं हैं। 

साथ-ही, यदि मुश्किल विषयों पर लड़कियां अपने सशक्त विचार रखने लगी और वाद-विवादों में सक्रिय रहने लगी तो इससे पितृसत्ता (patriarchy) को भारी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है। और इस डर के कारण समाज लड़कियों को राजनीतिक विचारों से परहेज़ करने को कहता है। महिलाओं के राजनीतिक विचार 

आज समाज को चीजों को नए नज़रिये से देखने की जरूरत है, और वो नया नज़रिया है ‘समानता’ का। अगर हम आज के दौर में विचारों को लेकर लड़का-लड़की में ऐसे भेद करेंगे, तो इससे प्रगति पर एक बड़ा-सा प्रश्नचिन्ह लगेगा। और यह प्रश्नचिन्ह हमारे आने वाले कल के लिए, नुकसानदेह साबित हो सकता है।

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