बचपन से लेकर बड़े होने तक हर व्यक्ति ने एक औरत को दूसरी औरत से ये कहते हुए ज़रूर सुना होगा कि “अरे आपकी तो बेटी है, आपको तो काम से आराम रहता होगा। जिनके बेटे होते हैं उन्हें तो सारा काम खुद करना पड़ता है।” और जो लड़की घर के काम से दूर रहती थी वो निकम्मी बन जाती थी। इन सब तो यही समझ आता है कि अच्छी लड़की बनने के लिए सिर्फ़ पढ़ाई में अच्छा होना काफ़ी नहीं है। लड़की होने के नाते, घर के कामों में आपकी दिलचस्पी होना बहुत जरूरी है। बेटों के लिए ऐसा नही है। वो अच्छा खेल भर लें, काफ़ी है। (लड़के घर का काम क्यों नहीं करते)

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बेटों को घर का काम सिखाने में आखिर गलत क्या है?

मान लिजिए कि हो सकता है कल को आपके बेटे को कहीं अकेला रहना पड़े, ऐसे में अगर वो घर का काम सीखा रहेगा तो उसे ही फायदा होगा ना। इसके लिए ज़रूरी है कि आप ये अच्छे से अपने दिमाग में बैठा लें कि घर के काम केवल औरत की ज़िम्मेदारी नहीं होती। घर के कामों में हाथ बंटाने से किसी आदमी की मर्दानगी कम नहीं होती है, बल्कि इससे वो ज़्यादा ज़िम्मेदार इंसान होने का सबूत देता है। जिन लड़कों को बचपन में ये छोटी पर अहम बातें नहीं सिखाई जातीं, वो ही आगे चल कर ऐसे आदमी बन जाते हैं, जिन्हें घर के कामों की ज़िम्मेदारी बांटना अपनी शान के खिलाफ लगता है। (लड़के घर का काम क्यों नहीं करते)

हम आज समाज में, वर्कप्लेस पर औरतों को समान हक़ दिलाने के लिए लड़ रहे हैं, पर क्या हम सब घर में Gender Equality पर ज़ोर देते हैं? Gender Sensitization की जब बात होती है, तब भी घर में इसकी ज़रुरत को उतना महत्व नहीं दिया जाता।

औरत होने के मायने सिर्फ खाना बनाना और घर के काम करना नहीं है

“वो औरत ही क्या जो खाना बनाना न जानती हो, अपने घर को ही ठीक से नहीं रखती है, ये किस काम की औरत।” औरत होने के मायने कुछ लोगों के लिए उसका अच्छा कुक होना और सफ़ाई पसंद होना होते हैं। एक औरत जिसे घर के कामों में लगे रहने का जूनून नहीं है, वो अच्छी औरत नहीं होती। उसकी बाकी सभी खूबियां इस कमी के सामने छोटी हो जाती हैं। ऐसी औरत न एक अच्छी मां समझी जाती है, न अच्छी बेटी, न अच्छी बहू और न ही अच्छी पत्नी।

सभी घरेलू काम, बच्चों की देखभाल सब कुछ उनकी ज़िम्मेदारी होती है। लेकिन मर्द या औरत कोई भी घर के काम करने के लिए नेचुरल स्किल्स लेकर पैदा नहीं होता है। (लड़के घर के काम क्यों नहीं करते)

लड़कों का घर के काम करना कोई बड़ी बात नहीं है (ladke ghar ke kaam kyon nahi karte)

कोई लड़का अगर घर का छोटा-सा काम करता हो, तो उसे एक अलग महानता का दर्जा दे दिया जाता है। कहा जाता है “लड़का हो कर घर का काम करता है बताओ”, वहीं घर की लड़कियों का काम करना बिलकुल आम बात है, “ये तो उनका काम ही है।” अपनी बहनों और मां के प्रति ये बर्ताव देखकर लड़कों के दिमाग में साफ़ मैसेज जाता है, ‘लड़कियां घरेलू काम करने के लिए ही बनी हैं’। लड़के घर का काम क्यों नहीं करते

एक और सोच है इसके पीछे, हम इसे एक तरह का स्टीरियोटाइप भी कह सकते हैं. “लड़कियों को सफ़ाई पसंद होती है, या लड़कियों को सफ़ाई-पसंद होना चाहिए”, आदमी तो कैसे भी रह लेते हैं, You Know…They Don’t Care!”

घर का काम करने के लिए आखिर ऐसी कौन-सी कला चाहिए?

ये ही समझ नहीं आता कि घर का काम करने के लिए भला ऐसा क्या चाहिए होता है, जो भगवान ने मर्दों को नहीं दिया, इसलिए औरतों को ही करना पड़ता है। किसी भी अच्छे काम की शुरुआत घर से करनी चाहिए। Gender Equality का सपना भी घर के मुद्दों को नज़रंदाज़ कर के नहीं सुलझाया जा सकता।

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