Learnings From Anupama Serial: अनुपमा सीरियल की 5 बातें जो इसे ख़ास बनाती है

Learnings From Anupama Serial: अनुपमा सीरियल की 5 बातें जो इसे ख़ास बनाती है Learnings From Anupama Serial: अनुपमा सीरियल की 5 बातें जो इसे ख़ास बनाती है

SheThePeople Team

09 Mar 2022


Learnings From Anupama Serial: डेली सोप का वो ड्रामा, एक लव स्टोरी, सास-बहु के झगड़े के साथ होना सीरियल एक और वजह से भी खास है और वो है इसका फेमिनिज्म को सही ढंग से पेश करना। हर महिला को प्रेरित करता यह सीरियल 45 उम्र की महिला "अनुपमा" के जीवन के इर्द गिर्द बना जो अपने परिवार को अपने सपनों के साथ लेकर चलती है।

रास्ते में पति से मिला धोखा, सास से ताने, एडजस्ट करने की सलाह ने उसे अपनी सेल्फ रिस्पेक्ट से कोम्प्रोमाईज़ नहीं करने दिया और हर कदम पर खड़े होना सिखाया। इसी के साथ आईए जानते इस कहानी के कुछ हाईलाइट जो इसे फेमिनिस्ट हिंदी सीरियल बनाते है और सोसाइटी को अपने प्रीडेटर्मीनेड सोच से हटकर कुछ नया, सही सिखाया है-


"औरत का जीवन सिर्फ घर-परिवार और रसोई तक ही नहीं है"


शादी के बाद अनुपमा ने पढ़ाई छोड़, अपने डांस के सपने को छोड़ दिया क्योंकि उसे सिखाया गया कि घर परिवार सबसे ऊपर है पर रिश्ते टूटने के बाद लड़की के जीवन में घर परिवार के साथ उनका खुद का जीवन भी महत्व रखता है समझ आया जो हर औरत को याद रखना चाहिए।

"सच्चे प्यार की कोई उम्र नहीं होती"

डाइवोर्स के बाद या उम्र ज़्यादा हो जाने के बाद प्यार नहीं मिलता या नहीं होता यह किसने कहा? जब आप श्योर हो शादी को लेकर, अपने जीवन साथी को लेकर व शादी करने के लिए रेडी हो तो किसी के ओपनियन मैटर नहीं करते। यह आपका जीवन है, क्या करना, कब करना यह सिर्फ आप तय कर सकते है।

"डाइवोर्स नार्मल और हमेशा औरत ही इसके लिए जिम्मेदार नहीं है"

अनुपमा ने जब डाइवोर्स लेने की बात की तो उसे एडजस्ट, एक और मौका, माफ़ करने को कहा गया और इसी के साथ तलाक के लिए उसे ही जिम्मेदार ठहराया गया जबकि उसके पति ने धोखा दिया पर वह रुकी नहीं क्योंकि वो सही थी और यही सच है। तलाक म्युचली लिया गया है तो किसी एक को क्यों दोष देना?

"बिज़नेस स्टार्ट 45 की उम्र में भी हो सकता है"

अनुपमा ने और उसके पहल पति ने की नौकरी चले जाने पर उस उम्र में बिज़नेस की शुरुआत की जब ज़्यादातर लोग रिटायरमेंट की सोचते है। बुढ़ापा आ गया है, कैसे हैंडल करोगे, बुढ़ापे के लिए बचा के रखो इत्यादि बातों ने हर काम को उम्र के हिसाब से डिफाइन कर दिया है जो कंट्राडिक्टरी है।

"औरत दूसरी औरत की तरफ जैलीसी फील करती है"

अनुपमा ने इस बात को पूरी तरह गलत साबित कर दिया जब उसने अपने पति को गर्लफ्रेंड के मोलेस्ट होने पर उसे संभाला, घर पर रखा, उसकी देखभाल की। उन्हें रिलेशनशिप एडवाइस से लेकर सेल्फ रेस्पेक्ट की एडवाइस दी और साथ में उनके मुश्किल वक्त में साथ भी दिया।


अनुशंसित लेख