भारत में महिलाओं के साथ निरंतर हो रहे अत्याचार के कारण ज़रूरी है कि महिलाओं को अपनी लीगल राइट्स के बारें में पता हो महिलाएं अक्सर बिना किसी सहारे के रह जाती है जब उनपर कोई अत्याचार होता है। यहाँ हम आपको कुछ प्रोसीज़रल लीगल राइट्स को देखेंगे जो भारतीय महिलाओं को पता होने चाहिये।

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1. महिला अधिकारियों की उपस्थिति

एक महिला को गिरफ्तार करते समय , कम से कम एक महिला पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी से सम्बन्ध होना चाहिए महिला आरोपी से पूछताछ के टाइम एक महिला अधिकारी की उपस्थिति कंपल्सरी है। महिलाओं को केवल महिला कांस्टेबल या अधिकारी ही गार्ड करेंगी।

2. रात के समय अरेस्ट

कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर , सेक्शन 46 (4) और NHRC गाइडलाइन्स के अंडर, एक महिला आरोपी को केवल असाधारण कंडीशन्स में शाम 6 बजे से सुबह 6 बजे के बीच गिरफ्तार किया जा सकता है। असाधारण कंडीशन्स के मामले में, गिरफ्तारी करने वाली महिला अधिकारी को जुडिशल मजिस्ट्रेट से पहले लिखित परमिशन की आवश्यकता होती है, जिसके अंडर गिरफ्तार की जाती है। यहाँ तक की ऐसी गिरफ्तारी के मामले मे, महिला को केवल एक महिला अधिकारी ही गिरफ्तार कर सकती है और आल वीमेन पुलिस स्टेशन में ले जाया जा सकता है।

3. बॉडी सर्च

CrPC के सेक्शम 51(2) के अंडर एक वीमेन का बॉडी सर्च केवल एक महिला पुलिस अफसर डीसेंसी के साथ कर सकती है ।

4. जीरो FIR

कॉग्निज़िबल अपराध के लिए FIR यानी ऐसा अपराध जिसके लिए पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तारी कर सकती है, उस अपराध या विक्टिम के रेजिडेंस पर उसके अधिकार क्षेत्र के अलावा भी किसी पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया जा सकता है। जिस पुलिस स्टेशन में इस तरह की जीरो एफआईआर दर्ज की जाती है, उस जीरो एफआईआर को उस थाने तक पहुंचाने से पहले कम से कम प्रारंभिक जांच करने की ज़रुरत होती है, जिसके दायरे में सिकायत आती है।

5. स्टेटमेंट इन ओन रेजिडेंस

सीआरपीसी की धारा 160 के अंडर , एक महिला गवाह को अपने निवास पर अपने बयान को रिकॉर्ड करने का अधिकार है और किसी पुलिस स्टेशन में बयान दर्ज करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

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