एक माँ का जीवन घर से शुरू होकर घर पर ही खत्म हो जाता है।  हमेशा वो हमारे बारे में ही सोचती है। हमारा काम, हमारा घर, सब कुछ हमारे लिए ही पर उसका खुद का क्या ? हर माँ बहुत कुछ सहती है, बहुत कुछ जिसका हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते। डमेस्टिक वायलेंस , वर्बल एब्यूज इन सब चीज़ों का शिकार होने के बावजूद भी वो हमें लाड -प्यार करना नहीं भूलती। हमें खुश रखने की पूरी कोशिश करती है। तो उसकी संतान होने के नाते हमारा यह फ़र्ज़ बनता है कि हम उसे खुल कर ज़िन्दगी जीना सिखाये, उसके अंदर की वो लड़की जो कही खो गयी थी उससे उसे मिलवाएं।

उन्हें खुद को एहमियत देना सिखाये

उन्हें बताएं की उनकी ज़िन्दगी में उनकी ख़ुशी बहुत ज़रूरी है। उन्हें समझाएं की अगर वो खुद रहेंगी तभी सब खुश रहेंगे। उन्हें कहें की वो अपनी सेल्फ केयर पर ध्यान दें, स्पास के लिए जाएँ , खुद की चोइसस को अहमियत दें।

टॉक्सिसिटी से कट – ऑफ करने में उन्हें सपोर्ट करें

कोई भी रिलेशन, पर्सन या सिचुएशन अगर उन्हें टॉक्सिसिटी की तरफ ले जाती है तो उन्हें उससे कट-ऑफ करने में मदद करें। उन्हें बताएं की उनके ओपीनियंस, उनकी सोच बहुत मैटर करती है। उन्हें हिम्मत दें खुद के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने की।

उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए मोटीवेट करें

उन्हें वो सब करने के लिए सपोर्ट करें जो वो करना चाहती थी या एक समय पर यह उनका सपना था। उन्हें कोई भी वोकेशनल कोर्स या अपनी रुकी हुई एजुकेशन पूरी करने के लिए मोटीवेट करें। उन्हें मोटीवेट करें ऐसी किसी जॉब से बाहर निकलने के लिए जो उनकी ग्रोथ को रोक रही है।

उन्हें आर्थिक रूप से सपोर्ट करें

हर घर में सिर्फ माँ ही होती हैं जो फिनांशियली दुसरो पर डिपेंडेंट होती हैं तो इसलिए उन्हें हमेशा फिनांशियली सपोर्ट करें। उन्हें खुद के लिए स्टेबल होने में मदद करें। उन्हें इतना फिनांशियली इंडिपेंडेंट बनाये की उन्हें अपने खर्चों के लिए किसी पर डिपेंड न होना पड़े।

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