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बिहार के 93 वर्षीय मिथिला कलाकर, गोदावरी दत्ता से मिलें

Published by
Mahima

भारत में महिलाओं ने पीढ़ी दर पीढ़ी ज्ञान और स्किल्स निर्माण में हाथ बाँटते हुए ट्रेडिशनल आर्ट के फॉर्म्स को कॉन्सेर्वे करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसी ही एक महिला है गोदावरी दत्ता, जिन्होंने 2019 में मधुबनी आर्ट में कॉन्ट्रिब्यूशन के लिए पद्मश्री जीता। यह आर्ट फॉर्म बिहार के मिथिला रीजन में पॉपुलर है और मिथिला पेंटिंग के फॉर्म में दुनिया भर में प्रसिद्ध है। इस टाइप की पेंटिंग फेस्टिवल्स, धार्मिक सेलिब्रेशन और स्पेशल ओकाशन्स के प्रेजेंटेशन के लिए मानी जाती है।

गोदावरी दत्ता के बाफे में कुछ इंस्पिरिंग बातें :

  • गोदावरी दत्ता एक प्रसिद्ध मिथिला आर्टिस्ट हैं। उन्होंने पूरी दुनिया में मिथाली की पेंटिंग को लोकप्रिय बनाया। जापान के एक म्यूजियम ने 2019 में उनके चित्रों को भी डिस्प्ले किया था। ‘त्रिशूला’, दत्ता के बेहतरीन चित्रों में से एक, म्यूजियम में भी दिखाया गया था। उनके चित्रों को ओसाका, टोक्यो, कोबे आदि में भी डिस्प्ले किया गया था।

” मिथिला आर्ट यूनिक है और आने वाली पीढ़ी को भी इसे ज़िंदा रखने के बारे में सोचना चाहिए। ” – गोदावरी दत्ता

  • 2006 में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने दत्ता पर ” शिल्प गुरु ” की उपाधि अर्पित की। वह नई पीढ़ी को मिथाली आर्ट को आगे बढाने के लिए इंस्पायर करना चाहती है।
  • गोदावरी जो दरभंगा जिले के बहादुरपुर गांव से हैं, जब वह 10 साल की थीं, तब उन्होंने अपने पिता को खो दिया था। उनकी माँ ने उन्हें मधुबनी कला का अभ्यास करने के लिए एंकरेज किया।
  • 93 वर्षीय अपनी कला में रामायण और महाभारत के कैरेक्टर्स केपोर्ट्रेअल के लिए भी फेमस है।
  • अन्य कलाकारों से अलग होकर, वह बम्बू स्टिकस से पेंटिंग करती है।
  • पद्मश्री विजेता ने मधुबनी कला में भारत और विदेशों में 50,000 छात्रों को पढ़ाया है। भारत सरकार के सेंटर फॉर कल्चरल रिसोर्सेज एंड ट्रेनिंग के अंडर , उन्होंने मिथिला पेंटिंग की कला में कई शिक्षकों और छात्रों को शिक्षित किया।
  • उन्होंने मिथिला पेंटिंग में अपने गांव की महिलाओं को गाइड किया और उन्हें फाईनैनशियली इंडिपेंडेंट होने में मदद की।
  • दत्ता ने एक इंटरव्यू में कहा कि यह उनकी माँ सुभद्रा देवी थी जिन्होंने उन्हें इस आर्ट फॉर्म को बढाने के लिए एंकरेज किया। ” मुझे डर था कि अगर मेरी माँ, जो एक बहुत बड़ी कलाकार थी, तो पेंटिंग देखती और मुझे डांटती। लेकिन जब उन्होंने देखा तो उन्होंने मुझे बहुत प्रेस किया और कहा कि मैं किसी दिन रक महान कलाकार बनूँगी। उन्होंने मुझे यह कहते हुए एंकरेज किया कि मुझे घबराना नहीं चाहिए और अपने काम के साथ आगे बढ़ना चाहिए। “

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