देशभर में चल रहे किसान आंदोलन को लेकर दुनियाभर की तमाम हस्तियों ने सोशल मीडिया के ज़रिए पोस्ट शेयर किए। इसी कड़ी में पहले पॉर्न स्टार रह चुकीं मिया खलीफ़ा ने भी ट्वीट किया, फिर क्या था लोगों को यह बात हज़म नहीं हुई। और मिया के पोस्ट पर लोगों ने उनके पुराने काम को लेकर उनकी मज़ाक बनाना और उनकी ट्रोलिंग करना शुरू कर दिया।

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पक्ष-विपक्ष की बातें करना एक चीज़ है और एक स्तर पर यह ठीक भी है, क्योंकि आपको अपने विचारों से अलग विचार सुनने व समझने के लिए मिलते हैं। बस, इसमें शर्त यह है कि आप सुनने वाले होने चाहिए। मगर किसी के काम को लेकर उसकी ट्रोलिंग करने में, उसकी मज़ाक बनाने में, कैसी ‘समझदारी’। और किसी के काम की ट्रोलिंग सिर्फ इसलिए करना क्योंकि वो काम हमारे हिसाब से ठीक नहीं है, यह तो ‘बेवकूफी’ है। मिया के साथ हुआ यह वाकिया, हमारे समाज की एक बेहद घिनौनी तस्वीर को सामने रखता है। और हमें बताता है कि लोगों को कितना मज़ा आता है किसी का मज़ाक उड़ाने में, किसी को नीचा दिखाने में।

हाल ही में हुए इस किस्से ने मुझे अपनी साल भर पहले की एक मुलाकात याद दिलाई, वो आँसू याद दिलाए और वो संकोच से भरी मुस्कुराहट भी। मेरी यह मुलाकात थी – GB रोड की एक महिला सेक्स वर्कर के साथ, जो अपना पेट पालने को तो मजबूर थी ही, मगर साथ ही मजबूर थी समाज के तानों को सुनने के लिए। 

GB रोड की एक महिला सेक्स वर्कर से मुलाकात

‘‘मैडम, हर कोई काम पेट भरने के लिए करता है ना, हम भी तो इसलिए ही करते हैं। फिर हमारा काम किसी को काम क्यों नहीं लगता।’’ यह आधा जवाब और गहरा सवाल मुझे GB रोड की उस  महिला सेक्स वर्कर से मिला था, जिसके जीवन के किस्सों ने, समाज की खोखली मानसिकताओं से मेरा परिचय करवाया था।

‘‘मेडिकल स्टोर से लेकर सब्जीवाले तक, हमें अपनी पहचान कहीं नहीं बतानी होती है। वरना वो हल्ला करके, हमको भगा देंगे’’, महिला ने कहा। हमें यह समझने की जरूरत है कि आर्थिक तंगी से लेकर जिम्मेदारियों तक, इस पेशे में आने की वजह कुछ भी हो सकती है। पर बात यहाँ पर आकर खत्म हो जानी चाहिए कि वो इंसान इस पेशे में, अपनी मर्जी से आया है। सेक्स वर्क के पेशे में कई लोग, अपनी मर्जी से होते हैं। और सामाज के तौर पर हमारा कर्तव्य बनता है कि उस मर्जी का सम्मान हो। और यदि हम सम्मान देने के पक्ष में नहीं रहते, तो कम-से-कम हमें उनका अपमान तो नहीं करना चाहिए।

‘सेक्स वर्क ही क्यों, कुछ और काम कर लेती’, ‘इनको पैसा और मज़े दोनों चाहिए’, और न जानें कितना कुछ एक सेक्स वर्कर को सुनना पड़ता है। गाली के रूप में किसी को ‘तवायफ़’ बोल देना, तो जैसे लोगों के लिए आम बात हो। हमारे दिमाग में शायद एक बार भी न आता हो, मगर यह सोचना, बेहद जरूरी है कि जिसके बारे में हम इतना सब कह रहे है, वो हम सबकी ही तरह एक साधारण इंसान है। और उसको अपनी मर्जी से जीवन जीने का पूरा अधिकार है।

हर किसी की ‘चॉइस’ को सम्मान देना जरूरी है, अगर सम्मान देने के आप सक्षम नहीं हैं तो उस चॉइस को ‘इग्नोर’ कीजिए। मगर किसी को गाली देकर इंसानियत पर कालिख मत पोतिए।

 

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