आजकल की युवा पीड़ी से देश को बहुत -सी उम्मीदे हैं और उन उम्मीदों पर देश के नौजवान खरे भी उतर रहे हैं । आइये आज हम बात करते हैं ऐसी ही एक यंग वुमन के बारे में जिन्होंने सिर्फ 22 साल की उम्र में अपनी किताब लिखी और यूएस से अपनी हाई पेड जॉब छोड़कर इंडिया आयी ताकि वो अपने देश के लिए कुछ कर सके । आइये जानते है सिमर मल्होत्रा के बारे में उनके शीदपीपल टीवी को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू के द्वारा ।

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1.आपने अपनी पहली किताब 16 साल की उम्र में लिखी थी , अपनी उस किताब के बारे में हमे कुछ बताइये ?

मेरी पहली किताब, देयर इज़ ए टाइड मैंने अचानक ही लिखी । मैं अमेरिका में एक समर क्लास से लौटी थी और उस समय अपनी बुक लिख रही थी । मैं उस समय दिल्ली में हो रहे अन्ना हजारे आंदोलन से प्रेरित थी और इसमें से कुछ को मैंने अपनी पुस्तक में शामिल किया। देयर इस अ टाइड एक पोलिटिकल नाटक है, जो एक युवा लड़की के बारे में है जो अमेरिका से भारत लौटती है ताकि अपने बड़े भाई को एक राजनीतिक साजिश से बचा सके। यह उसकी यात्रा बताती है क्योंकि वह उसे इस दलदल से निकालने की कोशिश करती है। यह इंटरनेशनल ब्रेन-ड्रेन के विषय को भी छूता है और देश के युवाओं के रूप में, हमें अपने देश को इफ़ेक्ट करने वाले मुद्दों के बारे में शिकायत करने के बजाय कुछ करने के लिए जगाने की आवश्यकता है।

2.आप हमेशा से राइटर बनना चाहती थी या आपको किसी ख़ास चीज़ ने इसके लिए  इंस्पायर किया ?

मैं हमेशा एक रीडर रही हूँ, जिस बच्चे को आप कभी उसके हाथ में एक किताब के बिना नहीं पाएंगे। मैंने सिर्फ अपने लिए लिखा है, लेकिन मुझे यह पसंद आया कि किताबें और कहानियां रीडर्स पर एक अनोखा असर छोड़ती हैं । मुझे लगता है कि मुझे अपने इस क्राफ्ट से इतना प्यार है कि मैंने लिखना शुरू किया. मुझे यह भी पता है कहानियां लोगों के ऊपर एक गहरा असर छोड़ती हैं.

3.आपने यूएस की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है, क्या आप हमारे साथ अपना एक्सपीरियंस शेयर करना पसंद करेंगी ?

मैं स्टैनफोर्ड में इंटेलेक्चुअल, क्रिएटिव, सोशली, मोरली और अन्य सभी तरीकों से इम्प्रूव हुई हूं। मेरे दोस्त और मेरे टीचर्स मुझे मोटिवेटेड रखते थे.

4.आप यूएस से जॉब छोड़कर भारत क्यों आई?

अक्सर, दूरी न केवल दिल को बड़ा करती है, बल्कि अपनेपन की भावना भी पैदा करती है। स्टैनफोर्ड में वही हुआ है। भारत से दूर रहने से मुझे एहसास हुआ कि हम सभी अपनी जड़ों से दूर होते जा रहे थे, उन चीजों से जो हमें भारतीय बनाती थी और इस अहसास और इसे बदलने की जरूरत से इंकपॉट शुरू हुआ

मैं एक एडवर्टाइज़िंग स्टार्ट-अप पर थी, जिसे फंडवर्क्स कहा जाता था जहां मैं क्रिएटिव प्रोजेक्ट में काम कर रही थी। मैंने वह केवल इसलिए छोड़ दिया क्योंकि मैंने इंकपॉट को अनोखे तरीके से शेप लेते हुए देखा था और पूरे प्रोजेक्ट को देखने के लिए मै यहाँ होना चाहती थी।

5.आप हमारे नए वेंचर इंकपॉट के बारे में कुछ बताइये?

इंकपॉट एक सोच है। इसका उद्देश्य भारतीय कला, साहित्य और संस्कृति के मूल्य को फिर से जोड़ना, दोबारा प्रस्तुत करना और डेवेलप करना है। इंकपॉट का एम हमारे देश में पैदा हुई कला के साथ युवा भारत को सराहना और आकर्षक बनाना है। पिछले कई सालों में, हमने वेस्टर्न कल्चर में बढ़ोतरी देखी है, जिसने हमें अपनी संस्कृति से दूर कर दिया है। हमें अपने अंदर जो सुंदर है उसे सम्मान देने और अपनी सदियों पुरानी परंपराओं पर गर्व करने की जरूरत है। क्योंकि कला केवल मनोरंजन के उद्देश्य से नहीं चलती है। वे शिक्षित होने, धारणाओं को बदलने  और हमारी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की क्षमता रखते हैं।

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