पगलैट रिव्यु : यह एक नेटफ्लिक्स की फिल्म पगलैट है, जो उमेश बिष्ट द्वारा निर्देशित है ।यह मूवी शुक्रवार 26 मार्च को रिलीज़ की गयी है। मूवी एक युवा विधवा पर केंद्रित है जिसे उसके पति के मर जाने का कोई दुख नहीं है। उसके अवगुण उसके रिश्तेदारों को भ्रमित करते हैं। अंतिम संस्कार की रस्मों के बीच, उसके मन में अन्य चीजें हैं। और जो उसके आसपास चल रहा है, उसे सोच नहीं सकते।

1 ) पगलैट थीम-

इस फिल्म में समाज के ऐसे मुद्दों को उठाया गया है जो एक पत्नी के पति मर जाने पर उसे अपेक्षित होते हैं। कुछ रीती रिवाज़ उनमे ऐसे हैं जिनका शायद कोई मतलब भी नहीं। उन्हें पीछे छोड़कर संधया गिरी (sanya malhotra ) अपने जीवन में आगे बढ़ने के लिए तैयार होती है।

2 ) पगलैट स्टोरी-

उसे उसके पति के बारे में कुछ ऐसा पता चलता है। जिसे जानकर वह काफी परेशां हो जाती है। और अपने पति पर पहले गुस्सा करती है काफी लेकिन फिर उसे माफ़ कर देती है।

उसके ससुराल वाले भी काफ़ी चिंतित होते हैं क्यूंकि उन्हें एक बड़ा लोन चुकाना होता है। साथ ही अपने बेटे के जाने का दुख भी है। इसी बीच कई और रिश्तेदार घर में आजाते हैं। और कुछ नोक झोक उनमे भी होती है।

अपने मरे हुए पति के बारे में उसे अलमारी में से एक रहस्य मिलता है जिसे देख कर वो बहुत अचंभित हो जाती है। उसके बाद उसकी ज़िन्दगी पूरी बदल जाती है। वह अपनी ज़िन्दगी फिरसे शुरू करने के लिए घर से चली जाती है। वह भी बिना किसी की परवाह किये बिना। अपनी दोस्त नाज़िया के साथ मिलकर वह अपने जीवन के लिए कई प्रश्नों के उत्तर खोजती हैं।

साथ ही अपने जीवन को एक नयी उड़ान देने के लिए तैयार होती हैं। और अपने पति की तैरवी ख़तम होते ही घर से नौकरी ढूंढ़ने के लिए निकल जाती है। पगलैट रिव्यु

 

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