भूख ज्यादा लगना, जी मिचलाना, वजन बढ़ना, कब्ज, बेचैनी, त्वचा में पीलापन ,हारमोनल बदलावों की बाढ़, तरह-तरह की बातें सोचना, अजीब-अजीब अहसास और दिमागी उतार-चढ़ाव। प्रेगनेंसी में मेडिटेशन के फायदे

ये सब क्या है? मैं कितनी बदल गई हूँ!! क्या मैं फिर से नार्मल हो पाउंगी? मुझे कब तक यह सब बर्दाश्त करना होगा? और फिर इस तरह के बहुत से अनचाहे बदलावों के बाद आप एक नन्हीं सी जान को जन्म देती हैं, उस पर अपना प्यार लुटाने, उसे पाल-पोस कर बड़ा करने और एक अच्छा इन्सान बनाने के लिए। हर गर्भावस्था की तरह हर गर्भवती महिला भी अलग होती है |मेडिटेशन (ध्यान लगाना) गर्भावस्था में काफी हद तक सकारात्मक असर करता है।

आइये जानते हैं मेडिटेशन क्यों करें और प्रेगनेंसी में मेडिटेशन के फायदे (pregnancy me meditation ke fayde)

i) अपने भ्रूण से अच्छा संबंध बनाने के लिए

ii) अपने दिमागी उतार-चढ़ाव पर काबू रखने के लिए

iii) यह प्रसव से पहले और बाद होने वाली चिंताओं को खत्म करने का काम करता है

iv) अपने शरीर में होने वाले बदलावों को लेकर आप पूरी तरह जानकार रहती हैं

v) आप पूरा खाना खाती हैं और आपका हाजमा दुरूस्त रहता है

vi) गर्भावस्था की वजह से होने बेचैनी के बावजूद आप पूरी और अच्छी नींद लेती हैं

vii) अपनी परेशानियों और उलझनों के बजाय एक बच्चे को जन्म देने को लेकर आपको पुरजोश और खुश होने का एहसास होता है।

अनुलोम-विलोम, प्राणायाम का अभ्यास करनाः 10-15 मिनट तक अनुलोम-विलोम करना भी काफी असरदार होता है। अनुलोम-विलोम, प्राणायाम करने की ही एक तकनीक है। 10-15 बार इसे करना आपको तरोताजा कर देता है और आपकी शारिरिक वायु और ऊर्जा को काबू में रखता है। इसे करने की तकनीक जानने के लिए किसी योग्य योगा गुरू से जानकारी लें।

किसी हल्के गीत-संगीत का चुनाव करेंः आस-पास के माहौल के अनुरूप और मन को सुकून देने वाला। यह कोई भजन या मंत्र भी हो सकता है, जिसे याद रखा जा सके और गुनगुनाया जा सके …. पर आपको इसके उच्चारण पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है।

अपनी आँखें बंद करें, गहरी सांस लें और 15-20 बार इसे बोलें। हर बार एक गहरी सांस लेकर इसे शुरू करें। इसे बोलना खत्म करने के बाद जब आप धीरे-धीरे अपनी आँखें खोलते हैं तो अपने-आप को पूरे ब्रम्हांड और इसकी अनंत सीमाओं से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं।

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