अगर हम अपने पितृसत्तात्मक समाज को एक जेल की तरह देखें तो कुछ आंटियों ने उसमें सबोर्डिनेट जेलर का काम ले रखा है। जिस हद तक इन्होंने लड़कियों की मोरल पॉलिसिंग करने, उन्हें कंट्रोल और शर्मिंदा करने का काम किया है वो निंदनीय है। शायद ही कोई जवान, शादीशुदा महिला होगी जिसे एक रैंडम आन्टी ने ब्रा की स्ट्रिप दिखने पर टोका ने हो या “ढंग से बैठो” न बोला हो क्योंकि “लड़कियों को लड़कों की तरह नहीं बैठना चाहिए”। जैसी ही कोई लड़की अपनी ज़िंदगी अपने हिसाब से जीना शुरू करती है, लोग चले आते हैं उसे “कैरेक्टरलेस” का टैग देने। इससे भी ज़्यादा गुस्सा इस बात पर आता है कि यही ट्रीटमेंट इन आंटीज़ के राजा बेटों को नहीं मिलता।

यहाँ पढ़िये 5 अन्नोयिंग बातें जो देसी आंटीज़ अपने राजा बेटा से नहीं कहती।

1. “ये सब ससुराल में कैसे चलेगा ?”

लड़की हूँ इसलिए ये सवाल मुझसे हज़ारों बार पूछा जा चुका है, लेकिन यही सवाल कभी किसी लड़के से नहीं पूछा जाता। आपको ये क्यो लगता है कि आपके राजा बेटा की सेंस ऑफ़ एंटाइटलमेंट उसके इन लॉस को बड़ी पसंद आएगी और क्या मुझे अपनी हरकते ये सोच कर बदल लेनी चाहिए कि मेरे फ्यूचर इन लॉस को ये अच्छा नहीं लगेगा? ये बकवास है।

2. “जॉब मिल गयी? अब सेटल हो जाओ”

हाँ बिल्कुल। आख़िर मेरे अच्छे ग्रेड्स और जॉब का सोल पर्पज़ पति पाना ही तो है, हैना? क्योंकि आपके दिमाग में, मैं लड़की होकर जितना अचीव कर सकती थी उतना कर लिया और मेरे करियर प्रोस्पेक्ट तो आपके लिए कुछ मायने रखते नहीं। अगर मैं एक लड़का होती तो आप कभी ये बात नहीं कहती।

3. “तुम्हे कुछ ज़्यादा ही छूट मिल गयी है”

मैं इस छूट की हकदार हूँ। ये मेरा राइट है कि मैं एक आज़ाद इंसान बन कर जियूं। ये बहुत कष्टदायक है कि आपके राजा बेटा को ये सारी बातें नहीं सुननी पड़तीं। वैसे, कुछ ज़्यादा ही छूट क्या होती है? क्या उसे फ्रीडम कहेंगे, जब ये तय किया जाएगा कि कितनी एमाउंट में देनी हैं?

4. “बड़ी हो गयी हो, अब भी खाना बनाना नहीं आता?”

तो मैं एक जवान लड़की हूँ जिसे खाना बनाना नहीं आता और आपका 21 साल का बेटा अभी भी बच्चा है जो अपने खाने के लिए आप पर निर्भर रहता है? क्या हिपोक्रिसी है आन्टी, वाह! जहाँ तक मैं समझती हूँ, खाना बनाना और साफ-सफाई करना ज़िंदगी की बेसिक स्किल्स हैं जो हर किसी को आनी चाहिए। लड़की होने का ये मतलब नहीं कि मैं इन गुणों के साथ पैदा हुई थी इसलिए मुझे शेम करने की जगह सीखने में मदद करेंगी तो बेहतर रहेगा।

5. “बड़े शहर कितने अनसेफ होते हैं, आस पास कोई कॉलेज क्यों नहीं देख लेती?”

हाँ, और तब समस्या नहीं होती जब आपका बेटा देश से बाहर जाकर पढ़ता है? जैसी ही अखबार या टीवी में औरत के खिलाफ़ हुए क्राइम्स(जो हर रोज़ होते हैं) की खबर आती है, पेरेंट्स और रिश्तेदारों को एक और बहाना मिल जाता है घर की लड़कियों की लाइफ कंट्रोल करने का। प्यारी आन्टी, इतनी फ़िक्र दिखाने के लिए आपका शुक्रिया लेकिन मैं अपनी पढाई और कॅरिअर चंद खराब लड़को की वजह से एफेक्ट नहीं होने दूँगी। घर पर रहने की ज़रूरत उन लड़को को है जो क्राइम करते हैं।

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