हम कहने को तो 21वीं सदी में रहते हैं परंतु आज भी पितृसत्ता देखने को मिलती है। इसी के रहते आज भी महिलाओं को अक्सर अपने सपनों, अपने आत्म-सम्मान आदि को न्योछावर करना पड़ता है। उसे शादी के बाद एक अच्छी बहू के रूप में रहने के लिए अपने आप में बहुत परिवर्तन लाने पड़ते हैं और कभी- कबार तो उसे अपना पूरा अस्तित्व ही बदलना पड़ता है। इसी पितृसत्ता के चंगुल में फंस कर उसे अपना कैरियर, अपनी फ्रीडम ऑफ चॉइस, अपनी जॉब, अपनी फैमिली और यहाँ तक कि अपना सरनेम तक बदलना पड़ता है। क्यों हर बार एक महिला को ही इन सब का शिकार बनना पड़ता है? सबसे दुःख देने वाली बात तो यह है कि कुछ महिलाएं ही आज भी पितृसत्ता को बढ़ावा देती हैं। शादी करके न बदलें

1) लड़की की पर्सनल चॉइस जरूरी है


बचपन से ही लड़कियों को उनकी दादी और मां द्वारा एक अच्छी, सुशील बहू के रूप में तैयार किया जाता है परंतु क्या हमने कभी सोचा है कि उस लड़की के जीवन में क्या बदलाव आएँगे? वह इन बदलावों के साथ कैसा महसूस करेगी ? इसीलिए हमारा ये जानना जरूरी है कि क्यों महिलाओं को शादी के बाद नहीं बदलना चाहिए।

2) क्यों एक महिला ही सब कुछ सैक्रिफाइस करे?


क्या हमने एक महिला को शादी करने से पहले उसकी इच्छाएं, उसकी चॉइसेस पूछी है? कहने को तो हमारे यहां लड़कियां लक्ष्मी- सरस्वती सब कही जाती है परंतु शादी के बाद क्यों यह सारी चीजें भुला दी जाती है? यदि शादी के बाद पति-पत्नी दोनों के बीच में कुछ अनबन हो भी जाए तो क्यों महिला को ही उसे बर्दाश्त करने को बोला जाता है? शादी करके न बदलें

3) बदलाव दोनों तरफा होने चाहिए


माना कि शादी कुछ कॉम्प्रोमाइज,कमिटमेंट्स आदि मांगती है परंतु ऐसा किसने कहा की सिर्फ महिलाओं से मांगती है। मैरिज में म्यूचुअल चॉइस, प्यार, इक्वालिटी आदि शामिल है। तो sacrifices भी दोनों तरफ से होने चाहिए।

4) शादी से जुड़ी बातों में बदलाव जरूरी


हमारी भारतीय संस्कृति में लड़की को शादी के बाद क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए उसकी पूरी टू डू लिस्ट तैयार है। उसकी मेहंदी का रंग उसकी किस्मत तय करता है। तुम्हीं ने कुछ कहा होगा, तुम्हारे भाग्य में ऐसा लिखा होगा यह सब बातें उसी को क्यों झेलनी पड़ती है? इसलिए शादी के बाद क्या करना है उसे वह अपने घर वालों के साथ म्यूचुअली डिसाइड करे तो अच्छा होगा।

5) वूमेन एंपावरमेंट जरूरी शादी करके न बदलें


यह इसलिए जरूरी है ताकि महिलाएं अपनी जिंदगी के फैसले खुद ले सकें। शादी उसके लिए आज़ादी हो नाकी बंदिश। वह अपना जीवन वैसे ही व्यतीत करे जैसे कि वह अपनी शादी से पहले किया करती थी। लड़की अपने परिवार के साथ करीबन 20-25 साल बिताती है। उसे शादी के बाद के जीवन को अपनाने में भी समय लगेगा यह बात भी समझना जरूरी है। शादी करके न बदलें

शादी करके न बदलें

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