एक करोड़ जीतना कोई छोटी मोटी बात नही होती और जब आप मेगास्टार अमिताभ बच्चन जी के सामने बैठे हों तो वो एक सपना साकार करने जैसा अनुभव ही है।

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बिनीता जैन, कौन बनेगा करोड़पति के 10स्वे सीजन की विजेता , एक सिंगल मदर हैं। उनकी और उनकी 2 बच्चों की ज़िंदगी पूरी तरह से बदल गयी जब उनके पति को टेरेरिस्ट्स द्वारा अगवा कर लिया गया।

गुवाहाटी में रहने वाली बिनीता अब एक स्कूल की वाईस प्रिंसिपल हैं। उन्होंने शीदपीपल से बात की एक सिंगल मदर होने के अनुभवों के बारे में, मेंटल हेल्थ पर और उन्होंने आने वाले के.बी.सी के सीजन के कंटेस्टेन्ट्स के लिए कुछ टिप्स भी शेयर किए।

और आजकल की लड़कियां बहुत स्मार्ट हैं और अपने पैरों पर खड़े होना चाहती हैं। मेरी बेटी भी हमेशा से अपने पैसे कमाना चाहती थी और सच में जब से उसने कमाना शुरू करा है तबसे उसका कॉन्फिडेंस बढ़ गया है। – बिनीता जैन

के.बी.सी जीतने के बाद आपकी ज़िंदगी मे क्या क्या बदलाव आए? आपने प्राइज मनी का कैसे उपयोग किया?

मेरी ज़िंदगी ने अबाउट टर्न ले लिया शो को जीतने के बाद। सब मुझे पहचानने लगे और सबकी आंखों में अलग तरह की रेस्पेक्ट थी मेरे लिए। मुझे रॉयल ग्लोबल स्कूल में सीनियर कोऑर्डिनेटर की जॉब भी मिल गयी और ज़िन्दगी काफी जनेरेस हो गयी मेरे के.बी.सी जीतने के बाद।

एक सिंगल मदर होने के नाते मैं चाहती हूं मेरे बच्चे अच्छे से सेटल हो जाये। मेरा बेटा ऑर्थोडॉन्टिस्ट है और मैं उसके लिए सारी फैसिलिटीज़ वाला क्लिनिक खोलना चाहती हूं। ज़्यादातर प्राइज मनी मैं इसी में लगाउंगी।

फेम और पॉपुलैरिटी के साथ क्या सोसाइटी के आपकी तरफ रवैया बदला है क्योंकि सिंगल मदर को हमेशा कई सारी प्रेजुडिस का सामना करना पड़ता है?

हां, मैंने कई प्रेजुडिस का सामना किया है पर मैंने अपने बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए हमेशा खुद को मजबूत बनाये रखा। हमेशा खुद को मेंटली फिट रखा और हमेशा काम मे लगी रही। पता नही क्यों सिंगल मदर्स को इतनी हीन भावना से देखा जाता है। वो डिवोर्सी हो सकती है , विडो हो सकती है या किसी अनचाहे एक्सीडेंट का शिकार हो सकती है। सोसाइटी समझ ही नही पाती।

महिलाओ को हमेशा सेंसिबल फाइनैंशल डिसिशन लेने चाहिए, कई बार पैसों के लिए जॉब जॉइन करते हैं और उसमें सेटिसफैक्शन नही मिलती, या हम बहुत मेहनत कर रहे हैं पर हमें उतना रिवॉर्ड नही मिल रहा। इसलिए महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिये। –  बिनीता जैन

मैंने लोगो का रवैयाबदलते हुए देखा जैसे जो मेरे साथ हुआ उसकी जिम्मेदार मैं हूँ। बहुत बुरा लगता है जब आपको लोगों की सपोर्ट की ज़रूरत होती है और लोग आपको ही जज करने लगते हैं।

मैं जब के.बी.सी में गयी और वापस आयी तो मुझमे कोई बदलाव नही आया पर लोगो के व्यवहार में 360° का चेंज आगया।

अपने इस ट्रेजेडी के बाद खुद को कैसे सम्भाला?

ट्रेजेडी के बाद मेरे दोनों बच्चे ही ही मेरी मोटिवेशन और ताकत बनें। मुझे बच्चों को देख कर लगता था कि अब मुझे पहले से ज़्यादा ज़िम्मेदारी निभानी है और इसके लिए मुझे मेंटल हेल्थ को ठीक रखना होगा। मेरे बच्चे अब सिर्फ मुझसे ही आशा रख सकते हैं यही सोचकर मैं मज़बूत रही। पहले 1 या 2 साल तक मैं डिप्रेशन में रही और लोगो से सपोर्ट ना मिलने के कारण थोड़ी हताश भी हुई। दोस्त थे पर उनकी भी कुछ लिमिटेशन्स थी। मुझे इसके बाद लगा कि मुझे सिर्फ मैं खुद सम्भाल सकती हूं। और लोग तभी मदद करेंगे जब मैं खुद की मदद करूँगी। मैंने घर पर कोचिंग देना शुरू किया ताकि मैं काम भी कर सकूं और बच्चों के साथ भी रह सकूँ। इससे मुझमे सेफ कॉन्फिडेंस आया और मैं मज़बूती से आगे बढ़ती गयी।

जो बेहतरीन अनुभव आपको खुद एक करोड़पति बनने में होगा वो अनुभव किसी करोड़पति की बीवी बनने में नही होगा। – बिनीता जैन

जब समय आया कि मुझे अपने बेटे को पढ़ाने शहर से बाहर भेजना था और मेरे बेटे ने बी.डी. एस क्लियर किया तो लोगों ने मुझे उसे बाहर भेजने से रोका पर मुझे पता था कि उसे अपनी लाइफ खुद बनानी है और मैंने उसे 5 साल के लिए बाहर पढ़ने भेजा। इस समय मे मैंने मास्टर्स और बी.एड कम्पलीट किया।

आपके बच्चो ने आपके जीतने पर कैसे रियेक्ट किया? उनको आप फेम और पापुलारिटी के बारे में क्या सीख देती हैं?

मेरे बच्चों ने शुरुआत से मेरा स्ट्रगल देखा है और मैंने जो दिक्कतें देखी हैं वो सब जानते हैं। उन्होंने ही मेरे खराब दिनों में साथ दिया है तो जब मैं जीती तो उन्होंने मुझे कहा कि आप जो डिज़र्व करती थी वो आपको मिल गया। ये सुनना मेरे प्राइज मनी जीतने से ज़्यादा खुशी दे गया।

मैंने खराब दिन भी देखें हैं जब वो मुझे बदल नही सके तो अच्छे दिन भी मुझे नही बदल सकते। मैं जैसी हूँ वैसे ही रहूंगी। यही मैं बच्चो को भी बताती हूँ। कभी भी फेम और पॉपुलैरिटी को अपने सिर पर नही चढ़ने देना चाहिए। कभी भी ये नही सोचना चाहिए कि हमने सब पा लिया है। हमे और अचीव करने के तरीके सोचने चाहिए। हमेशा जमीन से जुड़े रहना चाहिए।

आपने के.बी.सी के लिए कैसे तैयारी की थी? मेगास्टार अमिताभ बच्चन के सामने आपने अपनी नर्वसनेस कैसे कंट्रोल की? कंटेस्टेन्ट्स के लिए कुछ टिप्स.

मैं बहुत नर्वस थी और फास्टेट फिंगर फर्स्ट खेलते समय मेरे दिमाग मे यही चल रहा था कि मैं उन्हें देख सकूँ। जैसे ही अमिताभ सिर ने मुझसे हाथ मिलाया मैं नम्ब हो गयी। पर मुझे ध्यान रहा कि मैं यहां कितनी मुश्किलों से पहुँची हूँ मैं ये मौका जाने नही दे सकती। मैं हॉट सीट पर बैठते ही नर्वस हो गयी थी पर अमिताभ जी लोगों को कम्फ़र्टेबल करने की पूरी कोशिश करते हैं।

सीजन 10 के लिए एस. एम.एस से रेजिस्टर करना था पर अब तो कई प्लेटफॉर्म्स हैं जहां पर आप रजिस्टर कर सकते है। हां मैं ऑडिशन के लिए कोलकाता गयी थी पर अब तो ऑडिशन भी ऑनलाइन हैं। बस इतना याद रखें कि प्रश्न के उत्तर आप जल्दी और सही तरीके से दें। बाकी सब आप किस्मत पर छोड़ दें। सही उत्तर की कई हज़ार एंट्रीज रैंडमाईज़र के द्वारा सेलेक्ट होती हैं और आपका नाम भी उसमे आसकता है और शॉर्टलिस्ट होने के बाद अपना फोन अपने पास ही रखें।

मैंने खराब दिन भी देखें हैं जब वो मुझे बदल नही सके तो अच्छे दिन भी मुझे नही बदल सकते। मैं जैसी हूँ वैसे ही रहूंगी। यही मैं बच्चो को भी बताती हूँ। – बिनीता जैन

आप उन लड़कियों से क्या कहेंगी जिन्होंने अभी अभी जॉब की शुरुआत की है और उन्हें पैसों के मामले में इंडिपेंडेंट फैसले लेने की कितनी ज़्यादा ज़रूरत है। फाइनांशियल इंडिपेंडेंस महिलाओ के लिए कितनी ज़रूरी है?

महिलाओ के बढ़ते हुए सेल्फ कॉन्फिडेंस और सिक्योरिटी की वजह है फाइनांशियल इंडिपेंडेंस। आपको वो कॉन्फिडेंस और ग्रोथ तभी मिलेगी जब आप पुरुषों पर पैसे के लिए निर्भर ना रहें। आत्मनिर्भर या इंडिपेंडेन्ट बनें। जो बेहतरीन अनुभव आपको खुद एक करोड़पति बनने में होगा वो अनुभव किसी करोड़पति की बीवी बनने में नही होगा।

और आजकल की लड़कियां बहुत स्मार्ट हैं और अपने पैरों पर खड़े होना चाहती हैं। मेरी बेटी भी हमेशा से अपने पैसे कमाना चाहती थी और सच में जब से उसने कमाना शुरू करा है तबसे उसका कॉन्फिडेंस बढ़ गया है। और महिलाओ को हमेशा सेंसिबल फाइनैंशल डिसिशन लेने चाहिए, कई बार पैसों के लिए जॉब जॉइन करते हैं और उसमें सेटिसफैक्शन नही मिलती, या हम बहुत मेहनत कर रहे हैं पर हमें उतना रिवॉर्ड नही मिल रहा। इसलिए महिलाओं को इस बात का ध्यान रखना चाहिये।

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