सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि फ्रंटलाइन हेल्थकेयर वर्कर जैसे डॉक्टर और नर्स जो COVID-19 महामारी में अपनी भूमिका निभाई है , हम उनका आभार व्यक्त करें। कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र को उन्हें मुआवजा देने पर विचार करना चाहिए।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एलएन राव और न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट की बेंच ने कहा कि “वे (स्वास्थ्य कार्यकर्ता) इस मानवीय संकट के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनमें से कुछ ने अपनी जान भी गंवाई है। हमें लगता है कि हमें उनका आभार व्यक्त करना चाहिए । ” उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र को उनके मुआवजे पर गौर करना चाहिए क्योंकि वे भी बीमार पड़ रहे हैं।

बेंच ने यह कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों के अछि तरह से परिचित डॉक्टर COVID-19 के लिए पॉजिटिव होने के बाद अस्पताल में बिस्तर पाने के लिए संघर्ष कर रहा था। न्यायमूर्ति भट ने कहा कि वह किसी को दोषी नहीं ठहरा रहे हैं , लेकिन यह मानते थे कि स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए और अधिक किए जाने की जरूरत है।

बेंच ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र “एक टूटने के मुकाम पर पहुँच गया है ” और कहा कि अस्पताल हैं, कर्मचारियों की कमी है। बेंच ने कहा, “हमें यह देखने की जरूरत है कि डॉक्टर और नर्स जो COVID -19 से लड़ रहे हैं , उन्हें कैसे सुरक्षित रखा जाए।”

सुप्रीम कोर्ट – रिटायर्ड स्वास्थ्य कर्मियों को वापिस से एम्प्लॉय करना चाहिए

बेंच ने कहा कि जब अस्पताल के बिस्तरों की संख्या बड़ाई जा रही थी , तब भी स्वास्थ्य कर्मियों की कमी थी। बेरोजगार रिटायर्ड स्वास्थ्य पेशेवरों को वापिस से एम्प्लॉय करने का उन्होंने सुझाव दिया था। न्यायमूर्ति भट ने उल्लेख किया कि उन्होंने पढ़ा था कि लगभग 25,000 स्वास्थ्य कार्यकर्ता काम करने के इच्छुक हैं। भट ने कहा कि उनकी सेवाओं का उपयोग भारत सरकार द्वारा किया जाना चाहिए।

बेंच COVID-19 महामारी के दौरान आवश्यक सप्लाई और सेवाएं सुनिश्चित करने के मामले पर सुनवाई कर रही थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को बेंच द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया था कि फ्रंटलाइन हेल्थकेयर श्रमिकों को अधिक भुगतान किया जाता है और COVID-19 के खिलाफ उनकी सुरक्षा की जाती है।

तुषार मेहता ने कोर्ट से सहमति जताई और कहा कि उनके सराहनीय काम के लिए फ्रंटलाइन डॉक्टरों और नर्सों की सराहना की जानी चाहिए।

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