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कारगिल गर्ल गुंजन सक्सेना के बारे में 10 बातें जो आपको पता होनी चाहिए

Published by
Katyayani Joshi

1999 कारगिल युध्द में जब नार्थ कश्मीर में पाकिस्तान जो दिख रहा था उसपर गोलियां बरसा रहा था तब हमारी बहादुर लड़कियां गुंजन सक्सेना और श्रीविद्या राजन ने उस क्षेत्र में घुसने की हिम्मत दिखाई और घायल अफसरों को बचाया। आइये जानें द कारगिल गर्ल गुंजन सक्सेना के बारे में 10 बातें जो आपको पता होनी चाहिए

लखनऊ की गुंजन सक्सेना

गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल आर्मी बैकग्राउंड से आती हैं। उनके पिता और भाई इंडियन आर्मी में कार्यरत थे। जब गुंजन ने आर्मी में जाने का फैसला किया तो ये ज़्यादा हैरानी वाली बात नहीं थी।

पहले ट्रेनी पायलट्स बैच में हुई शामिल

गुंजन ने अपना ग्रेजुएशन दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से किया। 1994 में मिस सक्सेना 25 लड़कियों के पहले आई.ऐ. एफ(Indian Air Force) ट्रेनी पायलट्स बैच में शामिल हुई।

वीमेन फाइटर स्क्वाड्रन की पायनियर

2016 में भले ही वीमेन पायलट्स को फाइटर स्क्वाड्रन में भर्ती करना शुरू किया गया पर गुंजन सक्सेना और श्रीविद्या राजन को 1999 में ही ये मौका मिल गया था।

मेडिकल evacuation का ज़िम्मा

कारगिल युद्ध में फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना और श्रीविद्या राजन से पहले कभी ना उड़ाए हुए चीता हेलीकॉप्टर उड़ाने को कहा गया। उन्हें मेडिकल evacuation यानी घायल सिपाहियों को मेडिकल बेस तक पहुंचाने और पाकिस्तानी वॉर पोज़िशन्स को ऑब्ज़र्व करने का ज़िम्मा मिला था।

मौत से किया सामना

गुंजन सक्सेना के चॉपर पर गोली लगते लगते बची थी जब वो अपना हेलीकॉप्टर कारगिल एयरस्ट्रिप पर उतार रहीं थीं।

बता दें कि चीता हेलीकॉप्टर बहुत छोटा, अनआर्म्ड (मतलब बिन हथियार) और डिफेंसलेस(बचने के लिए उसमें कोई सुविधा नहीं होती) होता है तब भी डेंजर ज़ोन में जाकर गुंजन सक्सेना और श्रीविद्या राजन ने सिपाहियों को बचाया।

तैयारी थी पूरी

द कारगिल गर्ल के पास एक लोडेड INSAS assault rifle और एक रिवाल्वर थी।अगर उनका प्लेन पाकिस्तानी बेस के पास क्रैश होता तो वो इन राइफल्स से ही लड़तीं।

छोटा पर बड़ा करियर

महिलाओं के पास आर्मी में अवसरों की कमी की वजह से गुंजन का चॉपर पायलट के तौर पर टेन्योर 7 साल में ही खत्म हो गया।

शौर्य चक्र से सम्मानित

गुंजन सक्सेना को शौर्य चक्र से नवाजा गया, वो अवार्ड जो बिना दुश्मन से डायरेक्टली लड़े, वीरता और आत्म बलिदान (self sacrifice ) का प्रदर्शन करने वालो को दिया जाता है। वह पहली महिला थी जिन्हें ये अवार्ड दिया गया है।

महिलाओं के लिए बनाया रास्ता

द कारगिल गर्ल को भले ही फाइटर जेट्स उड़ाने का मौका ना मिला हो पर उन्होंने उन महिलाओं के लिए रास्ता खोला जो पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर देश की सेवा करना चाहतीं हैं।

उनके जीवन पर फिल्म

फ्लाइट लेफ्टिनेंट गुंजन सक्सेना की रियल लाइफ की कहानी पर आधारित फिल्म “गुंजन सक्सेना- द कारगिल गर्ल” नेटफ्लिक्स पर 12 अगस्त, 2020 को प्रीमियर होगी। जाह्नवी कपूर इस बायोपिक में मुख्य भूमिका निभा रही हैं। यह फिल्म पहले 2 अप्रैल को सिनेमा में रिलीज़ होने वाली थी।

फिल्म के प्रोड्यूसर करण जौहर ने कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में कहा था, “‘गुंजन सक्सेना’ एक ऐसी महिला की सच्ची कहानी पर आधारित आधारित है, जिसने आने वाले सालों में कई लोगों को अपूर्व साहस और प्रेरणा दी। हम आपके दिल और दुनिया भर के लाखों लोगों के साथ इस निडर महिला की कहानी को साझा करने के लिए उत्साहित हैं।”

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