वैक्सीनेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा आपके शरीर में एक जीवाणु (जर्म) को डाला जाता है, ताकि आपका शरीर इसके विरुद्ध रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा सकें। ताकि बाद में जब कोई वायरस या बैक्टीरिया हमारे शरीर में घुसने की कोशिश करें, तो हमारा शरीर उससे लड़ने के लिए तैयार हो और उसे कोई जानलेवा खतरा ना हो।

वैक्सीन किसी इंफेक्शन या वायरस को हमारे शरीर में घुसने से नहीं रोक सकता। लेकिन उसका काम ही है, हमारी इम्यूनिटी को बहुत मजबूत करना। रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने से हमारा शरीर उस वायरस या इंफेक्शन से लड़ने में सक्षम हो जाता है और शरीर को कम से कम क्षति पहुंचती है।

प्री-प्रेगनेंसी / प्रेगनेंसी से पहले लगाए जाने वाले वैक्सीन

1. MMR – यदि किसी भी महिला ने अपने बचपन में या किशोरावस्था में इस वैक्सीन को नहीं लगाया है, तो अब लगवाएं। यह तब भी लगाया जाता है, जब महिला का ब्लड रिजल्ट यह बताएं कि रूबेला के खिलाफ उसका इम्युनिटी लेवल पर्याप्त/काफी नहीं है। इस प्री-कंसेप्शनल रूबेला वैक्सीन को लगाने के बाद और महिला को प्रेग्नेंट होने से पहले पूरे 1 महीने का अंतराल होना चाहिए।

2. HPV – आईडियली, एक महिला के प्रेग्नेंट होने से पहले HPV के तीनो डोज लग जाने चाहिए। यदि कोई महिला इसके 1 या 2 डोज लगने के बाद प्रेग्नेंट हो जाती है, तो बचे हुए डोज बच्चे के जन्म तक नहीं लगाने चाहिए। उसके बाद भी अपने गाइनेकोलॉजिस्ट से पूछ कर लगाएं।

3. चिकन पॉक्स या चेचक – यह एक ऐसा इंफेक्शन है जो प्रेग्नेंट महिला से ज्यादा उसके अजन्मे शिशु को नुकसान पहुंचा सकता है। तू प्रेगनेंसी से पहले अपनी इम्यूनिटी लेवल की अच्छे से जांच करवाएं और यदि वह कम है तो इस वैक्सीन को लगवाएं।

प्रेगनेंसी के दौरान लगाए जाने वाले वैक्सीन

1. टिटनेस टॉक्सॉइड – आदर्श रूप से एक महिला को इसके दो ही डोज की जरूरत होती है। यदि एक पूरा इम्यूनाइज्ड डोज लगाने के बाद 5 साल के अंदर यदि महिला प्रेग्नेंट होती है, तो टिटनेस के एक ही डोज की आवश्यकता है।

2. TDAP – यह वैक्सीन टिटनेस / डिप्थीरिया और वूपिंग कफ के विरुद्ध एक महिला को 29 से 36 हफ्तों के बीच में लगाई जानी चाहिए। इससे नवजात शिशु को पहले छह हफ्तों में इन सभी इंफेक्शन से सुरक्षा मिलेगी और इसके बाद शिशु को यह वैक्सीन लगती है। हर प्रेगनेंसी के दौरान TDAP का वैक्सीन लगवाना आवश्यक है, भले ही आपने इसे पहले प्रेगनेंसी में क्यों न लगवा लिया हो।

3. फ्लू वैक्सीनेशन – यह वैक्सीन इन्फ्लूएंजा A और B (इनएक्टिवेटेड) के विरुद्ध प्रेग्नेंट महिला को लगाई जाती है। प्रेग्नेंट होने के 26 हफ्तों के बाद इस वैक्सीन को लगाया जाता है, ताकि नवजात शिशु के वैक्सीन लगने तक दोनों मां और शिशु सुरक्षित रहें।

2009 H1N1 महामारी के दौरान प्रेग्नेंट महिलाओं में इन्फ्लूएंजा से संबंधित कॉम्प्लिकेशंस अधिक पाई गई। इसके परिणाम स्वरूप प्रेगनेंसी को हाई रिस्क ग्रुप के अंदर पहचाना गया और इस ग्रुप में वैक्सीन लगवाने की अनुशंसा दी गई। एक शोध के अनुसार, जिन महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान इन्फ्लूएंजा वैक्सीन लग जाती है, उनके शिशु में 6 महीनों तक इन्फ्लूएंजा इलनेस 63% घटी है।

(फेडरेशन ऑफ आब्स्टिट्रिशन एंड गायनेकोलॉजिस्ट ऑफ इंडिया FOGSI द्वारा अनुशंसा)

लाइव वैक्सीन जैसे MMR, वैरिसेला, BCG, HPV आदि प्रेगनेंसी के दौरान नहीं लगानी चाहिए। लेकिन एक मां की जान बचाने के लिए, पोस्ट एक्स्पोज़र वैक्सीन लगाई जा सकती है, भले ही वह लाइव वैक्सीन क्यों ना हो। जैसे कि रेबीज या स्मॉल पॉक्स वैक्सीन।

शिशु के जन्म के बाद की वैक्सीन महिलाओं के लिए

1. सबसे पहले सभी पेंडिंग या बची हुई वैक्सीन लगवाएं।

2. इन्फ्लूएंजा वैक्सीन (इनएक्टिवेटेड वैरायटी) लगाई जानी चाहिए क्योंकि शिशु के जन्म के बाद एक मां की इम्यूनिटी बहुत कम होती है।

3. FOGSI ने कोकूनिंग रिकमेंड करी है जो कि TDAP द्वारा इम्यूनाइजेशन है उन सभी के लिए जो 12 महीनों से कम के शिशु की देखभाल करते है और जिन्होंने पहले TDAP का डोज नहीं लगवाया है।

**उपर्युक्त सभी जानकारी डॉक्टर सुदेशना रे द्वारा दी गई है। वे एक सीनियर गयनेकोलॉजिस्ट है।

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