Child Sexual Abuse: बच्चों को सेक्सुअल एब्यूज से बचाने के 5 तरीके

Child Sexual Abuse: बच्चों को सेक्सुअल एब्यूज से बचाने के 5 तरीके Child Sexual Abuse: बच्चों को सेक्सुअल एब्यूज से बचाने के 5 तरीके

Apurva Dubey

12 Sep 2022

सेक्सुअल एब्यूज किसी भी जाति, सामाजिक आर्थिक समूह, धर्म या संस्कृति के बच्चों के साथ हो सकता है। अपने बच्चे को सेक्सुअल एब्यूज का शिकार होने से बचाने के लिए उसे तैयार करना और शिक्षित करना बेहद जरूरी है।

Child Sexual Abuse: बच्चों से सेक्सुअल एब्यूज के बारे में बातचीत करना बेहद जरूरी

हम अपने छोटे बच्चों के लिए कई तरह के सुरक्षा सबक प्रदान करते हैं। हालांकि, शरीर की सुरक्षा आमतौर पर बहुत बाद की उम्र तक तब तक नहीं सिखाई जाती जब तक कि बहुत देर न हो जाए। सीडीसी) द्वारा किए गए शोध का अनुमान है कि लगभग 6 में से 1 लड़के और 4 में से 1 लड़की का 18 वर्ष की आयु से पहले यौन शोषण किया जाता है। 

इंटरपोल के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 2017-20 के बीच तीन साल की अवधि के दौरान ऑनलाइन बाल यौन शोषण के 24 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत पीड़ित 14 साल से कम उम्र की लड़कियां हैं। अपने बच्चों को शिकार होने से बचाने के लिए उन्हें तैयार करना और सेक्सुअल एब्यूज के बारे में बातचीत करना बेहद जरूरी है।

Child Sexual Abuse: बच्चों को सेक्सुअल एब्यूज से बचाने के 5 तरीक

1. बच्चों से बात करें 

सेक्सुअल एब्यूज अक्सर उन बच्चों का होता है जो किसी डर से चुप रह जाते हैं या उन्हें अपने माता-पिता से बातें छुपाने की आदत हो। ऐसे में बच्चों से बात करें। उनके दिन भर की दिनचर्या पर डिस्कशन करें और उनसे अपने रिश्ते को और भी अधिक बढ़ाएं। जितना आप अपने बच्चे के दोस्त बनेंगे उतना ही वह आपसे अपनी बातों को खुल कर शेयर करेगा। इसीलिए कोशिश करें कि अपने बच्चो से खुल कर बात करें। 

2. अचानक से अपने बच्चे को देखने पहुंचे 

आम तौर पर बच्चों में सेक्सुअल एब्यूज के किस्से स्कूल, कोचिंग या टूशन में सुनने को मिलते हैं। एक पैरेंट होने के नाते आपको अपने बच्चे के भविष्य के साथ साथ उसकी सुरक्षा की भी जिम्मेदारी होती है। इसीलिए स्कूल और वह के टीचर्स के बारें में चेकिंग कर ले। कभी कभी अपने बच्चे के टूशन क्लास में अचानक ही आ पहुंचे। इससे किसी भी खतरे के होने का अंदेशा कम हो जाता है। हमेशा अपने बच्चे पर नज़र रखें और देखे की कही वह किसी समस्या में तो नहीं। 

3. निगरानी है जरुरी 

सुपरवाईस करना है जरुरी, ऐसे में बच्चे को खेलते समय या किसी के घर पर ड्राप करने के समय हमेशा उस अवस्था की जांच जरूर कर ले। इसके साथ ही आपके बच्चे से जुड़े हर व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी रखना भी अनिवार्य है। यह जान कर लें कि जिन लोगों के इर्द-गिर्द आपका बच्चा रह रहा है उनका बैकग्राउंड किस किस्म का है।  

4. बड़ों से बॉडी सेफ्टी रूल का पालन करने को कहें 

क्या आपकी बहन आपके बच्चों से किस की मांग करती है? क्या आपकी दाई आपके बच्चों को गुदगुदाती है जब वे नहीं चाहते हैं? क्या आपके बच्चे के स्कूल/डेकेयर में बाल यौन शोषण (सीएसए) रोकथाम तंत्र मौजूद हैं? यह उम्मीद करना बिल्कुल उचित है कि जिन लोगों और संस्थानों पर हम अपने बच्चों पर भरोसा करते हैं, उन्हें शिक्षित किया जाता है कि उन्हें कैसे सुरक्षित रखा जाए। यह जरुरी है कि आपके साथ-साथ आपके आस पास जो बड़े लोग हैं, जो व्यस्क है वह भी आपके बच्चे के साथ बॉडी सेफ्टी रूल को फॉलो करें। 

5. बच्चों को सिखाएं बॉडी सेफ्टी रूल 

याद रखें कि किसी से भी उम्मीद करने से बेहतर है कि आप अपने बच्चे को इतना काबिल बनाये कि वह हर चीज की बेहतर परख कर सके। मन की बच्चों को डराया धमकाया जा सकता है लेकिन उनको हमेशा अपने शरीर से जुडी सभी बातों को स्पष्ट रूप से समझाएं। उनको बताये कि वह किसी भी ऐसी छुवन को मन करने का पूरा हक़ रखते हैं जो उनको पसंद नहीं हो। बार बार किसी का गुदगुदी करना या छोटा बच्चा जान कर किस माँगना गलत है और अगर आपके बच्चे को सही और गलत बॉडी टच कि समझ पैदा हो जाये तो यह आपके लिए और भी अच्छी बात होगी। 

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