प्रेगनेंसी एक खूबसूरत साथ ही नाजुक पल है। इस समय सावधानी बरतना बहुत जरूरी होता है। अगर ध्यान ना रखा जाएं तो प्रेगनेंसी में मां और बच्चे को कई तरह की परेशानियों से गुजरना पड़ सकता है। उनमें से एक है प्लेसेंटा एब्रप्शन, इस समस्या से बचने के लिए हमें इसके बारे में और कारण जानना जरूरी है। जानिए प्लेसेंटा एब्रप्शन क्या है।

प्लेसेंटा एब्रप्शन क्या है ?

प्लेसेंटा एक अंग है जो प्रेगनेंसी के वक्त बच्चे को पोषण और ऑक्सीजन प्रदान करता है। यह यूट्रस के ऊपरी हिस्से में इंप्लांट होती है और डिलीवरी के वक्त इससे यूटराइन वॉल से अलग कर दिया जाता है।

लेकिन प्लेसेंटा एब्रप्शन के स्थिति में प्लेसेंटा जल्दी कट जाता है। इसके कारण बच्चे को पोषण और ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंच पाता है। इसके अलावा ब्लीडिंग भी हो सकता है जो मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक है।

प्लेसेंटा एब्रप्शन के लक्षण क्या है ?

प्लेसेंटा एब्रप्शन का सबसे प्रमुख लक्षण है वेजाइनल ब्लीडिंग होना। हालांकि इसमें कई महिलाओं को ब्लीडिंग नहीं भी होता है, क्योंकि प्लेसेंटा के पीछे खून रुक जाता है। इसके अलावा अन्य लक्षणों में असहजता महसूस होना, अचानक पेट को छूने से दर्द होना, कमर में दर्द होना और शिशु की हार्ट रेट में भी दिक्कत हो सकता है।

अगर आप ऐसे ही किसी परेशानी का सामना कर रही है तो इसे नजरअंदाज ना करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श करें। अगर आप तीसरी तिमाही में वेजाइनल ब्लीडिंग अनुभव करती है तो खास तौर पर डॉक्टर के पास जाएं।

प्लेसेंटा एब्रप्शन के कारण

  • 35 साल की उम्र के बाद प्रेग्नेंट होने के कारण यह हो सकता है।
  • एक से ज्यादा बच्चे के साथ प्रेग्नेंट होना यानी की ट्विंस होना
  • किसी ट्रौमतिक इंजरी के कारण जैसे कि कार एक्सीडेंट, गिर जाना, शारीरिक शोषण और आदि
  • लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर होना या पहले भी प्लेसेंटा एब्रप्शन हुआ हो।
  • प्रेगनेंसी से जुड़ी परेशानियां होना जैसे कि यूटीआई इनफेक्शन(uterine infection), अंबिलिकल कॉर्ड प्रॉब्लम्स(umbilical cord problems)
  • युटेरस के आसपास शिशु को सुरक्षा देने वाली amniotic fluid का नष्ट हो जाना।
  • धूम्रपान करना है या ड्रग्स का सेवन करने से भी ऐसा हो सकता है।
Email us at connect@shethepeople.tv