पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या होता है ? जानें इससे जुड़ी 5 बातें

Published by
Harshita Pandey

एक माँ जब अपने बच्चे को जन्म देती है, तो निसंदेह ही उसके लिए वह एहसास बेहतरीन होता है। मगर बच्चे के जन्म के बाद माँ के अंदर कई तरह के बदलाव भी आते हैं। यह बदलाव इमोशंस में आता है, शरीर में आता है और मानसिक तौर पर भी आता है। और इन सभी बदलावो के कारण नई बनी माँ खुद को पुराना जैसा नहीं पाती है, जिसके कारण वो परेशान हो जाती है। यह परेशानी ज्यादा बढ़ने पर इसे ही पोस्टपार्टम डिप्रेशन (Postpartum Depression) कहा जाता है। postpartum depression in hindi 

यह डिप्रेशन दो प्रकार का होता है – एक जो जल्दी समाप्त हो जाता है और दूसरा जो देर तक रहता  है। जल्दी समाप्त होने वाले को प्रारंभिक अवसाद या बेबी ब्लूज भी कहा जाता है। यह बहुत गंभीर नहीं होता है। यह अवसाद लगभग 80 प्रतिशत नई बनी माँ को होता है। यह प्रसव के बाद शुरू होता है और बिना किसी इलाज के कुछ-ही हफ्तों में ठीक भी हो जाता है। अवसाद का जो दूसरा प्रकार है वो है देर तक रहने वाला। इस अवसाद को ही अधिकतर डॉक्टर पोस्टपार्टम डिप्रेशन मानते हैं। यह काफी गंभीर होता है। यह अवसाद प्रसव के बाद कई हफ्तों से लेकर एक साल तक भी रह सकता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो यह अवसाद 10-16 प्रतिशत महिलाओं को ही होता है।

पोस्टपार्टम डिप्रेशन से जुड़ी 5 बातें

1. पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बचने के लिए डिलिवरी के बाद नई बनी माँ को अपना ठीक से ध्यान रखना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि जब भी संभव हो सोएं या आराम करें। इसके साथ ही सेहतमंद खाना खाएं। ज्यादा देर तक भूखी न रहें। समय निकालकर कुछ व्यायाम करें। और जिस चीज़ को करने से खुशी मिले, वह काम करें।

2. पोस्टपार्टम डिप्रेशन पर यदि ठीक समय पर ध्यान दिया जाए और उचित परामर्श लिया जाए, तो ये जल्दी ठीक हो जाता है। यदि 2-3 हफ्ते में ये ठीक नहीं होता तो मनोचिकित्सक की सलाह जरूर  लें।

3. आंकड़ों के अनुसार करीब 20 प्रतिशत महिलाओं में पोस्टपार्टम डिप्रेशन 2 हफ्ते से अधिक तक रहता है और उन्हें इलाज की जरूरत पड़ती है। 80 प्रतिशत महिलाओं में यह थोड़ा ध्यान देने पर खुद ही ठीक हो जाता है।

4. पोस्टपार्टम डिप्रेशन का इलाज संभव है। आमतौर पर थेरेपी और कुछ मामलों में दवाओं से इसका ट्रीटमेंट आसानी से हो जाता है। डॉक्टर की सलाह पर यह तरीके बेहद कारगर होते हैं।

5. पोस्टपार्टम डिप्रेशन की प्रॉब्लम अगर ज्यादा सीरियस हो जाए तो यह Postpartum Psychosis का रूप ले सकता है। इसके लक्षण बच्चे के पैदा होने के दो हफ्ते बाद नजर आ सकते हैं। आपको इससे सावधान रहने की जरूरत है क्योंकि इसके लक्षण पोस्टपार्टम डिप्रेशन से कहीं ज्यादा गंभीर होते हैं मसलन स्पष्ट सोचने में भी दिक्कत महसूस होने लगती है।

ध्यान रहें कि अगर आपको डिलिवरी के बाद डिप्रेशन की शिकायत हो, तो तुरंत अपने डॉक्टर की सलाह लें। postpartum depression in hindi

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