भारत में स्टार्ट-अप्स एक अलग ही रफ़्तार पकड़े हुए हैं। जहाँ एक तरफ स्टार्ट-अप कल्चर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर कम्पटीशन भी तेज़ है। ऐसे में, जब हज़ारों स्टार्ट-अप्स फंड्स पाने के लिए लड़ रहें हों, तो अपने स्टार्ट-अप के लिए फंड्स जुटाना एक मुश्किल भरा काम हो सकता है।
हमारे पास ऐसी 10 टिप्स हैं जिनसे आप भारत में अपने स्टार्ट-अप्स की फंडिंग बढ़ा सकते हैं:

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1. बूटस्ट्रैपिंग

बूटस्ट्रैपिंग यानी की बिना किसी बाहरी मदद के बिज़नेस शुरू करना। आप परिवार या दोस्तों से मदद ले सकते हैं, और पैसे बचाने के लिए अपने खर्चे कम कर सकते हैं।

2. एंजेल इन्वेस्टमेंट

एंजेल इन्वेस्टर्स ऐसे सफल एंट्रेप्रेन्योर्स होते हैं जिनका बिज़नेस सफल है लेकिन वह इक्विटी के बदले नए स्टार्टअप्स में इन्वेस्ट करना चाहते हैं। चाहे फेसबुक हो, ट्विटर हो या गूगल हो – इन सभी के पास एंजेल इन्वेस्टर्स थे।

3. क्राउडफंडिंग

क्राउडफंडिंग यानी की एक ही बार में काफी लोगों से फंड्स लेना, ज़्यादातर सोशल मीडिया की मदद से। ऐसी कई कंपनियां हैं जो क्राउडफंडिंग करवाती हैं, जैसे की – फण्डेबल, इंडीगोगो व किकस्टार्टर।

4. अक्सेलरेटर्स

एक तय अवधि के लिए समूह के हिसाब से शिक्षा व डेमो दिया जाता है। थोड़ी सी इक्विटी के बदले स्टार्टअप्स को थोड़ी-सी इन्वेस्टमेंट व मेंटोरशिप दी जाती है।

5. इन्क्यूबेटर्स

इससे स्टार्टअप्स को काम करने के लिए जगह, सामान, पैसे व गाइडेंस मिलती है। माइक्रोसॉफ्ट वेंचर्स, स्टार्टअप विलेज व आईएएन इन्क्यूबेटर्स कुछ फेमस उदाहरण हैं।

6. स्टार्टअप कम्पीटीशन्स

ऐसे कई कम्पीटीशन्स होते हैं, जिसमे पैसे कम मिलते हैं लेकिन आपकी कंपनी फेमस हो जाती है। यही नहीं, इससे और भी कई बेनिफिट्स मिलते हैं।

7. वेंचर कैपिटल्स

वेंचर कैपिटलिस्ट्स वह होते हैं जो एक शुरूआती बिज़नेस में उसका पोटेंशिअल देखते हुए इन्वेस्ट करते हैं। पहले वह इसके चलते इक्विटी के हकदार हुआ करते थे, लेकिन अब, वह डेब्ट व इक्विटी दोनों मांगते हैं।

8. एनबीएफसीस से लोन

ऐसी काफ़ी नॉन-बैंकिंग फिनांशियल इंस्टीट्यूशन्स हैं जो स्टार्टअप्स को लोन देती हैं। ऐसी कई मिक्रोफिनांस कंपनियां व ऑनलाइन मार्केट्स भी हैं जो उन स्टार्टअप्स को लोन देती हैं जो बैंक से लोन नहीं या आसपास कोई ऐसी सुविधा नहीं होती, जैसे की लेनडिंग्कार्ट, निओग्रोथ क्रेडिट प्राइवेट लिमिटेड, व कैपिटल फ्लोट।

9. सरकारी स्टार्टअप फण्ड

प्रधान मंत्री मोदी ने स्टार्टअप इंडिया कैंपेन शुरू की है जहाँ वे उभरते हुए एंट्रेप्रेन्योर्स को उनके स्टार्टअप्स के लिए मदद करते हैं। इंडिया एस्पिरशन फण्ड (आईएएफ) में सरकार डायरेक्टली स्टार्टअप्स में इन्वेस्ट करने की जगह आगे अलग-अलग वीसी में इन्वेस्ट करेगी, जो आगे एमएसएमई में इन्वेस्ट करेंगे। एसआईडीबीआई मेक इन इंडिया लोन (स्माइल) मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत 25 सेक्टरों पर फोकस करता है। स्माइल क्वासि-इक्विटी व कम अवधि वाले लोन दे सकते हैं। माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी (मुद्रा बैंक) – 2015-16 के यूनियन बजट में 20,000 करोड़ रुपये स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए दिए गए थे।

10. कनवर्टिबल डिबेंचर्स

वाय कबिनटोर स्टार्टअप्स के साथ कनवर्टिबल डिबेंचर्स की सफलता ने उसे काफी पॉपुलर बना दिया है। इन्वेस्टर के द्वारा दिए गए एक कनवर्टिबल नोट से ये डेब्ट भविष्य में कुछ समय में इक्विटी में बदल जाता है।

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