महिलाओं और फाइनेंस से रिलेटेड ऐसे कई मिथ्स हैं जिन्होंने बहुत समय से सोसाइटी को जकड़ा हुआ है। तो आज हम उन्ही के बारे में बाते करेंगे और बताएंगे की सच क्या है

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1 . महिलाओं को अपना फाइनेंस हैंडल करने के लिए अपने पिता पति भाई या बेटे की जरूरत है

नहीं ऐसा बिलकुल भी नहीं है, बल्कि हम अपने आसपास ऐसी कितनी ही महिलाओं को जानते हैं जो पैसे कमाने के साथ-साथ घर संभालती हैं, बच्चों की पढ़ाई के लिए सेव करती हैं, यहाँ तक की फैमिली की फाइनेंशियल एमरजैंसी के लिए भी प्रिपेयर्ड रहती है।

2 . महिलाएं पैसे सेव नहीं करती हैं

ऐसा बिलकुल भी नहीं है, पूरी फैमिली में सबसे ज़्यादा पैसे महिलाएं ही सेव करती हैं । वो कोई भी बड़ी खरीदारी करने से पहले कई बार सोचती हैं। किसी भी इमरजेंसी के लिए सबसे पहले महिलाएं ही आगे आती हैं।

3 . महिलाएं बिग रिस्क टेकर्स नहीं होती हैं

यह कहना बिल्कुल गलत है, क्या शादी के बाद अपना घर छोड़कर एक नए घर में एक नए परिवार में जाना रिस्क नहीं है ? जरूरत पड़ने पर एक महिला अपनी सारी सेविंग फैमिली इमरजेंसी के लिए दे देती है। बल्कि आजकल ऐसी बहुत ही महिलाएं हैं जो अपने पैसों से अपना घर खरीद रही है, स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट कर रही हैं और अपने माता-पिता की ज़रूरतों का भी ध्यान खुद रख रही हैं ।

4 . फाइनेंस समझने के लिए आपको एक प्रॉपर कोर्स करने की जरूरत है

ऐसा कुछ नहीं है, आप अपने फ्रेंड सर्कल से इन्वेस्टमेंट की टिप्स ले सकते हैं। बल्कि ऐसी बहुत से अख़बार, मैगजींस और वेबसाइट्स हैं जहां इन्वेस्टमेंट के बारे में सही जानकारी दी जाती है, आपको बस अपने दिन में से थोड़ा सा समय निकालना है और उन्हें पढ़ना है। आप एक फाइनेंसियल एडवाइजर भी रख सकते हैं जो समय-समय पर आपको फाइनेंसियल एडवाइस देगा और आपकी फाइनेंसियल प्लानिंग में मदद करेगा ।

5 . महिलाओं को फाइनैंशल प्लानिंग की जरूरत ही नहीं है

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन की एक रिपोर्ट के अनुसार महिलाएं पुरुषों के मुताबिक ज्यादा लंबे समय तक जीवित रहती हैं इसलिए महिलाओं के लिए और भी ज्यादा जरूरी है कि वह फाइनेंसियल प्लानिंग करें ताकि उन्हें बाद में किसी पर डिपेंडेंट ना रहना पड़े ।

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