दिल्ली के द ललित होटल में 12 फरवरी को वीमेन’स राइटर फेस्ट आयोजित किया गया । इस फेस्ट में बहुत सारे अनोखे पेनल्स पर मशहूर ऑथर्स ने अपने विचार प्रस्तुत किये । दिल्ली राइटर’स फेस्ट मे सबसे अनोखा पैनल था चौथा पैनल जिसे टाइटल दिया गया था ‘उड़ान के बिंदु’ । इस  पैनल में डॉ अनामिका, जयंती रंगनाथन, गीताश्री और अणुशक्ति सिंह ने अपने -अपने विचार प्रस्तुत किये । इस पैनल की मॉडरेटर थी अदिति माहेश्वरी गोयल ।

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हिंदी साहित्य में महिलाओं का इतिहास

हिंदी साहित्य की शुरुआत पर सभी महिलाओं ने अपने विचार बखूबी पेश किये । शुरुआत हुई डॉ अनामिका के विचारों से हिंदी साहित्य पर । डॉ अनामिका ने बताया की इतिहास की अगर बात की जाए तो महिलाओं का किताबे पढ़ना इतिहास से ही मुश्किल रहा है । पहले किताबों तक महिलाओं का पहुँचना बिलकुल भी आसान नहीं नहीं था । उस समय किताबोँ की हालत इस तरह थी जैसे पहले महिलाएं मेला घूमने जाती थी उसी तरह किताबे भी मोबाइल वैन्स में सवार होकर रीडर्स तक पहुँचती थी । महिलाएं भी किताबे पढ़ने के लिए बहुत उत्सुक होती थी । किताबे पढ़ने के लिए सभी महिलाएं जल्दी से जल्दी अपने घर का काम ख़त्म करके मोबाइल वैन्स तक पहुंचती थी ।

डॉ अनामिका ने बताया की कैसे यूपी और बिहार की महिलाओं ने किताबों तक पहुँचाने के लिए एक लम्बा सफर तय किया हैं ।अनामिका एक बहुत ही मशहूर लेखक है जिन्होंने अपनी रचनाओं से हिंदी साहित्य में बहुत योगदान दिया है ।

जयंती रंगनाथन जो की हिन्दुस्तान मीडिया लिमिटेड में सीनियर एडिटर हैं उन्होंने बताया की वो तमिल नाडु के स्माल टाउन भिलाई में पली बड़ी हैं और उनकी रूचि बचपन से ही किताबों में थी । उन्हें बचपन में बहुत सारे कम्प्लेक्सेस थे । उनका कहना है की लेखिका शिवानी ने उनकी लाइफ को बहुत इन्फ्लुएंस किया है ।उन्होंने शिवानी की कृष्णकली का भी मेंशन किया । उन्होंने बताया की शिवानी की रचनाओं के कारण ही वह बैंकिंग की नौकरी छोड़कर बॉम्बे गई ।

संघर्ष रहा है शुरुआत से कायम

गीताश्री जो की हिंदी की मशहूर लेखिका हैं और उन्हें रामनाथ गोयनका पुरुस्कार से भी सम्मानित किया गया है । गीताश्री का कहना था की इतिहास में सबसे ज़्यादा अन्याय स्त्रियों के साथ हुआ है । गीताश्री वैशाली से है जहाँ उन्हें लिछमी कुमारी से सम्बोधित किया गया। वैशाली में ब्रिजहि संघ में आठ कुल होते थे । जिनमे से एक था सामंत परिवार जिनकी बेटियों को लिछमी कुमारी से सम्बोधित किया जाता था। लिछमी कुमारी होने के साथ -साथ उन्हें खुद पर गर्व करना सिखाया गया । उनके पास कुल था, आम के जंगल थे । वो बुद्ध के समय से आम्रपाली की कहानी सुनाती हैं ।

अणुशक्ति सिंह, हिंदी साहित्य की एक मशहूर हस्ती हैं जिन्होंने अपने विचार रखे उड़ान के बिंदु पर । उनका कहना था की बहुत सारे बिंदु मिलकर एक रेखा बनाते हैं । उन्होंने बहुत सारे लेखकों को पढ़ा है, जैसे की -जेन ऑस्टेन, टॉलस्टॉय और भी अनेकों । वो कहती हैं की उन्होंने गीताश्री की मलाई भी पढ़ी जो कहानी है एक लड़की की जिसे मलाई खाना बहुत पसंद होता है और उसकी माँ दूध की ताज़ी मलाई निकालकर सिर्फ अपने बेटे को मलाई निकालकर देती हैं । वो लड़की अपनी कमाई से बाजार से ताज़ी मलाई लेकर आती है और सबके सामने बैठकर खाती है । तो उनका कहना है की लड़कियों ने शुरुआत से ही संघर्ष किया है और बहुत कुछ सहा है ।

इस बार यह पहली बार है जब इसी फेस्ट में हिंदी पैनल को शामिल किया गया है । हिंदी पैनल बहुत ही दमदार रहा और इस पैनल में सारे स्पीकर्स ने अपने विचार बहुत ही ख़ास तरीके से सबके सामने रखे ।

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