घर की ज़िम्मेदारियाँ औरतों की जॉब में बन रहीं है बाधा

घर की ज़िम्मेदारियाँ औरतों की जॉब में बन रहीं है बाधा घर की ज़िम्मेदारियाँ औरतों की जॉब में बन रहीं है बाधा

Swati Bundela

16 Sep 2022

ऑक्सफैम इंडिया की रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि लेबर फ़ोर्स में  लड़कियों की कम भागीदारी की वजह लैंगिक असमानता हैं।लड़कों के सामान्य पढ़ाई करने के बावजूद भी काम में उनके साथ भेदभाव किया जाता है।

घर से शुरू होतीं लैंगिक असमानता

लैंगिक असमानता लड़कियां अपने घर से देखती आती हैं। बचपन में घर में दादी या माता- पिता अक्सर कह देते हैं कि लड़की हो यह मत करो,वहाँ मत जाओ। तुम इतना क्यों खा रही हों, इतना पढ़ कर क्या करोगी? होनी तों तुम्हारी शादी हाई है।घर का काम करो वहीं आगे जाकर काम आएगा।

लड़कियों को तो घर का काम आना चाहिए!

हमारे समाज में औरत जितनी मर्ज़ी पढ़ी लिखी हों पर घर का काम उसे करना ही है।चाहे वो जॉब भी कर रही फिर भी उसे सुबह घर का काम और शाम को ऑफ़िस से आने के बाद

ऑक्सफैम की रिपोर्ट क्या कहती है?

रिपोर्ट के अनुसार, “भारत में औरतों की क्वालिफ़िकेशन और वर्क इक्स्पिरीयन्स पुरुषों के समान्य होने के बावजूद भी इनके साथ भेदभाव होता है।

बहुत सी योग्य महिलाएँ सिर्फ़ घर की ज़िम्मेदारियों और काम के कारण लेबर फ़ोर्स में शामिल होने में असमर्थ हैं। इसके साथ ही जो महिलाएँ काम भी कर रही हैं उनकी सफलता में और आगे बढ़ने में घर के बाधा बनते हैं।

रिपोर्ट में यह क्या गया है, “सभी महिलाओं के साथ  उनकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना भेदभाव किया जाता हैं। सिर्फ़ घर की ज़िम्मेदारियों और काम के कारण लेबर फ़ोर्स में शामिल होने में असमर्थ हैं। इसके साथ ही जो महिलाएँ काम भी कर रही हैं उनकी सफलता में और आगे बढ़ने में घर के बाधा बनते हैं।

रिपोर्ट में यह क्या गया है, “सभी महिलाओं के साथ  उनकी आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना भेदभाव किया जाता हैं।

लेबर मार्केट में भारतीय महिलाएँ 

रिपोर्ट में मार्केट में औरतों के साथ होने वाले भेदभाव के आँकड़े बताए है। आँकड़े बताते है औरतों के भेदभाव के कारण कम वेतन 98% हैं वही हम पढ़ाई और अनुभव के हिसाब से यह सिर्फ़ 2% है। इसका मतलब यह है आज भी सिर्फ़ औरतों के साथ उनके जेंडर के कारण भेदभाव होता हैं।

इसकी तुलना में हम सेल्फ़-एम्प्लॉड मर्दों की बात करे तो वे औरतों से 4-5% ज़्यादा कमाते हैं। ऑक्सफैम इंडिया के चीफ़ इग्ज़ेक्युटिव ऑफ़िसर (CEO) अमिताभ बेहर ने इस पर कहा, “अगर मर्द और औरत वर्क फ़ोर्स पर एक ही लेवल पर काम शुरू करें लेकिन आर्थिक मामलों में औरतों के साथ भेदभाव होगा और वे मर्दों से पीछे रह जाएँगी।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है, “सरकार को लेबर फ़ोर्स  में औरतों का गैप कम करने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा औरतों को प्रोत्साहन करना चाहिए। सरकार को उनको अच्छी वेतन, ट्रेनिंग, और नौकरी कोटा आदि देना चाहिए ताकि ज़्यादा से ज़्यादा औरतें नौकरी के लिए प्रोत्साहन हो।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है,  पिछड़े होए समुदाय जैसे एस॰सी॰, एस॰टी॰, आदिवासी और दलित समुदाय के लोगों को भी आगे आने के मौक़े देने चाहिए। आप ने सुना ही होगा कि किसी भी काम की शुरुआत घर  से होती है । अगर परिवार के लोग औरतों के ऊपर से घर की ज़िम्मेदारियों को कम कर देंगे। उनको अपने सपनों की और बढ़ने देंगे तो यह जेंडर गैप में अपने आप कमी आने लगेगी।

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